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दिन, ज़िन्दगी और प्रेम

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  ज़िन्दगी को जीते हुए कभी कभी यह ख़याल आता है कि इस जीने के प्रक्रिया से यानि उन सारी चीज़ों, उन सारे कामों से जो हम ख़ुद को ज़िन्दा रखने के लिए करते चले आ रहे हैं उनसे एक ब्रेक मिलना चाहिए. ज़िन्दा रहने के चक्कर में हम कितनी चीज़ों को ऐसे ही छोड़ देते हैं अमूमन दिन के गुज़रने को ही ले लीजिये. मुझे ऐसा लगता है कि हम दिन को गुज़रते हुए कभी भी नहीं देख पाते. जैसे, वह पल जब नींद बिस्तर छोड़ती है और सवेरा आँखों में उतरता है. सूरज की पहली किरण एक परिपक्व प्रेमी की तरह चेहरे को छूती है और रात भर की थकान सुबह की ठंडी हवा के साथ कहीं गुम हो जाती है. और इस तरह जीवन जीने का जतन करते करते अनगिनत चीज़ें हमारे जीवन का हिस्सा हो जाती है जहाँ हम कभी नहीं पहुँच पाते.  मेरी ज़िन्दगी में कुछ एक ऐसी चीज़ें हैं जिनसे मिलकर मैं ख़ुद के क़रीब होने जैसा कुछ महसूस कर पाता हूँ. दिन के पहले पानी के घूँट में मुझे वह प्रेमिका याद आती है जिसने मुझे मरते मरते बचाया था. नाश्ते के पहले कोर में मुझे वो अम्मा मिल जाती हैं जिन्होंने पिछले बरस मेरे खेतों में गेहूँ काटा था. नहाते हुए मैं ख़ुद को विदर्भ (महाराष्ट्र राज्य का एक क्...

पल में छुपा पल

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Source - sidefx.com “वह बरामदे से उठी और पास के एक अँधेरे कमरे की ओर बड़ी, कमरे के दरवाज़े पर लगी कंदील मानो उसका इंतज़ार ही कर रही थी; जैसे ही उसने कंदील को छुआ वह तुरंत उसके हाथों में आ गई. कंदील उठाये वह उस अँधेरे कमरे में कुछ देर के लिए घूमती रही और अंत में किताबों की एक पूरानी कतार में से विनोद कुमार शुक्ल की एक किताब को अपने हाथों में लिए बाहर आ गई. यह घर उसके जेहन में तब से है जब से उसने दुनिया को समझना शुरु किया था. अक्सर जब वह इससे दूर होती है यह घर उसके सपनों में आया करता है और अपनी कहानी बताते हुए उसे अपने पास आने के लिए कहता है. आज जब इतने सालों बाद वह इस घर में वापस आई है तो उसके सपनों से जर्जर हालत इस घर की हो चुकी है, उसकी यादें आज भी घर को अपने अन्दर सहेजे हुए है और शायद यही वजह रही है कि घर उसके लिए अभी तक जर्जर नहीं हुआ है. बरामदे के सामने बनी बाड़े की दीवार ज्यादा बारिश की वजह से पिछले साल गिर गई थी लेकिन आँगन से जुड़े दो कमरे अभी तक सहज और सुरक्षित थे; एक में कुछ पूरानी किताबों का ज़खीरा था और दूसरे वाले कमरे में रहने भर की जगह कुछ ज़रूरी सुविधाओं के साथ. विनोद कुमार शुक्ल...

जीवन यात्रा के २२ वर्ष और रोज़ पलटते पन्ने

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  ख़तों में उपजी अभिव्यक्ति और भावों का सम्मिश्रण जीवन के पड़ावों में ख़ूबसूरती बिखेरता है! हम कितनी समस्याओं या चुनौतियों से जूझ रहे हैं यह हमारे प्रेम करने और जीने के तरीकों से इतर हमें कदम-कदम पर एहसासों की डोर थामे रहने की ताक़त देता है. लेखन से मुझे ख़ुद को व्यक्त करने में सक्षम होने की खुशी और संतुष्टि मिलती है। वह वक़्त सबसे ख़ूबसूरत होता है जब मैं अपने रिश्तों में उनके लिए नियत प्रेम और पलों को बाँट पाता हूँ और जो रिश्ते हवाओं के साथ धुँधला रहे हैं उनकी खुशबुओं को फिर महसूसने के अनुभव को आत्मसात कर पाता हूँ. दुनिया में प्रेम और करुणा के साथ जी सकने वाले अनगिनत कारण हैं जिनके ज़रिये आसपास पनपते दूषित माहौल का सामना करना ज़रा सहज और साहस भरा हो जाया करता है. मैं नहीं जानता कि कोई किस तरह मेरे किसी काम को देखता है लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि मैं ख़ुद के द्वारा किये गये काम, लिए गये फैसलों और जिए गये पलों को कैसे देखता हूँ! समय ने मुझे विभिन्न रिश्तों और घटनाओं के माध्यम से प्यार और सहयोग को भारी मात्रा में मुझ तक पहुँचाया है। इस साल की शुरुआत में ख़ुद के लिए वक़्त नि...

