संदेश

ख्वाहिश लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दिन, ज़िन्दगी और प्रेम

चित्र
  ज़िन्दगी को जीते हुए कभी कभी यह ख़याल आता है कि इस जीने के प्रक्रिया से यानि उन सारी चीज़ों, उन सारे कामों से जो हम ख़ुद को ज़िन्दा रखने के लिए करते चले आ रहे हैं उनसे एक ब्रेक मिलना चाहिए. ज़िन्दा रहने के चक्कर में हम कितनी चीज़ों को ऐसे ही छोड़ देते हैं अमूमन दिन के गुज़रने को ही ले लीजिये. मुझे ऐसा लगता है कि हम दिन को गुज़रते हुए कभी भी नहीं देख पाते. जैसे, वह पल जब नींद बिस्तर छोड़ती है और सवेरा आँखों में उतरता है. सूरज की पहली किरण एक परिपक्व प्रेमी की तरह चेहरे को छूती है और रात भर की थकान सुबह की ठंडी हवा के साथ कहीं गुम हो जाती है. और इस तरह जीवन जीने का जतन करते करते अनगिनत चीज़ें हमारे जीवन का हिस्सा हो जाती है जहाँ हम कभी नहीं पहुँच पाते.  मेरी ज़िन्दगी में कुछ एक ऐसी चीज़ें हैं जिनसे मिलकर मैं ख़ुद के क़रीब होने जैसा कुछ महसूस कर पाता हूँ. दिन के पहले पानी के घूँट में मुझे वह प्रेमिका याद आती है जिसने मुझे मरते मरते बचाया था. नाश्ते के पहले कोर में मुझे वो अम्मा मिल जाती हैं जिन्होंने पिछले बरस मेरे खेतों में गेहूँ काटा था. नहाते हुए मैं ख़ुद को विदर्भ (महाराष्ट्र राज्य का एक क्...

हमारा प्रेम में होना

चित्र
रास्तों के पड़ाव ज़िन्दगी के मायने समझाते हैं और मैं हमेशा से ऐसे पड़ावों की तलाश में रहा। तुम आयी मेरी राहों के लिए एक ऐसा ही पड़ाव बनकर जिसने मुझे थाम लिया अपने सारे रंगों और खुशबुओं के साथ। तुम्हारा साथ रहना मुझे एक नएपन के एहसास से भर देता है। जब तुम थामती हो मेरा हाथ तो मैं अपने आप को गंगा में खड़ा हुआ महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता कि हम कब तक इस तरह शहर के कोनों में मिलते रहेंगे लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है कि हमारे मिलने में प्रेम और विश्वास की खुशबू हर वक़्त आती रहेगी। तुम्हारा सवाल करना मुझे तुरंत सारे आसमानों से ज़मीन पर ले आता है, जब तुम खिलकर अपना ख़्वाब पूरा कर लेती हो तो लगता है कि मोक्ष का मज़ा फीका पड़ जाएगा।        तुम्हारे दाहिने चलते रहने पर हवाओं ने मुझे महसूस करवाया कि हम कितने कीमती हैं एक दूसरे के लिए! ज़िन्दगी की उम्र तो नहीं पता लेकिन इसके रहने न रहने पर हम एक दूसरे को जीते रहेंगे इतना ज़रूर जानते हैं। जब तुम हँसती हो तो दिल करता है कि पहाड़ों में बर्फ़ गिरने लगे और मैं तुम्हारे साथ उसको निहारता रहूँ। जब जब तुम अपने गले से मुझको लगा लेती हो मेरे जवाबों...

ख़ताओं की पवित्रता

ख़तायें, कितना छोटा और पेचीदा है यह देखने और सोचने में, लेकिन मैंने कभी इतना ख़याल किया नहीं इस शब्द पर, शायद मैं ज़रूरतों को वक़्त देने में व्यस्त था जिसका परिणाम यह हुआ कि ज़िन्द...

गुमनाम

चित्र
Source - wallhere.com तेरी जानिब जब भी कदम बढ़ते हैं कुछ दूर चलने पर अचानक राहें अजनबी हो जाती है ; फिर भी कभी, जो पहुंच जाऊं तुम तक इन गुमनाम राहों से, तो मुझे तुम अपने पास रख लेना, वैसे ही जैसे स्पंज सोख लेता है पानी, और सुनो तुम्हारी आंखों का इंतज़ार होना ख्वाहिश नहीं, चाहत है कि तेरे चेहरे की हंसी हो जाऊं । मुझे अपने नज़दीक वैसे ही संभाल कर रखना जैसे लॉकर रुम में रखा जाता है किसी का सामान, बिलकुल अजनबियों सा गुमनाम ही रखना मुझको तुम, नाम की भीड़ बहुत है इस दुनिया में । कोई पहचान नहीं चाहिए मुझे तुम्हारे करीब जब भी रहूं मैं, मैं नहीं चाहता हूं कि कोई देख ले मुझे तुमको जीते वक़्त, तुझमें से कोई ढूंढ ना पाए मुझको कभी भी, चाहे वो कितना भी अच्छा चोर क्यों ना हो । छुपाओ मुझको अगर तो ऐसे छुपाना, जैसे राम ने अपने वनवास में छुपाया था सीता को ।।                        - कमलेश

