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मौसम

आज सुबह से बादल हैं आसमां सांवला दिख रहा है क्या यह मौसम है ? नहीं नहीं ये मौसम नहीं यह खिलवाड़ है, खिलवाड़ है मेरे अरमानों के साथ, मेरी आंखों के इंतज़ार के साथ । पलकें झुक रही ...

मेरी कविताएं

कोई भी पंक्ति या ग़ज़ल अब नहीं उतरती मेरे जेहन से पन्नों पर, कोने में कमरे के बिखरे पड़े हैं अब तक कई कहानियों के टुकड़े । दीदार के बगैर ही गला घोंटा है मैंने जाने कितने अल्फ...