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सहमति और हम - भावनात्मक जीव

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  Source - sayfty.com क्या आपने कभी बिना अनुमति की इस दुनिया में अनुमति लेने के बारे में सोचा है? किसी भी प्रकार का संबंध जाने या अनजाने में इसे स्थापित करने की वांछित आवश्यकता से शुरू होता है। जब भी कोई मुझसे सहमति मांगता है तो इस बात का स्वागत करने के लिए बिना शर्त मेरा दिल खुल जाता है कि मेरे सामने वाला व्यक्ति मेरी जरूरतों का सम्मान करने को तैयार है। जब भी मुझे लगता है कि मेरी जरूरतों को उनका वांछित सम्मान दिया जा रहा है, तो मेरा दिल उन सभी अंतरालों को पाटने के लिए हर एक बिंदु को जोड़ लेता है जो किसी भी व्यक्ति के साथ एक मजबूत संबंध बनाने के लिए सामने आ सकते हैं, भले ही वह अपने आप को किसी भी तरह देखे! मैं उस स्थिति के बारे में भी बहुत सोचता हूं जब लोग सहमति नहीं मांगते हैं और सीधे मेरे व्यक्तिगत परिवेश में हमला कर देते हैं; जो हर बार उस पल में उनके साथ मेरे संबंध को नकारात्मक तौर पर ही प्रभावित करता है। मुझे नहीं पता कि यह अन्य लोगों के लिए किस तरह काम करता है, फिर भी मेरा मानना ​​​​है कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी की ज़रूरत की परवाह किए बिना किसी के व्यक्तिगत परिवेश में प्रवेश कर...

अँधेरे से उपजता उजाला -

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  Source - ephotozine.com कभी ऐसा हुआ है कि आप अपनी ही धुन में चले जा रहे हैं और किसी ने आपको धक्का देकर झकझोर दिया हो? क्या कभी इस बात की तरफ ध्यान गया है कि जो उजाला आपकी आँखें इस दुनिया में देख रही हैं वह किन अँधेरे गलियारों से होकर आ रहा है? या यह महसूस करने का यत्न किया है कि जीवन में पल रही तमाम वेदनाएँ और नफ़रत एक मार्मिक चुम्बन के आगे कोई अस्तित्व नहीं रखती! मैंने अपने रास्तों के अनगिनत क्षणों में ख़ुद को ऐसी अवस्था में पाया है जहाँ से मैं सिर्फ अपना सुख और उसके इर्दगिर्द फैला अँधेरा ही देख पाता हूँ. यह सुख असीम स्वार्थ और उतनी ही वासनाओं में लिपटा होता है और पल-पल इसमें वृद्धि ही होती है; इसके विपरीत उजियारे के उस ओर पल रहे अँधेरी वादियों का जुगनू मुझे हर बार उसी गर्त में झटकने में मशगूल रहता है जहाँ से सिवाय पीड़ा के कुछ हासिल नहीं होता. तमाम उम्र आदर्शों के मुखौटे पहने रहते हुए ऐसा समय भी आया है कि मैंने अपने ही कई हिस्सों का अस्तित्व सिरे से नकार दिया है. घट चुके या घट रहे क्षणों को लिखना आसान तो नहीं है लेकिन उतना दुर्गम और अयोग्य भी तो नहीं!  जितनी बार मुझे जीवन में...