खुशियों का रास्ता

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खुशियों का रास्ता दिल की राहों से होकर जब घर की दहलीज़ पर पहुँच जाए तो लगता है कि ज़िन्दगी में ठहराव और प्रेम एक साथ जिया जा सकता है. वक़्त से कोई कितना कुछ माँगेगा जब वह अपने मूल्यों पर जीते हुए वे सारे सवाल और रिश्ते सुलझा ले जिनसे जीवन के रास्ते छाँव और सुकून से भर जाया करते हैं. मैं पिछले महीने दीवाली के लिए घर पर था और यह मेरी दिल्ली आने के बाद की सबसे लम्बी घर पर बिताई हुई छुट्टियाँ थीं। इस बार जब मैं घर पहुँचा , तो कुछ ऐसा था जो मुझे हर क्षण कहता रहा कि यह समय ख़ास है और मैं इसे और अधिक सुंदर बना सकता हूँ वह भी मेरे प्रेम और समर्पण के तरीकों से. इस दफ़ा यह पहली बार हुआ कि मैंने अपने परिवार के लगभग सभी सदस्यों के साथ यादगार बातचीत की , चाहे फिर वह मेरी पापा के साथ हुई बातचीत हो या मम्मी या भईया-भाभी के साथ जीवन यात्रा के किस्से सुनना और सुनाने वाला समय. सब कुछ इतना सहज और सुन्दर था कि सिर्फ वक़्त के बहाव में पूर्णता के साथ संतुष्ट कर देने वाले स्तर तक स्थापित हो गया. एक बात मैं जीवन के इस पड़ाव पर अपने प्रेम की ताकत के साथ स्वीकारना सीख गया हूँ कि एक समय ऐसा भी रहा है जीवन में जब...

मुलाकातें, यात्रा और प्रेम

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मुलाकातें हमेशा ही खूबसूरती की नींव रखती है. तकरीबन ३ सालों के बाद राहों ने मुझे इंदौर की गलियों से रूबरू करवाया और दिल की तमाम ख्वाहिशों का ज़खीरा अपने पूरेपन के एहसास में खोकर लौटा. पिछले ३ साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से काफी अहम और प्रेरणादायी रहे हैं, जितना कुछ इन वर्षों ने दिया है वह अमूल्य है. इन राहों के सफ़र में कुछ दोस्त अपनी राह पर चलकर इस खूबसुरत शहर आ चुके थे, जिनसे मिलने की फिराक़ में मैं यहाँ पहुँच गया. दोस्तों के साथ बैठकर अपने और उनके जीवन की यात्रा के बारे में जानना और उनके अंतर्मन को सुनना मेरे लिए एक नए आसमान के द्वार खोलने जैसा अनुभव रहा है. चाहे फिर रिंग रोड पर विवेक और गजेन्द्र के साथ काम और व्यक्तिगत जीवन की बाते हों या फिर उनके जीवन के ३ वर्षों में बीते हुए वसंत का किस्सा: गजेन्द्र और विवेक को ३ सालों के बाद मिलना और उनमें आये हुए बदलाव का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं है. ऐसी मुलाक़ातें वक़्त को कीमती बनाती हैं.   नवोदय के साथी रहे शिवपाल, जितेन्द्र और ईश्वर के साथ का वक़्त अपनी अलग छाप रखता है और यह एहसास एक सुकून देता है कि साथी अपने दिल की...

