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आभार, ज़िन्दगी और मैं -

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हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हर कोई अपने जीवन में किसी न किसी चीज का पीछा कर रहा है। एक स्थान से दुसरे की ओर बढ़ने की इस यात्रा में हम अपनी भावनाओं, जरूरतों, लालच, आकांक्षाओं और अन्य कई चीजों के साथ काम करते हैं, जिसके परिणाम में हम आनंद, खुशी, तनाव, दुःख, दबाव, क्रोध, शांति, दोष, कृतज्ञता जैसी कई सारी भावनाओं को महसूस करते हैं। मैं कुछ साल पहले स्वामी विवेकानंद को पढ़ रहा था, उन्होंने अपने एक भाषण में कहीं उल्लेख किया था कि दोषारोपण का खेल खेलने के बजाय हम एक बार ठहर कर यह देख सकते हैं कि हमारे भीतर से निकलने वाली हर चीज का स्रोत क्या है! यह विचार मुझे बहुत ताकत देता रहा जब मैं अपनी सीमाओं को पार कर रहा था और लोगों की कहानियों के साथ अपने व्यक्तिगत विकास के लिए एक रास्ता खोज रहा था। दो साल पहले एक आवासीय कार्यक्रम के दौरान, मुझे आभार व्यक्त करने की ताकत का एहसास हुआ कि यह उस दुनिया में जादू कैसे पैदा कर सकता है जिससे हम जीना चाह रहे हैं! डेढ़ साल से, मैं कृतज्ञता के कुछ छोटे छोटे अभ्यास कर रहा हूं, जिनसे मैं सड़कों पर चलते हुए, किताबें पढ़ते हुए और दोस्तों के साथ भोजन करते हुए प…