साड्डा हक़, देश और ज़रूरतें -

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मैं नहीं जानता कि रॉकस्टार फ़िल्म में लिखा गया "साड्डा हक़" गीत इरशाद भाई के कितने क़रीब है या इससे जुड़े हुए लोगों के भी! मैंने अपनी ज़िंदगी के 14वें साल में यह फ़िल्म देखी थी, जिसे पूरी तरह समझ पाने में मैं अब तक असफल ही रहा हूँ लेकिन मैं ख़ुश हूँ कि उसके बाद के 9 सालों में इस गीत को बहुत क़रीब से जान, सुन और समझ पाया हूँ।  ज़िन्दगी और देश की वर्तमान अवस्था इतने ज्यादा आपस में जुड़े हुए हैं कि दोनों को स्वतंत्र रूप से देखना असम्भव तो है ही यह एक भूल भी है। इरशाद जी का लिखा यह गीत हर उस व्यक्ति की पैरवी करता है जो उसके स्वाभिमान और स्वातंत्र्य की लड़ाई में उसके हक़ों की बात करता है। हज़ारों लोग इससे असहमत हो सकते हैं और हों, अच्छा है आप तर्क कीजिये, अनुभव में डुबकी लगाइये और फिर समझिये कि यह क्या चीज़ है; ठीक वैसे ही कि इश्क़ कीजे फिर समझिये ज़िन्दगी क्या चीज़ है!  आज के वक़्त में अपने हक़ के लिए लड़ते किसान, बेरोजगार युवा, अल्पसंख्यक समुदाय, जागरूक-संगठन सबके लिए, अपनी पहचान की लड़ाई ही सबसे बड़ी है क्योंकि सरकार ने तमाम साधनों से इन्हें गुमनाम करने की साज़िश की है। इस गीत में एक पंक्ति है कि ...

मैं और मेरा प्रेम

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 दुनिया में अनगिनत सवालों और परेशानियों के बीच मैं समझ पाया केवल दो बातों को. पहली कि ज़िन्दगी और विश्वास एक न दिखाई देने वाले अटूट धागे में जुड़े हुए हैं जो मेरे अंतस से पनप कर दुनिया में आता है; मैं चाहे कितना भी बाहरी जोर लगाऊं उसे महसूसा नहीं जा सकता बल्कि उसे मैं अपनी अंतस की खोज की यात्रा में सलीके से चख पाता हूँ. दूसरी यह कि प्रेम जीवन के तत्वों का सार है. मेरा पता लिए आस्था, भक्ति, जप, तप की अनगिनत कहानियाँ और प्रतिमाएँ आई किन्तु मैं सिर्फ प्रेम में ख़ुद से मिल पाया. यह कोई एहसास या रिश्ता नहीं है अपितु यह मेरे जीवन का वह हिस्सा है जो मैंने ख़ूबसूरती और ख़ुशी के क्षणों में सहेजकर बाकि जीवन में अनवरत जिया है. यह सर्वथा सरल, सहज और आंतरिक रहा मेरी राहों में; जीवन की राहों में अपना बाँकपन और आज़ादी समेटे प्रेम मुझे हर नए पल एक नए सूर्योदय का एहसास देता रहा. प्रेम सदैव सुलभता और स्वातंत्र्य का सम्मिश्रण रहा जो झोली में रिश्तों और समर्पण की सौगात भरे. विनोबा के सिद्धांतों में लिपटा "मैं" का विलय और केवल "होने" का एहसास जो प्रेम भलिभांति जीता है; जीवन के तमाम अहंकारों क...

प्रेम और प्रेम

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Source - psychologicallyastrology.com तुमने मुस्कुराते हुए मेरे जीवन के बगीचे में कदम रखा और उस क्षण से आज तक हर लम्हें में ख़ूबसूरती भरते रहने में मगन रही तुम। मेरे द्वारा लिए गए श्वास में तुम्हारे होने का पुख़्ता सबूत है या यूँ कहूँ कि ज़िन्दगी के कर्ज़ को उतारने में तुम्हारी उधारी बहुत है। इतने वर्षों के इस रिश्ते ने अनगिनत मोड़ और पड़ाव देखे किन्तु अपनी नियति से यह अनभिज्ञ ही रहा। आज जब अपने प्रेम के ज्वार के क्षणों में तुम्हें खोजता हूँ तो हर सुधि पर तुम्हारी छवि दिखाई पड़ती है। कुछ रिश्ते आज़ाद करते हैं ज़िन्दगी के बेगानेपन को, यह सच है लेकिन कैसे! यह अब तक अनुत्तरित है। तुम्हारे द्वारा सुनाई गई एक ख़बर मुझे प्रेम और प्रेम में फ़र्क समझाएगी यह नहीं सोचा था। चेहरे पर मुस्कान, आँखों मे अविरल नीर और हृदय में अपार उन्माद लिए निहारता रहा तुम्हारी तस्वीर, किन्तु समझ नहीं पाया अब तक कि ऐसा क्या है जो मेरे अन्तस से उमड़ पड़ा है तुम्हारी ज़िन्दगी की नई राहों की आहट पाकर! मैं तमाम असमंजस से परे यह समझने में क़ामयाब रहा हूँ कि प्रेम की उम्र और सीमा तय नहीं किये जा सकते; यह तब भी वही था और आज भी वही और वही...