तुम्हारा अस्तित्व

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यह दुनिया छोटी लगने लगी है मुझको, एक  शख्स पर इतना ठहर गया हूँ  मैं!                                               - नागेश इंतज़ार की परिभाषा को मैं, उसकी आँखों को देखने के बाद हाशिये पर रख देता हूँ। इतना बड़ा आसमान लेकिन फिर भी अपने आप तक पहुँचने के लिए उसके पास कोई तरीका नहीं है, मैं रख देता हूँ अपना सर उसके हाथों में और मिल जाता हूँ ख़ुद से उसके ज़रिये। वह ठहरती है दो पल के भ्रम में दो पहर तक तो ऐसा लगता है दिन को थोड़ा और बड़ा होना चाहिए। मैं जब भी उसके क़रीब होता हूँ मुझे यह दुनिया ऊन का गोला लगती है जिससे मेरी चाह है कि इसका स्वेटर बुनकर चाँद को ओढ़ाया जाए। एक ख़याल को जीते हुए इतना अरसा हो गया मुझे, आज जब उसे पीछे छोड़ा तो वह उसके बालों में लिपटे क्लिप तरह इतराता हुआ दौड़ पड़ा मेरी ओर। इतना दूर आ चूका हूँ चलते चलते कि अब लौटने के लिए मुझे पते की नहीं किसी के...

२१ साल और बातें

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                                     कई दफ़ा हम नहीं जान पाते कि हम कैसे जी रहे हैं लेकिन जब हमें बिन ढूँढे इस सवाल का जवाब मिल जाता है तो ऐसा लगता है कि हमसे ख़ुशकिस्मत इंसान इस दुनिया में नहीं है. आप कहीं भी रहो, आप कभी भी अकेले नहीं रहते आपके साथ आपका अनुभव, आपकी रिवायतें, आपके रिश्ते, आपका परिवार और आपका प्रेम जैसी कई चीजें आपके साथ रहती हैं. मैं पिछले कुछ दिनों में इन बातों को और बेहतर तरीके से जानकर आत्मसात कर पाया हूँ क्योंकि मैं एक ऐसे वातावरण का हिस्सा रहा हूँ जिसने मुझे ख़ुद के प्रति थोड़ा और दयावान होने की प्रेरणा दी है. मेरे जीवन के २१ सालों में मैंने अपने वातावरण और इस जीवन से कितना प्रेम किया है यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं क्या सीख सकता हूँ इस प्रेम, विश्वास और समर्पण से उपजे मेरे जीवन से, यह ज्यादा स्पष्ट दीखता है मुझे. जब मैं अपने प्रियजनों से कई मील दूर अपने आपको टटोलने में वयस्त था तब यही प्रियजन मुझे मेरे जीवन के अनमोल क्षण का अनुभव देने की कोशिश में लगे हुए थे, जब आप ख़ु...

खोज

कोई नहीं देख पाता सालों तक कि वह क्या ढूंढ रहा है, मैंने पाया तुम्हें तो जान पाया कि मैं तुम्हारी हकीक़त का पीछा कर रहा था। तुम दिखती हो बोधिवृक्ष सी जिसके तले पहुँचकर मैं बुद...

मैं और तुम

वक़्त चल दिया है भागीरथी सा मेरे दिल की गंगोत्री से, नासमझ देखता नहीं पलटकर नहीं तो जान जाता, कैसे बिखरा था हिमालय हजारों साल पहले गंगा उद्गम के समय । कोशिशें कई हुई है तेरे ...

ख़त

अपनी प्रेयसी के लिए ना जाने किस तरह खुद का कलेजा निकालकर रखता है, एक प्रेमी खुद के टुकड़ों को समेटकर, उसे ख़त लिखता है । एहसासों की फेहरिस्त बनाए नहीं बन पाती, कुछ बंदिशें अल्फ...

एहसास

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Source - Google मैं जमाने की भीड़ से बेखबर तेरे इंतजार में खड़ा हूँ, सोते जागते हर पल को बेकरार होकर खड़ा हूँ, नही चाहता कि मुझे तेरे सिवा कोई और चाहे, नही पसंद है कि मेरे सिवा तुझे देखे किसी की निगाहे, इक बारिश मुकम्मल हो तेरी मेरी मोहब्बत के लिए, कुछ हसरत अधूरी रहे इक दूजे की तड़प के लिए, मददगार लगता है मुझको यूँ अकेले बारिश में भीगना, बूंदो के छूने मे है वो आनंद जैसे तुम्हारे लबों को चूमना ।                                                     .....कमलेश.....

