तुम, मैं और मोक्ष
कभी दरिया में बहता कभी किनारों से टकराता, किसी उपवन में ठहरकर कुछ पल को सुस्ताता, चला जा रहा है मन मेरा एक मंजिल की ओर । सफर अकेले शुरू हुआ मगर अब थोड़ी तन्हाई साथ है, कुछ तारीखे...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।