ग्राम्य मंथन - आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया का आरंभ
"कुरपेच है राहें जीने की किस्मत इक टेढ़ी बाज़ी है, तुम हाथ पकड़ लो इरादे का राह सीधी है अगर दिल राज़ी है ।" गुलज़ार साहब की ये पंक्तियां ज़िन्दगी की परिभाषा के साथ ही उसे जी लेने का तरीका भी बताती हुई प्रतीत होती है, जिस दुनिया में हम जी रहे हैं वहां इरादों की कमी नहीं है कमी है तो बस अपने दिल की आवाज़ को सुनने की, उसे समझने की । 28 प्रतिभागी और 13 टीम मेंबर्स जब इब्तिदा में अपने साथ लाए हुए तोहफ़े एक दूजे से बांटते हैं, तब लगता है कि हमारे पास कलेक्टिव रूप से काम करने पर कितनी क्षमता और प्रतिभा है जिसका हमें सही समय पर सही उपयोग करना है । ट्रस्ट फॉल में जब रजत बिना मुड़े अपने आप को कुछ घंटे पहले मिले 6 लोगों के हाथों में ख़ुद को पकड़ने के लिए 7 फीट ऊपर से गिरा देता है तब एहसास होता है कि हममें बाई डिफॉल्ट सभी पर विश्वास करने का कोशंट है जिसे हमने वक़्त के साथ छुपा दिया है । सौ ग्राम ज़िन्दगी में घेरे में बैठा हर शख़्स जब अपने आप को सबके सामने निर्भीक होकर खोलता है तो विश्वास और रिश्तों की मजबूती का पता चलता है जिसे हम दुनिया की भीड़ में खो चुके हैं । मेरे लिए अपनी...