एहसासों का संग्रह

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  Source - Pinterest  * समन्दर के पानी के बेशुमार खारेपन के बावजूद,    मीठी नदी वंहा जाने के लिए हर चट्टान तोडती है | * तुम्हारी आँखों से नींद का छलकना सबूत है,    के तुमने रात भर हमारे ही ख्वाब संजोये है | * बहुत शोर है गलियों में के मुझे मिटा देंगे,    लेकिन मेरा वजूद तो सिर्फ तेरे होने से है | * मेरा खुदा रूठा हुआ लगता है आजकल,    शायद किसी ने उसे रिश्वत नहीं दी है | * अदा तुम्हारी आँखों की भाती नहीं है मुझको,    मेरी आँखों से मिलते ही झुक जाया करती है | * तुझे याद करते करते थक जाना   रातो को जागते जागते थक जाना   ग़ज़लों को लिखते लिखते थक जाना   फिर उनको पढ़ते हुए थक जाना | * यंहा सब नैतिकता और धर्म के ठेकेदार बैठे हैं   कुर्सी के नशे में चूर हमारे पहरेदार बैठे हैं   इन्हें इनकी हकीक़त बताओ हिन्दोस्तान वालो   हमारे वोट पे जीने वाले ये किरायेदार बैठे है | * सुनो दुल्हन घूँघट ज़रा ज्या...

तुम, मैं और मोक्ष

कभी दरिया में बहता कभी किनारों से टकराता, किसी उपवन में ठहरकर कुछ पल को सुस्ताता, चला जा रहा है मन मेरा एक मंजिल की ओर । सफर अकेले शुरू हुआ मगर अब थोड़ी तन्हाई साथ है, कुछ तारीखे...

सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई ......

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  Source - BhaktiGaane.in सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई, औरत एक देवी बनकर रहती थी कहीं खो गई । नफरत भर गई है सब की रगों में यहाँ पर, जुबाँ वो प्रेम को बोलती थी कहीं खो गई । कोई किसी का दर्द नहीं पहचानता अब, जटायु की आत्मा रहती थी कहीं खो गई । यमराज से दिखते हैं मुझे देश के नेता अब, रामराज से दिशाएं गूंजती थी कहीं खो गई । अब तो बैर हो गया है गरीबों से अमीरों का, कृष्ण सुदामा की दोस्ती रहती थी कहीं खो गई । मात्र एक छलावा बना दिया है आज प्रेम को, राधा श्याम की मोहब्बत रहती थी कहीं खो गई । काले कारनामों से वतन पर मेरे दाग लगा दिए, विश्व गुरु जैसी इक छवि होती थी कहीं खो गई ।                                                                          ...

एक ख्वाहिश

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 Source - Times Bull दस साल बीत गए अपना सूना हाथ देखते हुए, हर मर्तबा सोचता हूँ किस गुनाह की सजा है ये ? इस दफा आस है एक खत की जो 'प्यारे भाई' से शुरू हो, अपने नसीब में उस प्रेम को खुद लिखने की हसरत है मेरी । इस बंधन की बंदिशे ही मेरे हाथो को रास आती है, ऐसा शख्स जिसके होने भर से किसी की गलतियां छुपती है, किसी की अनंत शरारतें तो कभी मोहब्बत भी । बिना डरे जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर लेने वाली, हर बार मेरी ख्वाहिशों को माँ की तरहा जान लेने वाली, इक प्यारी सी बहन की वो राखी मुझे इस साल चाहिए, खुशनसीब शक्स को ही हासिल वो प्रेम मुझे इस साल चाहिए ।                         .....कमलेश.....  

लेकिन मैं छोड़ आया ।

मोहब्बतो से सजाया था उसे लेकिन मैं छोड़ आया, बहुत खूबसूरत था मेरा गांव लेकिन मैं छोड़ आया । मेरे ख्वाबो की दुनिया बसती थी वहीं पर ही, बहुत प्यारी लगी वो मुझे लेकिन मैं छोड़ आया । ...

तुझे याद करना भूल गया था ।

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 Source - Pinterest.co.kr आज मेरे कमरे ने मुझसे हंसकर बात नही की आज बिस्तर ने उठकर मुझे गले भी नहीं लगाया आज कम्बल ने बेशर्मी से मुझको ओढा नही आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरे शीशे ने मेरी सूरत को नही देखा  आज मेरी कलम ने मुझसे कुछ लिखा नही आज मेरे लिबास ने मुझको पहना ही नही आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरी ग़ज़ल ने मुझे पढने से इनकार किया आज मेरे चश्मे ने मेरी आँखों को धुंधला किया आज मेरे हाथ खुदा की इबादत से मुकर गए आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरी चाय आप ही बेस्वाद हो गयी आज मेरी खाने से ज़रा अनबन हो गयी आज घडी ने मेरा वक़्त मुझे नही लौटाया आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |                                          .....कमलेश.....  

