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तुम, मैं और मोक्ष

कभी दरिया में बहता कभी किनारों से टकराता, किसी उपवन में ठहरकर कुछ पल को सुस्ताता, चला जा रहा है मन मेरा एक मंजिल की ओर । सफर अकेले शुरू हुआ मगर अब थोड़ी तन्हाई साथ है, कुछ तारीखे...