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मैं और मेरा प्रेम

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 दुनिया में अनगिनत सवालों और परेशानियों के बीच मैं समझ पाया केवल दो बातों को. पहली कि ज़िन्दगी और विश्वास एक न दिखाई देने वाले अटूट धागे में जुड़े हुए हैं जो मेरे अंतस से पनप कर दुनिया में आता है; मैं चाहे कितना भी बाहरी जोर लगाऊं उसे महसूसा नहीं जा सकता बल्कि उसे मैं अपनी अंतस की खोज की यात्रा में सलीके से चख पाता हूँ. दूसरी यह कि प्रेम जीवन के तत्वों का सार है. मेरा पता लिए आस्था, भक्ति, जप, तप की अनगिनत कहानियाँ और प्रतिमाएँ आई किन्तु मैं सिर्फ प्रेम में ख़ुद से मिल पाया. यह कोई एहसास या रिश्ता नहीं है अपितु यह मेरे जीवन का वह हिस्सा है जो मैंने ख़ूबसूरती और ख़ुशी के क्षणों में सहेजकर बाकि जीवन में अनवरत जिया है. यह सर्वथा सरल, सहज और आंतरिक रहा मेरी राहों में; जीवन की राहों में अपना बाँकपन और आज़ादी समेटे प्रेम मुझे हर नए पल एक नए सूर्योदय का एहसास देता रहा. प्रेम सदैव सुलभता और स्वातंत्र्य का सम्मिश्रण रहा जो झोली में रिश्तों और समर्पण की सौगात भरे. विनोबा के सिद्धांतों में लिपटा "मैं" का विलय और केवल "होने" का एहसास जो प्रेम भलिभांति जीता है; जीवन के तमाम अहंकारों क...

प्रेम और प्रेम

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Source - psychologicallyastrology.com तुमने मुस्कुराते हुए मेरे जीवन के बगीचे में कदम रखा और उस क्षण से आज तक हर लम्हें में ख़ूबसूरती भरते रहने में मगन रही तुम। मेरे द्वारा लिए गए श्वास में तुम्हारे होने का पुख़्ता सबूत है या यूँ कहूँ कि ज़िन्दगी के कर्ज़ को उतारने में तुम्हारी उधारी बहुत है। इतने वर्षों के इस रिश्ते ने अनगिनत मोड़ और पड़ाव देखे किन्तु अपनी नियति से यह अनभिज्ञ ही रहा। आज जब अपने प्रेम के ज्वार के क्षणों में तुम्हें खोजता हूँ तो हर सुधि पर तुम्हारी छवि दिखाई पड़ती है। कुछ रिश्ते आज़ाद करते हैं ज़िन्दगी के बेगानेपन को, यह सच है लेकिन कैसे! यह अब तक अनुत्तरित है। तुम्हारे द्वारा सुनाई गई एक ख़बर मुझे प्रेम और प्रेम में फ़र्क समझाएगी यह नहीं सोचा था। चेहरे पर मुस्कान, आँखों मे अविरल नीर और हृदय में अपार उन्माद लिए निहारता रहा तुम्हारी तस्वीर, किन्तु समझ नहीं पाया अब तक कि ऐसा क्या है जो मेरे अन्तस से उमड़ पड़ा है तुम्हारी ज़िन्दगी की नई राहों की आहट पाकर! मैं तमाम असमंजस से परे यह समझने में क़ामयाब रहा हूँ कि प्रेम की उम्र और सीमा तय नहीं किये जा सकते; यह तब भी वही था और आज भी वही और वही...

जीवन यात्रा के २२ वर्ष और रोज़ पलटते पन्ने

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  ख़तों में उपजी अभिव्यक्ति और भावों का सम्मिश्रण जीवन के पड़ावों में ख़ूबसूरती बिखेरता है! हम कितनी समस्याओं या चुनौतियों से जूझ रहे हैं यह हमारे प्रेम करने और जीने के तरीकों से इतर हमें कदम-कदम पर एहसासों की डोर थामे रहने की ताक़त देता है. लेखन से मुझे ख़ुद को व्यक्त करने में सक्षम होने की खुशी और संतुष्टि मिलती है। वह वक़्त सबसे ख़ूबसूरत होता है जब मैं अपने रिश्तों में उनके लिए नियत प्रेम और पलों को बाँट पाता हूँ और जो रिश्ते हवाओं के साथ धुँधला रहे हैं उनकी खुशबुओं को फिर महसूसने के अनुभव को आत्मसात कर पाता हूँ. दुनिया में प्रेम और करुणा के साथ जी सकने वाले अनगिनत कारण हैं जिनके ज़रिये आसपास पनपते दूषित माहौल का सामना करना ज़रा सहज और साहस भरा हो जाया करता है. मैं नहीं जानता कि कोई किस तरह मेरे किसी काम को देखता है लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि मैं ख़ुद के द्वारा किये गये काम, लिए गये फैसलों और जिए गये पलों को कैसे देखता हूँ! समय ने मुझे विभिन्न रिश्तों और घटनाओं के माध्यम से प्यार और सहयोग को भारी मात्रा में मुझ तक पहुँचाया है। इस साल की शुरुआत में ख़ुद के लिए वक़्त नि...