इबादत

बेवक़्त की बारिश ने आज सारे ज़ख्मों को धोया, बदलियाँ स्वागत में जुटी है, हवाओं ने अभी अभी एक ख़त पहुँचाया, जिसे आसमान ने चीख-चीखकर पढ़ा, ख़बर है कि तुम आने वाले हो । इतनी जल्दी भी क्या है वैसे ? मुझे तसल्ली से नशा करने दो इस जवान होते इश्क़ का, देख लेने दो जी भरकर इंतज़ार में तड़पते रिश्ते को, जान लेने दो मुझको ख़्वाबों में छिपे सब राज़ । खोद लेने दो एक खूबसुरत कब्र प्रेम में मौत के बाद, सुकून से दफ़न होने के लिए । तुम्हें पसंद है हवाओं की सादगी, और मुझे मोहब्बत है बेगानेपन से; तुम्हारी हसरत है बाद बारिश के साथ मेरे शामें गुज़ारने की, मैं चाहता हूँ कि आसमां रोता रहे उम्रभर ज़मीन से अपने इश्क़ में । कितनी अजीब है हमारी इबादत की तरकीबें ? तुम सवेरे-सवेरे खोजती हो घर में पूजा का कोना, मैं सुबह इबादत की बजाय तुम्हारे साथ चाय पीना चाहता हूँ ।                                   -- कमलेश

अन्तिम इच्छाएं

ख्वाहिशों का जेहन में होना शाश्वत क्रिया होती है, और सांसें इच्छाओं पर होने वाली महज़ एक प्रतिक्रिया का रूप, कोई सांस लेना छोड़ भी दे तो वह मर नहीं जाएगा, पर जब इच्छाओं का अं...

सवाल

मेरे साथ राहों पर घूमते हुए, मेरी साँसों के चलने की वजह बनते हुए, एक सवाल तुमने जो पूछ लिया था मुझसे कि कहाँ तक जाना चाहता हूँ तुम्हारे साथ  ? मैं वहाँ जाना चाहता हूँ, जहाँ तुम ...

एहसास

चित्र
Source - Google मैं जमाने की भीड़ से बेखबर तेरे इंतजार में खड़ा हूँ, सोते जागते हर पल को बेकरार होकर खड़ा हूँ, नही चाहता कि मुझे तेरे सिवा कोई और चाहे, नही पसंद है कि मेरे सिवा तुझे देखे किसी की निगाहे, इक बारिश मुकम्मल हो तेरी मेरी मोहब्बत के लिए, कुछ हसरत अधूरी रहे इक दूजे की तड़प के लिए, मददगार लगता है मुझको यूँ अकेले बारिश में भीगना, बूंदो के छूने मे है वो आनंद जैसे तुम्हारे लबों को चूमना ।                                                     .....कमलेश.....

भगवान् होने के लिए. . .

चित्र
  Source - How.fn कोई हलचल तो होगी इस विरान बियाबान में, कोई कोयल तो कूकेगी जीवन के इस उपवन में, उल्लास निरंतर आएगा मायूसी समेटे आँगन में, रोशनी का उत्सव होगा अंधेरे पर श्री के बाद, खुशी जन्म लेगी फिर दुख के निर्वाण के लिए, घर को त्याग कोई जाएगा पिता की प्रतिष्ठा के लिए, हलाहल का पान करेगा वो समूचे जग के हित को, राधा भी विरह में तड़पेगी प्रेम की अमरता के लिए, कोई अवतरित होगा यँहा खुद भगवान् होने के लिए ।                            .....कमलेश.....

मुझे पसंद नहीं

चित्र
  मैं तुझे चाँद नही कहना चाहता ना ही तेरी सूरत को चांदनी क्यूँ की चाँद को दुनिया देखती है, लेकिन तुझे मेरी निगाहों के सिवा कोई और इस तरहा देखे मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता की हम दोनों खुली वादियों की सैर करें, हवाएं किसी को नही बख्शती वो किसी को भी कभी भी छू लेती है, लेकिन तुझे मेरे सिवा कोई छुए मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता की तू कभी सोलह श्रंगार करके सामने आये, क्यूँकी तुझ पर फ़िदा होकर हर कोई तुझे चाहने लगेगा, लेकिन मेरे सिवा कोई तुझे चाहे मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता के हम भीगें सावन की पहली बारिश में, भीग जाने से पानी तेरी जुल्फों में अपना अक्स खोकर उतर जायेगा, लेकिन मेरे सिवा तुझमें कोई खो जाये मुझे पसंद नही ।                           .....कमलेश..... 

