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मार्च, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उलझन

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12वी कक्षा के पहले प्रीबोर्ड इम्तिहान हाल ही मे खत्म हुए थे, परिणाम की भी घोषणा हो चुकी थी लेकिन प्रथम स्थान हासिल करने वाले छात्र को छोड़कर बाकी सभी बच्चे निराश थे क्योंकि ये परिणाम उनकी आशा अनुसार नही रहे थे । बोर्ड परीक्षा का दबाव, घर से माता पिता की समझाइश और हर पल को दी जाने वाली हिदायते, इनसे कुछ छात्र प्रभावित भी नही थे तो कुछ पर इनका गहरा असर पड़ा था ।
         एक लड़का जो कि कक्षा मे दुसरे स्थान पर रहा था जिसका नाम था आयुष्मान जो इन चीजो से बहुत परेशान सा था क्योंकि उसके और अव्वल आने वाले छात्र के बीच एक बड़ा अंतर था । परिणाम के बाद से ही घर वाले उस पर पढ़ाई करने का दबाव बना रहे थे तो कुछ सहपाठी दोस्तो ने उससे दूरियां बना ली थी ,जिसके चलते वह अवसाद  (depression ) का शिकार होने जा रहा था और इस हालत मे कोई उसे सुधारने का प्रयास भी नही कर रहा था ।
       दुसरे प्रीबोर्ड की तैयारी शुरू हो चुकी थी जिसके अंतर्गत पहले पांच छात्रो को कुछ बच्चो के समूह आवंटित किए गए थे, तो आयुष्मान को भी इसका हिस्सा बनना जरूरी था और उसे भी तीन लड़को और दो लड़कियो का समूह मिला था । अब आयुष्मान को इन लोगो…

इस बार की मुलाकात में

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मिलने आया हूँ तुमसे
सारी ख्वाहिशों को रख परे
तुम भी सुन लेना फिर
उन अनकही बातों को
जो इस बार की मुलाकात मे
एक-दूसरे को हम कहेंगे नही ।
सारा जहान् समेट लूँगा
जब तुम सामने रहोगी
बाँहो मे लेकर जवाब दूंगा
जब भी कोई सवाल करोगी
हर बार ना हुआ वो होगा
इस बार की मुलाकात में ।
लाऊँगा तुम्हारे लिए मैं
कुछ लम्हे प्यार से भरे
बिताकर उन्हें तुम्हारे संग
हो जाएंगे दुनिया से परे
ना रहेगा कुछ भी अधूरा
इस बार की मुलाकात में । .....कमलेश.....

होली का रंग

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लगता है मथुरा, काशी
सारे मेरे करीब आये है
दिलो की नफ़रते जलाकर
ये होली मनाने आए है
हो जाता है एक इस तरह
कश्मीर और कन्याकुमारी भी
तब सिमट जाता है फासला
गुजरात और आसाम का
रंग जाता है हर कोई
रंगो की गहरी चादरों में
भुलाकर हर शिकवा गिला
रंगो में रंग जाता है ।
खेलता हूँ फिर मैं भी
इन सारे रंगो के साथ
थमते है क्यूँ हाथ मेरे
सोचकर के इक बात
वो कैसे होली खेलेंगे
कुरबान हुए जो वतन पे
के क्या वो होली खेलेंगे
बदले जो परिवर्तन से
सुनाता है कोई ये खबर
के देश में खुशी छाई है
अरसो बाद किसी छवि ने
भारत की छवि बनाई है ।
उठता है सैलाब फिर
दिल में उम्मीदों का
के बदलने वाला है वक्त
हमारे प्यारे वतन का
चढ़ा है गुलाल सत्ता का
ना चढ़ जाए इस कुर्सी का
कुबूल करे वो जनसेवक
आदेश देश की जनता का
छाती है मुस्कान फिर से
मेरे सुखे अधरों पर
उठा लेता हूँ थाल वो
रंगो में रंग जाता हूँ ।                      .....कमलेश.....


मिलन

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दबाकर दिल में हसरतें
तुम तक चला आया हूँ
कैद है पलको में अरमान
जो मिलन पर पूरे हो जाएंगे । इक हसीन शाम के साथ  होगा ढलता हुआ सूरज
टूट जाएगी जब बेड़ियाँ
ना रहेगा मजहब इश्क में
तुझे ख्वाहिशें सुनाऊँगा अपनी
जब हमारा मिलन हो जाएगा ।
फिर तेरी बाँहों में गुजरेगी
खूबसूरत हर शाम मेरी
जब मिट जाएगी दूरियाँ
फासला ना रहेगा दिलों में
तेरे सपनों को पूरा करूँगा
जब तुझसे मिलन हो जाएगा ।
बंदिशें टूटेगी जमाने की
रात जब वो आ जाएगी
तेरे इशारों को समझ लूँगा
मोहब्बत ये आशना होगी
हम अपनी दुनिया बनाएंगे
जब मेरा तुझमें मिलन होगा ।                               .....कमलेश.....

तुझे अपना वजूद बचाना है

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ये पथरीली राहें है जिंदगी की                       हर कोई चल ना पाता है यहाँ
                     संभलकर लड़ना मुश्किलो से
                     तुझे अपना वजूद बचाना है ।
      धोखे भी दिए जाएंगे तुझे
      सामने मीठा बोल कर तेरे
      छुरी को पीठ मे उतारेंगे
      सुनना आवाज बस दिल की
      हर जवाब जहाँ कैद रहता है
      दुनिया से लड़ते रहकर भी
      तुझे अपना वजूद बचाना है ।   हर कदम पर दर्द भी होगा
  जो अपनो की ही देन होगा
  ना छोड़ देना उम्मीद को तू
  कितना ही अँधेरा क्यूँ ना होगा
  करना ऐतबार अपने रब पर
  जो मदद को तैयार रहता है
  जीतकर अपनी ही बुराइयों से
  तुझे अपना वजूद बचाना है ।                            .....कमलेश.....