केलि और कल

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Source - fr123rf.com ज़िन्दगी के पन्ने कितने ख़ाली हैं यह उनके भरते चले जाने के दौरान महसूस होता है. अपने अस्तित्व में से कुछ खो देने ग़म मुझे इस क्षण में महसूस होता है जब मैं कुछ भी नहीं दे पाने की स्थिति में होता हूँ. कल, यह एक सुरक्षित ख़्वाब है और एक याद भी जिसे अपनी सहजता के अनुसार जीवन में लाया जा सकता है. मेरा कल उन सारे ख़यालों का पुलिंदा है जिन्हें मैं ज़िन्दगी जीने के स्वांग में कहीं छोड़ बैठा हूँ; वे तमाम पल जिनको मैं अपने तईं नहीं जी सका. और इस विचार को देखकर यह लगता है जैसे मैं व्यर्थ ही जीए जा रहा हूँ. कल सजाने के फेर में जब हर दिन छोटी छोटी गलतियाँ करता जाता हूँ तो मुझे सपने में आने वाला कल एक बहुत बड़ी गलती के रूप में नज़र आता है. दुनिया ने इंसान का जीना आसान करने के लिए अनगिनत उपाय किये और किये जा रही है किन्तु मैं यह जानना चाहता हूँ कि ज़िन्दगी जीने की प्रक्रिया को आसान या मुश्किल करने का क्या अर्थ है!  कभी कभी मैं सोचता हूँ कि आदम और हव्वा ने अपने अप्रतिम और अतरंग क्षणों में कल का आविष्कार किया होगा और चाह रखी होगी कि कल भी उनकी केलि-क्रिया के समान सहज, सुन्दर और सजग बना र...

दिन, ज़िन्दगी और प्रेम

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  ज़िन्दगी को जीते हुए कभी कभी यह ख़याल आता है कि इस जीने के प्रक्रिया से यानि उन सारी चीज़ों, उन सारे कामों से जो हम ख़ुद को ज़िन्दा रखने के लिए करते चले आ रहे हैं उनसे एक ब्रेक मिलना चाहिए. ज़िन्दा रहने के चक्कर में हम कितनी चीज़ों को ऐसे ही छोड़ देते हैं अमूमन दिन के गुज़रने को ही ले लीजिये. मुझे ऐसा लगता है कि हम दिन को गुज़रते हुए कभी भी नहीं देख पाते. जैसे, वह पल जब नींद बिस्तर छोड़ती है और सवेरा आँखों में उतरता है. सूरज की पहली किरण एक परिपक्व प्रेमी की तरह चेहरे को छूती है और रात भर की थकान सुबह की ठंडी हवा के साथ कहीं गुम हो जाती है. और इस तरह जीवन जीने का जतन करते करते अनगिनत चीज़ें हमारे जीवन का हिस्सा हो जाती है जहाँ हम कभी नहीं पहुँच पाते.  मेरी ज़िन्दगी में कुछ एक ऐसी चीज़ें हैं जिनसे मिलकर मैं ख़ुद के क़रीब होने जैसा कुछ महसूस कर पाता हूँ. दिन के पहले पानी के घूँट में मुझे वह प्रेमिका याद आती है जिसने मुझे मरते मरते बचाया था. नाश्ते के पहले कोर में मुझे वो अम्मा मिल जाती हैं जिन्होंने पिछले बरस मेरे खेतों में गेहूँ काटा था. नहाते हुए मैं ख़ुद को विदर्भ (महाराष्ट्र राज्य का एक क्...

