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अतीत की खिड़की में - २

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Source - Pinterest.com           सा गर ने अक्टूबर की शुरुआत इंडिया हेबिटेट सेंटर से की , उसकी अनिश्चितताएं उसे कहाँ ले जा रही थी यह सागर को कभी जानने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। इधर हीर ने अक्टूबर का स्वागत अपने अंदाज़ में ही किया , कई सारे सफ़र , नई दोस्तियाँ और अकस्मात सी मुलाक़ातें। दिन जितनी जल्दी गुज़रना चाहिए उतनी जल्दी अगर वाकई में गुज़रे तो ऐसा लगता है कि हम हवा के झोंके से उड़े जा रहे हैं लेकिन ऐसा कुछ भी न तो हीर और न ही सागर के साथ हो रहा था। हवाएँ अपनी रफ़्तार के साथ कभी सागर को कल से आज तो कभी हीर को आज से कल में ले जा रही थी और वापिस लेकर भी आ रही थी। अक्टूबर की रातें सागर के लिए चाँदनी और पुरानी यादों का एक बॉक्स लेकर आई जब घर जाने के लिए ट्रेन में बैठकर सबसे पहले उसने उसकी खिड़की से बाहर झाँका। सागर अपने गाँव और वहाँ की हर चीज़ को बहुत ही बेचैनी भरे दिल में एक बार फिर सँजोना चाह रहा था , इस बार सागर अपने दोस्तों , पीछे छूट गए रिश्तों और अपनी पसंदीदा जगहों को फिर से मिला और जब वह 10 दिन बाद वापस आने लगा तो एक छोटे से सवाल का सामना उसने किया जो उसकी 3 ...

जनता एक्सप्रेस

                         “यात्रीगण कृपया ध्यान दें इंदौर से चलकर उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, आगरा के रास्ते जम्मूतवी को जाने वाली गाड़ी संख्या 12919,मालवा एक्सप्रेस, ग्वालियर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 से चलने को तैयार है धन्यवाद |” “ओये ट्रेन आ गई है, तू कहाँ है अब तक?” “ बस आ रहा हूँ दो मिनट में ” “चल ठीक है” अमन ने फ़ोन रखते हुए कहा और बोगी नंबर 7 को खोजकर बैग थामे गेट पर खड़ा हो गया | सीट का नंबर उसे पता नहीं था इसलिए उसे मधुकेश का इंतज़ार करना पड़ा, मधुकेश ट्रेन छूटने के ठीक बाद पहले बोगी नंबर 8 में चढ़ा और फिर उथल-पुथल मचाते यात्रियों को चीरकर अमन तक पहुँच पाया | “कौनसी सीट है ?” अमन ने पूछा, “ एक मिनट मेसेज देखने दे |” “कोई तो काम रेडी रखा कर यार” “S-7 43 और 44”   मधुकेश का जवाब हल्की आवाज़ में सुनाई पड़ा | कोई भी काम रेडी ना रख पाना इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स की बड़ी कुशल प्रतिभा होती है, खैर दोनों की बहस और खोजबीन का नतीजा ये निकला के दोनों अभागे इंजिनियर गलत ट्रे...

मौसम

आज सुबह से बादल हैं आसमां सांवला दिख रहा है क्या यह मौसम है ? नहीं नहीं ये मौसम नहीं यह खिलवाड़ है, खिलवाड़ है मेरे अरमानों के साथ, मेरी आंखों के इंतज़ार के साथ । पलकें झुक रही ...