माँ तुम बहुत याद आती हो

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 Source-Desi Painters मेरा चेहरा हर वक्त अपनी आँखो में लेकर मेरा किस्सा हर वक्त अपनी जुबान पर लेकर मेरे बारे में ही हर किसी को बताती हो माँ तुम बहुत याद आती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। हर वक्त हाथो में लेकर मुझको प्यार किया मेरी खुशियों पर तुमने जीवन अपना वार दिया हर मुश्किल में समझाकर हौसला मेरा बढाती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। जब स्कूल ना जाने की जिद मैं किया करता था तब तुम्हारा दुलार पापा से बचाया करता था बिन कहे हमेशा मेरी ख्वाहिशें जान जाती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। इतनी उम्र जी चुका हूँ दुनिया जाने क्या समझती है अपने मतलब के लिए यह जिंदगी छिन लेती है इन्ही राहों की मुश्किलों में तुम नजर आती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। ना कह सकता मैं किसी से ना ही किसे बतलाता हूँ अपने हर जनम में माँ तेरा बेटा होना चाहता हूँ भगवान् को भी याद करूँ तो तुम ही नजर आती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। तेरा प्यार और कर्ज कोई चुका ना पाएगा स्वयं ईश्वर भी तेरी ममता ना बयान कर पाएगा शायद इसीलिए उसके रूप में तुम दुनिया में आती हो माँ तुम बहुत याद आती हो। माँ तुम बहुत याद आती ...

शेर - ओ'- शायरी

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Source - WallpaperBrowse * अपनी नजदीकियों का सोमरस घोल दे मुझमें,    के अब दूरियों का हलाहल पिया नहीं जाता | * बनाकर चश्मे के लेन्स को दिवार घूमता हूँ,    डर है लोग आँखों में तेरी सूरत न देख ले | * उन हजारो ख्वाहिशों का गुनेहगार हूँ मैं,    जिनका क़त्ल तेरी गैरमौजूदगी में किया है | *. जिंदगी में रोशनी के लिए उजाले की ज़रुरत नही,    अपने प्रेम का दिया जला दो इतना ही काफी है | * दर्द बढाने की चाहत है मेरी,    इस उम्मीद में की दर्द कम हो जाये | * बातो से बातो की बात करते हुए,    कुछ बातचीत अधूरी रहे तो अच्छा है | * जो मेरी राहो में कांटे बिछाने का शौक रखते है,    दुआ करता हूँ उनकी राहो में फूलो की बारिश हो | * एहसास होने लगा है मुझको एक नया,    के तू मेरी याद में पलकें भिगोने लगी है | * तुम पर चार मिसरें लिखना थी मुझे,    ये ग़ालिब की नज़्म पड़कर याद आया |                   ...

ओढ़कर बैठा हूँ

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Source - Mobile9 ओढ़कर बैठा हूँ मैं एक ख़ामोशी की चादर को इस बार ख्यालो में आओ तो चुप्पी तोड़ चले जाना कडवी लगती है वो फ्रीज़ में रक्खी मीठी लस्सी भी बेस्वाद हो गया है नाश्ता और मेरा फेवरेट खाना नहीं जंचती मुझे कोई भी धुन आजकल के गानों की इस बार यादो में आओ तो कोई नयी सी धुन सुना जाना | ओढ़कर बैठा हूँ ........   सूरज से दुश्मनी कर बैठा हूँ एक बात के पीछे मैं के इस बार चाँद की चांदनी से इश्क़ लड़ाना है मुझे पशोपेश में है मेरी सारी ख्वाहिशें अबतलक ऐसे की पूर्णमासी की रात   तुझे छत पर  बुलाऊंगा  कैसे  घुमने लगा हूँ हर रास्ते पर अजनबियों के  तरहा हर कोई मुझको सनकी कहने लग गया है रातों को जागते हुए और चाँद को देखते देखते थक गया हूँ ख्वाहिशों की आग में जलते हुए मैं इस बार मिलने आओ तो सारी थकान मिटा जाना | ओढ़कर बैठा हूँ .........   ग़ज़लें कविता लिखना भी अब कभी कभार होता है तुमसे बात किये ...