कर्नाटक एक्सप्रेस -

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Source - theswaddle.com कई बार किसी से मिलकर ऐसा लगता है कि उससे पहले कहीं मिला जा चूका है लेकिन उसकी याद ताज़ा नहीं हो पाती. ज़िन्दगी ऐसे अनगिनत चेहरे भेजती है जिन्हें हम भूलचूक में पहचानने की कोशिशें करते हैं लेकिन सब कुछ व्यर्थ ही होता है. ऐसे ही किसी एक दिन मैं उससे मिला था उसका नाम तो मुझे याद नहीं उसकी प्रेमिका का नाम मुझे याद रह गया. ऐसा माना जाता है कि हम इंसानों को जानकारी और नामों से ज्यादा कहानियाँ याद रहती है और मेरे साथ भी यही हुआ था. मन्दाकिनी, कितना प्यारा नाम है! ऐसा लगता है कोई उत्तराखंड के पहाड़ों पर बैठा पुकार रहा है. यही नाम था उस लड़की का, जिस लड़के की वह प्रेमिका थी. मैं उससे एक रात कर्नाटक एक्सप्रेस में सफ़र करते हुए मिला था. वह लड़का किताबों का शौकीन है और उसे इस बात का नशा है कि ज़िन्दगी एक हसीं ख़्वाब है जिसे देखने के लिए छककर सोया जाना ज़रूरी है और उठकर ख़्वाब की हक़ीकत के लिए मेहनत करना भी. मैं नहीं जानता कि वो कहाँ जाना चाहता है अपनी ज़िन्दगी में लेकिन उसने बताया था कि कुछ सालों के बाद उसे अपनी प्रेमिका से शादी करनी है. जब मैंने यह सुना था तब मैंने उसकी हिम्मत की दाद दी...

प्रेम-पीयूष

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Source - flickr.com मैं खोजता फिर रहा था बीते कुछ महीनों से अपने क्लांत मन के व्यग्रभावों में शांति, जो मुझे कई सालों से भी लम्बे प्रतीत हुए. अपनी तमाम बारीकियों और निर्लज्जता के साथ संसार करता रहा अनवरत ढंग से मेरे धैर्य और सीमाओं की परीक्षा: जिसका परिमाण मैं नहीं जानता. इन दुविधाओं के बीच से गुजरती राहों में एक दिन जब तुम्हारे समीप से गुजरी बयार मुझ तक आयीं तो अंतस ने एक ठहराव जान ख़ुद को रोक लेने का निर्णय लिया; वह सही है या नहीं इसे सोचने के लिए अब वक़्त नहीं. जीवन के चिर-सन्नाटे के स्पंदन में सुनी मैंने आँखों में गूँजती आहटें और देख पाया तुम्हारे नयन कलशों में भरे असंख्य प्रश्न जो मेरे अपने थे. तुम्हारे साथ मैं मौन में भी एक अविरल संवाद पा जाता हूँ और हर बार यह जान कर हतप्रभ रह जाता हूँ कि कितना कुछ छुपा है तुम्हारे अस्तित्व के उपवन में! तुम्हारे संग मैंने खोजी अपने अस्तित्व की नई शाखाएँ. तुम्हारे लहराकर उलझते केशों ने सुलझाई मेरी अनगिनत पहेलियाँ और एक धुरी पर घूमते मेरे अकिंचन सपनों को मिला तुम्हारे अधरों से प्रेम-पीयूष. विशिष्ट सी महसूस होती कुछ संकोच की दीवारों का...

जब हमारे आसपास संकट हो तब जीवन कैसा दिखता है?

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Source- globalsharingweek.org हम अक्सर शिकायत करते हैं कि हम अपने करीबी लोगों और स्वयं के लिए समय नहीं दे पाने का कारण हमारे कामों की फ़ेहरिस्त का लम्बा होना है. लेकिन अब, हम अपने परिवार के साथ हैं, पक्षियों के चहचहाहट के साथ जागते हैं और ऑफिस के लिए तैयारी करने के जैसा कुछ भी नहीं है। इसके अलावा भी, समय पर घर लौटने, ट्रैफिक-जाम का सामना करने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए चीजों को अलग रखने के लिए घबराने की ज़रूरत नहीं बची है। इन सभी गहरी इच्छाओं की पूर्ति का समय मिलने के बावजूद, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हम में से कई तनावग्रस्त हैं और इसे मैनेज करने के लिए काउंसलर तक खोज रहे हैं, लेकिन हम ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या जिस तरह से हम महसूस करते हैं, बोलते हैं और काम करते हैं उसके बीच एक बड़ा अंतर है?      हमने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह का जीवन भी हमारे हिस्से में होगा। हम अपने माता-पिता, भाई-बहनों, बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ पूरे पूरे दिन और रात बिता रहे हैं और साथ ही घर से ही अपने काम को अच्छे से मैनेज भी कर रहे हैं। और साथ में दुनिया के हर कोने से ...

