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आख़िरकार अगस्त को आज़ादी मिली

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Source - Unsplash.com अ गस्त की बारिशें सुकून और तड़प साथ लेकर आती हैं और उन्हीं के साथ आये ढेर सारे किस्सों और पुरानी यादों के संदूक में लिपटी तस्वीरें और लम्हें किसी भी नामामूली इंसान को झकझोर कर रख देने के लिए काफी होते हैं। ठीक इसी तरह कृति को विष्णु का कॉल आया जब वह अपनी ख़्वाहिशों की रंगत भरी दुनिया में ऐसी ही अगस्त की बारिश में भीगकर बैठी हुई कुछ यादें ताज़ा कर रही थी। विष्णु से मुलाक़ात तो केवल दो महीने पुरानी थी लेकिन उससे बात करते समय कृति को ऐसा लगता था कि वह न जाने कितने समय से उसे जानती है उससे बातें करती है और उसके लिए दुआएं करती रहती है। अपने घर की छत पर बने कमरे में कभी न समाने वाले ऐसे कितने ही ख़याल कृति के दिल में जन्मते और फिर कहीं टोह पाकर छुप जाते। कृति को 6 अगस्त की रात एक ईमेल मिला और उसे तुरत फुरत दिल्ली के लिए अपना साजो सामान समेट कर निकल जाना पड़ा , ताकि वह अपना आने वाला एक साल ढेर सारी दोस्तियों , कई बातों और नई मुश्किलों के साथ गुज़ार सके।           कृति दिल्ली आयी तो उसे यहाँ के आसमान में बादल दिखाई दिए जो शायद...

मुलाकातें, यात्रा और प्रेम

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मुलाकातें हमेशा ही खूबसूरती की नींव रखती है. तकरीबन ३ सालों के बाद राहों ने मुझे इंदौर की गलियों से रूबरू करवाया और दिल की तमाम ख्वाहिशों का ज़खीरा अपने पूरेपन के एहसास में खोकर लौटा. पिछले ३ साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से काफी अहम और प्रेरणादायी रहे हैं, जितना कुछ इन वर्षों ने दिया है वह अमूल्य है. इन राहों के सफ़र में कुछ दोस्त अपनी राह पर चलकर इस खूबसुरत शहर आ चुके थे, जिनसे मिलने की फिराक़ में मैं यहाँ पहुँच गया. दोस्तों के साथ बैठकर अपने और उनके जीवन की यात्रा के बारे में जानना और उनके अंतर्मन को सुनना मेरे लिए एक नए आसमान के द्वार खोलने जैसा अनुभव रहा है. चाहे फिर रिंग रोड पर विवेक और गजेन्द्र के साथ काम और व्यक्तिगत जीवन की बाते हों या फिर उनके जीवन के ३ वर्षों में बीते हुए वसंत का किस्सा: गजेन्द्र और विवेक को ३ सालों के बाद मिलना और उनमें आये हुए बदलाव का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं है. ऐसी मुलाक़ातें वक़्त को कीमती बनाती हैं.   नवोदय के साथी रहे शिवपाल, जितेन्द्र और ईश्वर के साथ का वक़्त अपनी अलग छाप रखता है और यह एहसास एक सुकून देता है कि साथी अपने दिल की...

हमारा प्रेम में होना

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रास्तों के पड़ाव ज़िन्दगी के मायने समझाते हैं और मैं हमेशा से ऐसे पड़ावों की तलाश में रहा। तुम आयी मेरी राहों के लिए एक ऐसा ही पड़ाव बनकर जिसने मुझे थाम लिया अपने सारे रंगों और खुशबुओं के साथ। तुम्हारा साथ रहना मुझे एक नएपन के एहसास से भर देता है। जब तुम थामती हो मेरा हाथ तो मैं अपने आप को गंगा में खड़ा हुआ महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता कि हम कब तक इस तरह शहर के कोनों में मिलते रहेंगे लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है कि हमारे मिलने में प्रेम और विश्वास की खुशबू हर वक़्त आती रहेगी। तुम्हारा सवाल करना मुझे तुरंत सारे आसमानों से ज़मीन पर ले आता है, जब तुम खिलकर अपना ख़्वाब पूरा कर लेती हो तो लगता है कि मोक्ष का मज़ा फीका पड़ जाएगा।        तुम्हारे दाहिने चलते रहने पर हवाओं ने मुझे महसूस करवाया कि हम कितने कीमती हैं एक दूसरे के लिए! ज़िन्दगी की उम्र तो नहीं पता लेकिन इसके रहने न रहने पर हम एक दूसरे को जीते रहेंगे इतना ज़रूर जानते हैं। जब तुम हँसती हो तो दिल करता है कि पहाड़ों में बर्फ़ गिरने लगे और मैं तुम्हारे साथ उसको निहारता रहूँ। जब जब तुम अपने गले से मुझको लगा लेती हो मेरे जवाबों...