एक ख्वाहिश

चित्र
 Source - Times Bull दस साल बीत गए अपना सूना हाथ देखते हुए, हर मर्तबा सोचता हूँ किस गुनाह की सजा है ये ? इस दफा आस है एक खत की जो 'प्यारे भाई' से शुरू हो, अपने नसीब में उस प्रेम को खुद लिखने की हसरत है मेरी । इस बंधन की बंदिशे ही मेरे हाथो को रास आती है, ऐसा शख्स जिसके होने भर से किसी की गलतियां छुपती है, किसी की अनंत शरारतें तो कभी मोहब्बत भी । बिना डरे जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर लेने वाली, हर बार मेरी ख्वाहिशों को माँ की तरहा जान लेने वाली, इक प्यारी सी बहन की वो राखी मुझे इस साल चाहिए, खुशनसीब शक्स को ही हासिल वो प्रेम मुझे इस साल चाहिए ।                         .....कमलेश.....  

व्यथा

हर बीती बात अब पराई लगती है, ऐ जिंदगी अब मुझे धूप लगती है । उड़कर आते थे कभी खुशी से घर, अपने घर में तो अब घुटन लगती है । चाहा के ना लिखूं किसी के दर्द को पर, हर तकलीफ अब मुझे अपनी लगत...

कुछ मेरा भी वक्त ज़ाया किया करो ।

कुछ मेरा भी वक्त ज़ाया किया करो, कभी हमे भी फोन लगा लिया करो । रोज़ इसी राह से  काॅलेज जाते हो, कभी तो देखकर मुस्कुरा दिया करो । दर्द होने लगेगा   तुम्हारे  पैरों में, इतना भी ब...

ओढ़कर बैठा हूँ

चित्र
Source - Mobile9 ओढ़कर बैठा हूँ मैं एक ख़ामोशी की चादर को इस बार ख्यालो में आओ तो चुप्पी तोड़ चले जाना कडवी लगती है वो फ्रीज़ में रक्खी मीठी लस्सी भी बेस्वाद हो गया है नाश्ता और मेरा फेवरेट खाना नहीं जंचती मुझे कोई भी धुन आजकल के गानों की इस बार यादो में आओ तो कोई नयी सी धुन सुना जाना | ओढ़कर बैठा हूँ ........   सूरज से दुश्मनी कर बैठा हूँ एक बात के पीछे मैं के इस बार चाँद की चांदनी से इश्क़ लड़ाना है मुझे पशोपेश में है मेरी सारी ख्वाहिशें अबतलक ऐसे की पूर्णमासी की रात   तुझे छत पर  बुलाऊंगा  कैसे  घुमने लगा हूँ हर रास्ते पर अजनबियों के  तरहा हर कोई मुझको सनकी कहने लग गया है रातों को जागते हुए और चाँद को देखते देखते थक गया हूँ ख्वाहिशों की आग में जलते हुए मैं इस बार मिलने आओ तो सारी थकान मिटा जाना | ओढ़कर बैठा हूँ .........   ग़ज़लें कविता लिखना भी अब कभी कभार होता है तुमसे बात किये ...

मेरा इश्क

चित्र
 Source - Google काली घटाओं सी तेरी जुल्फें जब हवा के संग लहराती है , ऐसा लगता है मानो के कुछ पल में बारिश होने वाली है | तेरी आँखे लगती है झील सी जहां आशिक़ी के ख्वाब तेर रहे हैं, मुस्कान अधरों पर ऐसे छाती है जैसे सूर्योदय के वक़्त की लालिमा | झुका लेती हो गर्दन जब शरमा के प्रेम के दिए जल उठते हैं , बाहें फैलाकर करती हो आलिंगन जब मेरा हर अंग तुझमें बिखर जाता है | सोचता हूँ कर के कैद उस पल को हासिल कर लूं तेरी बेशुमार मोहब्बत | तेरे कदम इस तरह चलते हैं जैसे उर्वर्शी धरा पर आई हो , पदचिन्ह तुम्हारे जब देखता हूँ लगता है लक्ष्मी वसुधा पर आई है | समेट कर के तेरी इस काया को नाम दे दिया है मोहब्बत मैंने , ठहरी है निगाहें और धड़कन खुद को तेरे नाम कर दिया मैंने |                  ...