मैं और स्त्री

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दुनिया ने जब सुनाया अपना संगीत, तो सबसे पहले उसे सुना एक खेत में काम करती स्त्री ने। संगीत का सफ़र अनवरत रहा अनगिनत राहों और मोड़ से होते हुए, मैंने कानों में सुनी उस स्त्री की गूँज। जब से साबका हुआ है हक़ीक़त से मैं ठहरकर देखता हूँ हर उस स्त्री को जो लगती है मुझे बुद्ध के मौन और कृष्ण की अनुगूँज सी। हज़ार राहें गुज़र गईं इन 22 बरस के क़दमों तले होकर, मुझे मिली हर स्त्री ने मुझको दिया ज़िन्दगी के अनमोल पाठों का सार; मैंने ज़िद, समझ, विश्वास, समर्पण, प्रेम करुणा, ममता, आदर सी लगती हर बात को सीखा है स्त्री के वजूद से टपकते सच में। मेरा जीवन अधूरा है उस कली के खिलने तक जिसे किसी दिन खेत में काम करने आयीं, और अपने पसीने से लथपथ तन से समूचे विश्व के अस्तित्व का भार उठाती: एक निश्चल सी स्त्री ने पानी पीने के बाद लौठे में बचे पानी को गिराया होगा पौधे पर। मेरी आंखों के आगे फैले संसार में जितना कुछ मैं देख पाता हूँ मुझे यकीन है कि स्त्री के होने से ही मिल जाया करती हैं मेरे अस्तित्व को अनगिनत परिभाषाएं, दुनिया ढूंढ़ रही है सारे समाधान किताबों, विज्ञान और अ...

ज़िन्दगी और रास्तों का चुनाव

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लगभग सारे ही किनारों पर पसरी हुई हैं ख़ामोशियाँ पिछले कुछ दिनों से, जहाँ खनकती थी कभी ख़ुशियाँ। फैलती जा रही है यह दुनिया वैश्वीकरण के सिद्धांतों तले, सिमटता जा रहा है पर इंसान अकेलेपन से उपजे अवसादों में। सामने आए हुए दो रास्तों में, मैंने हर दफ़ा वही चुना जिस पर चलकर मुझे हमेशा लगता रहा कि मैं ख़ुद की परतें उतारने में लगा हूँ। आज खेत की मेड़ पर बैठे बैठे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे, खोज रहा था उम्र भर से जिसको छुपा हुआ था वह मेरे प्रेम के तरीकों में। कल फ़ोन पर बतियाते हुए मित्र ने कहा कि 'should' और 'can' में से जिसे चुनोगे, वही तुम्हें परिभाषित करेगा! मैं चुन चूका हूँ वह राह जो आज़ाद है  मेरी परिभाषाओं और वक़्त से, लेकिन धँसा हुआ है गहरे तक ज़िन्दगी को देखने के मेरे तरीकों में। - कमलेश शुक्रिया वसुधा जी इस तस्वीर के लिए...