तुम्हारे गले लगकर

तुम्हारे गले लगकर, मैंने जाना कि ख़ुशी, सुकून, प्रेम और इंतज़ार को किस तरह जिया जाता है! तुम्हारे हाथों में अपने हाथों को छोड़कर, मैं जान पाया कि तरंगों का जीवन क्या होता है! तुम्...

महा मिलन

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Source - Pintrest.com दि वास्वप्न लगती हुई वह रात जुगनुओं ने पा ली , साँझ के अंतिम क्षणों को बींध कर माला बना ली: उस क्षणिक सी चाँदनी में पाते रहे सब स्वर्ण रत्न अस्तित्व खोते उन अधर का बढ़ता घटता सा जतन। पूर्णिमा का दूजा चाँद चल दिया पूर्ण से शून्य को बाँधे रहे समूची राह में दो हाथ अपने दो हाथ को: नित् खोते रहे दोनों ही तन  पाते रहे हर क्षण नया जीवन बिसरती रही सारी खुशबुएँ पाने को एक अनवरत लगन; रह रह कर मूंदते दो नयन और , फिर और की प्यास में , खिल खिल उठा सारा जीवन कुछ गहरेपन की तलाश में: बेकाबू होते रहे मधुकलश जो थे साँझ तक जड़-स्थिर , रीत कर भी भरते रहे सब घूँट डूबती निशा में होकर निखर ; Source - Daily Express सारे अनजाने बंधनों का कोई भी पट न रहा छूटा , कोई न बचा तार ऐसा जो आवेग के बूते न टूटा: गढ़ता परिभाषा मौन की झंकृत स्वर पायलों का दुलारता तन का हर कोना प्रेम से सम्पूर्ण दंश सलोना ; लिखते रहे हर बीतते पहर मौन , शोर और सृजन टूटते रहे आवेग के संग दर्द , मुस्कानें औ...

नदी और समंदर

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Source-YouTube  सालों-साल के अपने बर्फीले आँगन को छोड़कर, वो चल पड़ती है हरियाली साड़ी ओढ़े, चाँदनी का आलेप लगाए, चट्टानों का सुनहरा गहना पहने, मछलियों का काजल आँजे, फूलों की लाली अपने अधरों पर सजाकर, कल कल करती पाजेब पहनकर, हर पड़ाव पर प्रेम बिखेरती हुई, अपने प्रियतम के आँगन पहुंच जाती है, अपने पिता पर्वत को विस्मृत कर, तब सूर्योदय की लालिमा से अपनी प्रेयसी की मांग भरकर, वह उसे अपने आगोश में समेट लेता है, और इस तरह नदी समंदर में मिल जाती है ।                                  .....कमलेश.....

तुम, मैं और मोक्ष

कभी दरिया में बहता कभी किनारों से टकराता, किसी उपवन में ठहरकर कुछ पल को सुस्ताता, चला जा रहा है मन मेरा एक मंजिल की ओर । सफर अकेले शुरू हुआ मगर अब थोड़ी तन्हाई साथ है, कुछ तारीखे...

तुम्हें याद है ना ?

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Source - Daily Mail                            उस दिन मैं अपने घर वापस आया था कुछ दिन की छुट्टियाँ लेकर , सबसे मिलना जुलना हो चूकने के बाद जब खाना खाने बैठा तब तुम्हारा फोन आया । तुम बहुत नाराज थी क्योंकि मैं इस बार भी तुमसे मिलने नही आ पाया था तुम्हें बहुत देर समझाने के बाद कहीं जाकर तुम सामान्य हुए वह भी इस वादे के साथ कि वापसी के वक्त तुमसे मिलकर जाऊं । उस बातचीत के बाद मेरे दिन तुम्हारे साथ मुलाकात के सपने देखते हुए कब गुजर गए पता ही नहीं चला ।                             उस रोज शनिवार था मैंने उठकर सबसे पहले तुम्हे फोन किया था ताकि तुमको बता सकूँ के मैं आ रहा हूँ ,तुम कह रही थी के दोपहर तक आ जाना मैं इंतजार करूँगी । मैं उस फोन के बाद काम में इतना उलझ गया था कि तुम्हारे पास आते आते बहुत लेट हो गया था,फिर बस से उतरकर पागलों की तरह भागते हुए तुम तक पहुँचा तो बस स्टॉप की उस बेतरतीब भीड़ में तुम्हें व्यवस्थित और खामोश प...

