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कार्य

   "वह नास्तिक है जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता |”                                                                 -- स्वामी विवेकानंद विचारों की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनकर, आसपास के वातावरण को सुनकर और उसका  अवलोकन  करने के बाद हम अच्छी तरह चीजों के  दोहराव  तथा उनका  आकलन करके उनसे ज्यादा प्रभावी तरीके से सीख सकते हैं | किसी विचार के तथ्यों को सुनकर, उसके महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर हमें अपने काम करने की प्रणाली को बहुत ही सुदृढ़ रखना होता है अगर हम सही मायनों में काम से लगाव रखते हैं | काम की शुरुआत से पहले हमारा उससे जुड़े सारे पहलुओं से अवगत होना अत्यंत आवश्यक है कि किस तरह वो हमारे काम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं और किस प्रकार उनसे निपटा जाना चाहिए, जोकि बाद में हमें बाकि हिस्सों के निर्धारण में सहायता प्रदान करता है; इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में  डिज़ाइन...

सीखना

 " अगर मुझे कोई पेड़ काटने के लिए छ: घंटे दिए जाएं तो पहले चार घंटे में, मैं अपना हथियार पैना करूंगा ।"                                              - अब्राहम लिंकन                      कोई भी विचार आपके दिमाग में आने से पहले यह तय नहीं करता कि आप सफल होंगे या नहीं, विचारों की इस प्रक्रिया में हमारा शामिल होना बहुत ज़रूरी होता है । हमारी पहली आवश्यकता यह है कि हम अपने विचारों को सुने और उनके अर्थ को सहज होकर खोजें । अर्थ खोजने की क्रिया में पहला पड़ाव आता है सीखने का, सीखना सतत दोहराव का एक परिणाम है । दोहराव के फलस्वरूप दो चीज़े उत्पन्न होती हैं, पहली होती है आदत और दूसरी सीखना । आदत बना लेने और सीख जाने में अंतर समझना जरूरी है क्योंकि अक्सर इन दो गुणों में संशय पैदा ह...