जीवन यात्रा के २२ वर्ष और रोज़ पलटते पन्ने

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  ख़तों में उपजी अभिव्यक्ति और भावों का सम्मिश्रण जीवन के पड़ावों में ख़ूबसूरती बिखेरता है! हम कितनी समस्याओं या चुनौतियों से जूझ रहे हैं यह हमारे प्रेम करने और जीने के तरीकों से इतर हमें कदम-कदम पर एहसासों की डोर थामे रहने की ताक़त देता है. लेखन से मुझे ख़ुद को व्यक्त करने में सक्षम होने की खुशी और संतुष्टि मिलती है। वह वक़्त सबसे ख़ूबसूरत होता है जब मैं अपने रिश्तों में उनके लिए नियत प्रेम और पलों को बाँट पाता हूँ और जो रिश्ते हवाओं के साथ धुँधला रहे हैं उनकी खुशबुओं को फिर महसूसने के अनुभव को आत्मसात कर पाता हूँ. दुनिया में प्रेम और करुणा के साथ जी सकने वाले अनगिनत कारण हैं जिनके ज़रिये आसपास पनपते दूषित माहौल का सामना करना ज़रा सहज और साहस भरा हो जाया करता है. मैं नहीं जानता कि कोई किस तरह मेरे किसी काम को देखता है लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि मैं ख़ुद के द्वारा किये गये काम, लिए गये फैसलों और जिए गये पलों को कैसे देखता हूँ! समय ने मुझे विभिन्न रिश्तों और घटनाओं के माध्यम से प्यार और सहयोग को भारी मात्रा में मुझ तक पहुँचाया है। इस साल की शुरुआत में ख़ुद के लिए वक़्त नि...

आख़िरकार अगस्त को आज़ादी मिली

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Source - Unsplash.com अ गस्त की बारिशें सुकून और तड़प साथ लेकर आती हैं और उन्हीं के साथ आये ढेर सारे किस्सों और पुरानी यादों के संदूक में लिपटी तस्वीरें और लम्हें किसी भी नामामूली इंसान को झकझोर कर रख देने के लिए काफी होते हैं। ठीक इसी तरह कृति को विष्णु का कॉल आया जब वह अपनी ख़्वाहिशों की रंगत भरी दुनिया में ऐसी ही अगस्त की बारिश में भीगकर बैठी हुई कुछ यादें ताज़ा कर रही थी। विष्णु से मुलाक़ात तो केवल दो महीने पुरानी थी लेकिन उससे बात करते समय कृति को ऐसा लगता था कि वह न जाने कितने समय से उसे जानती है उससे बातें करती है और उसके लिए दुआएं करती रहती है। अपने घर की छत पर बने कमरे में कभी न समाने वाले ऐसे कितने ही ख़याल कृति के दिल में जन्मते और फिर कहीं टोह पाकर छुप जाते। कृति को 6 अगस्त की रात एक ईमेल मिला और उसे तुरत फुरत दिल्ली के लिए अपना साजो सामान समेट कर निकल जाना पड़ा , ताकि वह अपना आने वाला एक साल ढेर सारी दोस्तियों , कई बातों और नई मुश्किलों के साथ गुज़ार सके।           कृति दिल्ली आयी तो उसे यहाँ के आसमान में बादल दिखाई दिए जो शायद...

नाश्ते की टेबल

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Source - Wallpaperflare.com ए क लड़का अपनी थोड़ी सहमी और थोड़ी उत्सुक शक्ल लिए नाश्ते की टेबल पर बैठा हुआ था। कुछ नए चेहरों को उसने ख़ुशी से देखा और उनकी ओर पहचान बढ़ाने के लिए उठकर चल दिया। कुछ ही समय बाद नाश्ते की टेबल पर हँसी का ठहाका गूँज गया , नए मिले दोस्तों के साथ अब बातों ने ठिठोली की राह पकड़ ली थी। नाश्ते के बाद सारे लोग वहाँ से उठकर आसपास घूमने के लिए चल दिये , पास के बगीचे में पानी छोड़ा हुआ था किसी ने। अचानक नए दोस्त सूरज ने नली उठाकर सबको गीला करना शुरु कर दिया , अकस्मात हुए हमले से बचने के लिए सबने अपने रास्ते खोजने की कोशिश की लेकिन एक लड़की वहीं मुस्कुराती हुई सूरज के इस कृत्य पर थोड़ी ख़ुश थोड़ी नाख़ुश सी ठहर गई। कुछ देर की मस्ती के बाद जब सब ने फोटो सेशन शुरू किया तो उस लड़की ने सबकी हँसते हुए फोटो लेने पर जोर दिया। वह इसी तरह मुस्कान को अपने चेहरे पर रख सारा दिन घूमती रही और सबसे पहले नाश्ते की टेबल पर पहुँचने वाला लड़का अपने प्रोग्राम के पहले दिन को जी लेने में जुट गया। एक लड़का जिसका नाम हम क्या रख सकते हैं , चलो कृष्ण रख लिया जाए और लड़की को कोई न कोई नाम देना ही पड़ेगा नह...