मोहब्बत की राह पर चलते हुए

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 Source-Ilovehdwallpapers इस बार की मुलाकात मे खुल जाएगे वो सारे धागे प्रीत के जो हमारे बीच अब तक थे बंधे हुए, तेरा दीदार होगा इस तरह के भुलाकर हर लम्हे को बिताएंगे सदियाँ हम दोनों खामोशी भरे उन पलों मे । लफ़्ज़ों को इंकार कर देना इस दफा आँखे बात करेगी अधूरी रह गयी बातों को अपनी धड़कने सुन लेगी, झुकाकर के अपनी नज़र तुम कर देना इकरार फिर से अपनी गहराती चाहत का जो बहुत समय से नही हुआ । तुमको अपने गले लगाकर अपना हक अदा करूँगा तुम्हारे ख्वाबों को सजाकर तुमसे मोहब्बत भी करूँगा, तुम्हारे दिल की मुंडेर पर जब मेरे प्यार की कोयल ऐसा कोई राग छेड़ देगी तुम सारा जग भुला दोगी । मैं आऊंगा तुमको अपना बनाने इस ज़ालिम ज़माने से जीतकर अपनी मोहब्बत को पाने सारी बन्दिशो को तोड़कर दूर चले जायेंगे हम दोनों मोहब्बत की राह पर चलते हुये ।                                      .....कमलेश.....

तेरा मेरा रिश्ता

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 Source-Google जब भी उठती है मेरी कलम तेरे ही अफ़साने लिखा करती है राहें ये मेरी अक्सर मुझे तेरी ही गलियों में लाया करती है अजीब सा एहसास है क्यूँ तेरे और मेरे रिश्ते में । अक्सर कभी गपशप में अपनी उठ जाता है ये सवाल भी के क्या नाम है इस रिश्ते का ? मुस्काते हुए तब तू कहती है कुछ ख़ास ना समझो इसे रास्ता है ये एक दोस्ती का, सुनकर जवाब को तेरे सो जाते हैं अरमान मेरे जो तुझे देख जाग उठे थे । अचानक निडर होकर तुम जब छेड़ देती हो मुझे घोलकर अपनी साँसों में, करती हो प्यार फिर मुझे लगता है इससे हसीन नहीं ज़िन्दगी का कोई और लम्हा, मोहब्बत को तेरी पाकर करता हूँ खुद से सवाल अजीब सा एहसास है क्यूँ तेरे और मेरे रिश्ते में । तेरी कही हुई वो बाते आज भी याद है मुझे के मुझसा नहीं कोई तेरा, और साथ चलेगी तू मेरे थामकर मेरे हाथ को ज़िन्दगी की इस डगर में: दिए थे जो तोहफे तूने अज़ीज़ है मेरे आज भी जैसे हो मेरी जान इनमें। खिलखिलाकर हंसती जब तू सारी खलिश मिट जाती है करी है जब शरारत कोई मेरे सोये ख़्वाब जगा जाती है भर कर बाँहों में तुझे जब दूर हो जाता हूँ जहान् से कतरा कतरा इस कायनात का करता है मुझसे ये ...

इस बार की मुलाकात में

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Source-Wallpaperstock.net मिलने आया हूँ तुमसे सारी ख्वाहिशों को रख परे तुम भी सुन लेना फिर उन अनकही बातों को जो इस बार की मुलाकात मे एक-दूसरे को हम कहेंगे नही । सारा जहान् समेट लूँगा जब तुम सामने रहोगी बाँहो मे लेकर जवाब दूंगा जब भी कोई सवाल करोगी हर बार ना हुआ वो होगा इस बार की मुलाकात में । लाऊँगा तुम्हारे लिए मैं कुछ लम्हे प्यार से भरे बिताकर उन्हें तुम्हारे संग हो जाएंगे दुनिया से परे ना रहेगा कुछ भी अधूरा इस बार की मुलाकात में ।                             ..... कमलेश.....

मिलन

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दबाकर दिल में हसरतें तुम तक चला आया हूँ कैद है पलको में अरमान जो मिलन पर पूरे हो जाएंगे । tiffy961.deviantart.com इक हसीन शाम के साथ  होगा ढलता हुआ सूरज टूट जाएगी जब बेड़ियाँ ना रहेगा मजहब इश्क में तुझे ख्वाहिशें सुनाऊँगा अपनी जब हमारा मिलन हो जाएगा । फिर तेरी बाँहों में गुजरेगी खूबसूरत हर शाम मेरी जब मिट जाएगी दूरियाँ फासला ना रहेगा दिलों में तेरे सपनों को पूरा करूँगा जब तुझसे मिलन हो जाएगा । बंदिशें टूटेगी जमाने की रात जब वो आ जाएगी तेरे इशारों को समझ लूँगा मोहब्बत ये आशना होगी हम अपनी दुनिया बनाएंगे जब मेरा तुझमें मिलन होगा ।                               .....कमलेश.....