तुम्हारा अस्तित्व

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यह दुनिया छोटी लगने लगी है मुझको, एक  शख्स पर इतना ठहर गया हूँ  मैं!                                               - नागेश इंतज़ार की परिभाषा को मैं, उसकी आँखों को देखने के बाद हाशिये पर रख देता हूँ। इतना बड़ा आसमान लेकिन फिर भी अपने आप तक पहुँचने के लिए उसके पास कोई तरीका नहीं है, मैं रख देता हूँ अपना सर उसके हाथों में और मिल जाता हूँ ख़ुद से उसके ज़रिये। वह ठहरती है दो पल के भ्रम में दो पहर तक तो ऐसा लगता है दिन को थोड़ा और बड़ा होना चाहिए। मैं जब भी उसके क़रीब होता हूँ मुझे यह दुनिया ऊन का गोला लगती है जिससे मेरी चाह है कि इसका स्वेटर बुनकर चाँद को ओढ़ाया जाए। एक ख़याल को जीते हुए इतना अरसा हो गया मुझे, आज जब उसे पीछे छोड़ा तो वह उसके बालों में लिपटे क्लिप तरह इतराता हुआ दौड़ पड़ा मेरी ओर। इतना दूर आ चूका हूँ चलते चलते कि अब लौटने के लिए मुझे पते की नहीं किसी के...

हमारा प्रेम में होना

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रास्तों के पड़ाव ज़िन्दगी के मायने समझाते हैं और मैं हमेशा से ऐसे पड़ावों की तलाश में रहा। तुम आयी मेरी राहों के लिए एक ऐसा ही पड़ाव बनकर जिसने मुझे थाम लिया अपने सारे रंगों और खुशबुओं के साथ। तुम्हारा साथ रहना मुझे एक नएपन के एहसास से भर देता है। जब तुम थामती हो मेरा हाथ तो मैं अपने आप को गंगा में खड़ा हुआ महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता कि हम कब तक इस तरह शहर के कोनों में मिलते रहेंगे लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है कि हमारे मिलने में प्रेम और विश्वास की खुशबू हर वक़्त आती रहेगी। तुम्हारा सवाल करना मुझे तुरंत सारे आसमानों से ज़मीन पर ले आता है, जब तुम खिलकर अपना ख़्वाब पूरा कर लेती हो तो लगता है कि मोक्ष का मज़ा फीका पड़ जाएगा।        तुम्हारे दाहिने चलते रहने पर हवाओं ने मुझे महसूस करवाया कि हम कितने कीमती हैं एक दूसरे के लिए! ज़िन्दगी की उम्र तो नहीं पता लेकिन इसके रहने न रहने पर हम एक दूसरे को जीते रहेंगे इतना ज़रूर जानते हैं। जब तुम हँसती हो तो दिल करता है कि पहाड़ों में बर्फ़ गिरने लगे और मैं तुम्हारे साथ उसको निहारता रहूँ। जब जब तुम अपने गले से मुझको लगा लेती हो मेरे जवाबों...

इंतज़ार और तुम

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तुम देखती हो थोड़ी सी गर्दन झुकाकर मेरी ओर तो ऐसा लगता है कि सूरजमुखी देख रहा है सूरज को। सातों आसमान के पार से जब गूँजता है तुम्हारा स्वर तो इतनी ज्यादा ख़ुशी होती है कि मैं जून में भी नंगे पैर चल लेता हूँ। तुम मिली इस दफा मुझे पहाड़ों की गोद में, जहाँ मुझे कई जन्मों से आना था शायद: वहाँ आकर तो यही लगा था मुझे, तो घर वापसी जैसा भाव पैदा हो गया। तुम्हारे साथ प्रकृति को इतना सहज पाता हूँ जैसे कि किसी ने इसकी जंज़ीरें खोल दी हों, तुम खिल उठती हो जब पानी की चंद बूँदों से तो मेरा मन करता है कि उतार दूँ बादलों का तमाम पानी जो तुम तक पहुँच कर अपना जीवन सफल कर ले। जिस तरह दुनिया संजो रही है सारे सूत्र और समीकरण, मुझे ऐसा लगता है उसने तुम्हें पहचाना ही नहीं अब तक, कभी कभी जी करता है कि बिग बैंग थ्योरी वाले वैज्ञानिक को तुमसे मिलाऊँ, ताकि वो अपनी भूल सुधार सके। तुम्हारे साथ रहता हूँ तो अकेलेपन के सारे सिद्धांत मुझे खोखले लगते हैं, तुम जब डर जाती हो किसी जानवर से, उससे अपना प्रेम जाहिर करते हुए तो तुम्हें भँवरा बनकर छेड़ने को जी करता है।          ...

कवितायें (दक्षिण यात्रा)

कविता - १ एक पगडंडी भाग रही है अपनी जान बचाने दौड़ती हुई रेल की पटरियों के साथ; शायद कोई पक्की सड़क, उसका पीछा कर रही है। ________________________________________ कविता - २ एक नज़र ने देखा मुझको दूरी के दूसरे छोर से, क...

आईना देखो – ख़ुद से एक मुलाक़ात

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इन्कलाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो, बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं..                                         -अली सरदार जाफ़री                                    कितनी खूबसूरती से जाफ़री साहब ने बदलाव की गति को भी परिभाषित कर दिया अपने इस शेर में, जब सफर शुरु होता है किसी बदलाव का तो आरम्भ बड़ा ही पेचीदा और अनसुलझा हुआ दिखाई पड़ता है लेकिन जरुरत होती है उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त गुजारने की. यह वक़्त मेरी ज़िन्दगी में आया आईना देखो के रूप में, मेरा गाँव मेरी दुनिया के साथ जब इस यात्रा का हिस्सा बना था तब केवल यही मन में था कि सीखने की यह यात्रा ऐसे ही अनवरत चलती रहे और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनकर में कितन...

राहें, प्रेम और मैं

कुछ रास्ते आपको कभी मंज़िल तक नहीं ले जा पाते, ऐसे रास्ते सिर्फ भटकने के लिए बने होते हैं । जब ज़िंदगी का स्वाद थोड़ा भी ऊपर नीचे लगने लगे तो उसमें प्रेम का तड़का मारना आवश्य...