ज़िन्दगी का केंद्र

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ज़िन्दगी के अच्छे खासे दौड़ते-भागते दिन जब बिस्तर पर बीतने लगे तो लगता है बहती नदी पर पलक झपकते बाँध बना दिया हो. काम करने का सलीका अचानक से ऑफिस बैग से निकलकर पूरे कमरे में पसर जाता है. अंगुलियाँ अनगिनत चहलकदमी करती हुई अपने होने के वजूद को किसी मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के की-बोर्ड पर खपा देती हैं. ऐसे वक़्त में मौसम के बदलते मिजाज़ का अंतर्मन से कोई भी नाता नहीं पनपता और न ही किसी ख़ूबसूरत कली को देखकर दिल में कोई हूक उठती है. उठता है तो बस एक निरा खालीपन जो एक लम्बे वक़्त से बाहर से बोलते लेकिन अन्दर से ख़ामोश शरीर में घर कर चुका होता है. इस दुनिया में हर रोज़ धुलते हैं अनगिनत चेहरे और सजते हैं उतने ही अधर किसी प्रिय के चुम्बन की आस में, लेकिन कितने चेहरों का दीदार किया जाता है और कितने ही होंठ चुम्बन के बाद मुतमइन हो पाते हैं! यह सवाल कोई नहीं करना चाहता कि उसके जीवन में प्रेम है या नहीं लेकिन कामों की फ़ेहरिस्त कितनी घटा दी है एक ही कुर्सी पर कमर की सारी भावनाओं को क़त्ल करते हुए यह सब को ज्ञात है.             ...

आभार, ज़िन्दगी और मैं -

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हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हर कोई अपने जीवन में किसी न किसी चीज का पीछा कर रहा है। एक स्थान से दुसरे की ओर बढ़ने की इस यात्रा में हम अपनी भावनाओं , जरूरतों , लालच , आकांक्षाओं और अन्य कई चीजों के साथ काम करते हैं , जिसके परिणाम में हम आनंद , खुशी , तनाव , दुःख , दबाव , क्रोध , शांति , दोष , कृतज्ञता जैसी कई सारी भावनाओं को महसूस करते हैं। मैं कुछ साल पहले स्वामी विवेकानंद को पढ़ रहा था , उन्होंने अपने एक भाषण में कहीं उल्लेख किया था कि दोषारोपण का खेल खेलने के बजाय हम एक बार ठहर कर यह देख सकते हैं कि हमारे भीतर से निकलने वाली हर चीज का स्रोत क्या है! यह विचार मुझे बहुत ताकत देता रहा जब मैं अपनी सीमाओं को पार कर रहा था और लोगों की कहानियों के साथ अपने व्यक्तिगत विकास के लिए एक रास्ता खोज रहा था। दो साल पहले एक आवासीय कार्यक्रम के दौरान , मुझे आभार व्यक्त करने की ताकत का एहसास हुआ कि यह उस दुनिया में जादू कैसे पैदा कर सकता है जिससे हम जीना चाह रहे हैं!                    ...

मुलाकातें, यात्रा और प्रेम

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मुलाकातें हमेशा ही खूबसूरती की नींव रखती है. तकरीबन ३ सालों के बाद राहों ने मुझे इंदौर की गलियों से रूबरू करवाया और दिल की तमाम ख्वाहिशों का ज़खीरा अपने पूरेपन के एहसास में खोकर लौटा. पिछले ३ साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से काफी अहम और प्रेरणादायी रहे हैं, जितना कुछ इन वर्षों ने दिया है वह अमूल्य है. इन राहों के सफ़र में कुछ दोस्त अपनी राह पर चलकर इस खूबसुरत शहर आ चुके थे, जिनसे मिलने की फिराक़ में मैं यहाँ पहुँच गया. दोस्तों के साथ बैठकर अपने और उनके जीवन की यात्रा के बारे में जानना और उनके अंतर्मन को सुनना मेरे लिए एक नए आसमान के द्वार खोलने जैसा अनुभव रहा है. चाहे फिर रिंग रोड पर विवेक और गजेन्द्र के साथ काम और व्यक्तिगत जीवन की बाते हों या फिर उनके जीवन के ३ वर्षों में बीते हुए वसंत का किस्सा: गजेन्द्र और विवेक को ३ सालों के बाद मिलना और उनमें आये हुए बदलाव का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं है. ऐसी मुलाक़ातें वक़्त को कीमती बनाती हैं.   नवोदय के साथी रहे शिवपाल, जितेन्द्र और ईश्वर के साथ का वक़्त अपनी अलग छाप रखता है और यह एहसास एक सुकून देता है कि साथी अपने दिल की...

हमारा प्रेम में होना

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रास्तों के पड़ाव ज़िन्दगी के मायने समझाते हैं और मैं हमेशा से ऐसे पड़ावों की तलाश में रहा। तुम आयी मेरी राहों के लिए एक ऐसा ही पड़ाव बनकर जिसने मुझे थाम लिया अपने सारे रंगों और खुशबुओं के साथ। तुम्हारा साथ रहना मुझे एक नएपन के एहसास से भर देता है। जब तुम थामती हो मेरा हाथ तो मैं अपने आप को गंगा में खड़ा हुआ महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता कि हम कब तक इस तरह शहर के कोनों में मिलते रहेंगे लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है कि हमारे मिलने में प्रेम और विश्वास की खुशबू हर वक़्त आती रहेगी। तुम्हारा सवाल करना मुझे तुरंत सारे आसमानों से ज़मीन पर ले आता है, जब तुम खिलकर अपना ख़्वाब पूरा कर लेती हो तो लगता है कि मोक्ष का मज़ा फीका पड़ जाएगा।        तुम्हारे दाहिने चलते रहने पर हवाओं ने मुझे महसूस करवाया कि हम कितने कीमती हैं एक दूसरे के लिए! ज़िन्दगी की उम्र तो नहीं पता लेकिन इसके रहने न रहने पर हम एक दूसरे को जीते रहेंगे इतना ज़रूर जानते हैं। जब तुम हँसती हो तो दिल करता है कि पहाड़ों में बर्फ़ गिरने लगे और मैं तुम्हारे साथ उसको निहारता रहूँ। जब जब तुम अपने गले से मुझको लगा लेती हो मेरे जवाबों...

ज़िन्दगी और प्रेम की जोड़ी

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जब ज़िन्दगी की शुरुआत होती है, तब हमारे पास अपने रिश्ते चुनने का कोई विकल्प नहीं होता, लेकिन ज़िन्दगी के रफ़्तार पकड़ने के बाद भी शायद हमारे पास वह विकल्प नहीं होता. अटपटा लग सकता है सुनने में लेकिन हकीक़त यही है कि हम कोई भी रिश्ता नहीं चुनते अपनी ज़िन्दगी में, रिश्ते हमको चुनते हैं उनको जीने के लिए.                                                   भावनाओं का समंदर कितना गहरा है कोई नहीं जानता फिर भी सब डुबकियाँ लगाते हैं, हम नहीं जानते कि हमारी एक मुस्कान या एक शब्द किसी के जीवन में क्या बदलाव ला सकता है. ज़िन्दगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है यह तो मैं नहीं कह सकता लेकिन जितना कुछ इसके साथ रहकर सीखा है वह बहुत कमाल का है. रास्ते अपनी पहचान हमसे तब तक छुपाते हैं जब तक हम समर्पण न कर दें और समर्पण का पौधा विश्वास के बीज के बिना कभी भी नहीं उग सकता. विश्वास और समर्पण जब एक-दूजे में समाते हैं तब प्रेम पैदा होता है और प्रेम अपने कई स...