संदेश

ज़िंदगी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रेम और प्रेम

चित्र
Source - psychologicallyastrology.com तुमने मुस्कुराते हुए मेरे जीवन के बगीचे में कदम रखा और उस क्षण से आज तक हर लम्हें में ख़ूबसूरती भरते रहने में मगन रही तुम। मेरे द्वारा लिए गए श्वास में तुम्हारे होने का पुख़्ता सबूत है या यूँ कहूँ कि ज़िन्दगी के कर्ज़ को उतारने में तुम्हारी उधारी बहुत है। इतने वर्षों के इस रिश्ते ने अनगिनत मोड़ और पड़ाव देखे किन्तु अपनी नियति से यह अनभिज्ञ ही रहा। आज जब अपने प्रेम के ज्वार के क्षणों में तुम्हें खोजता हूँ तो हर सुधि पर तुम्हारी छवि दिखाई पड़ती है। कुछ रिश्ते आज़ाद करते हैं ज़िन्दगी के बेगानेपन को, यह सच है लेकिन कैसे! यह अब तक अनुत्तरित है। तुम्हारे द्वारा सुनाई गई एक ख़बर मुझे प्रेम और प्रेम में फ़र्क समझाएगी यह नहीं सोचा था। चेहरे पर मुस्कान, आँखों मे अविरल नीर और हृदय में अपार उन्माद लिए निहारता रहा तुम्हारी तस्वीर, किन्तु समझ नहीं पाया अब तक कि ऐसा क्या है जो मेरे अन्तस से उमड़ पड़ा है तुम्हारी ज़िन्दगी की नई राहों की आहट पाकर! मैं तमाम असमंजस से परे यह समझने में क़ामयाब रहा हूँ कि प्रेम की उम्र और सीमा तय नहीं किये जा सकते; यह तब भी वही था और आज भी वही और वही...

विश्वास – जीवन जीने के लिए एक अपरिहार्य गुण

चित्र
जब भी आप पीछे मुड़कर देखते हैं और अपनी जीवन यात्रा के बारे में सोचते हैं, तो एक ऐसी चीज है जिसके बारे में आप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेहद आभारी होंगे, वह है आपकी विश्वास करने की क्षमता। अविश्वास कारक के बारे में बहुत कुछ पढ़ने और चर्चा करते रहने के लिए उपलब्ध है कि हम जिस समाज में रहते हैं, वहाँ यह कैसे बढ़ रहा है, या जिस समाज में हम साथ रहने की योजना बना रहे हैं वहाँ कैसे उभर रहा है! लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि विश्वास कैसे अपनी भूमिका हमारे अस्तित्व में निभाता है। एक इंसान होने के नाते हम सभी "अजनबियों" पर भरोसा करने में पैदाईशी तौर पर सक्षम होते हैं; उस महिला से जो बच्चे को जन्म देती है, लेकिन बच्चे को उसके बारे में कुछ भी पता नहीं होता है, से लेकर अपनी उचित अंत्येष्टि की ख्वाहिश लिए किसी के हाथों में मरना। आप जानते हैं कि इस दुनिया में, जीवन के किसी एक या अन्य बिंदु पर, हम वैसे व्यक्ति की तरह कार्य करते हैं, जो हमारी जीवन यात्रा का हिस्सा होते हैं और दूसरों के साथ भी उसी तरह का व्यवहार करते हैं। एक ही व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि दूसरों के साथ भी। ब्रह्म...

रिश्तों की ज़िन्दगी

चित्र
Source - thriveglobal.com ज़िन्दगी के रास्ते अगर उतने ही आसान होते जितने वह सुनने में लगते हैं तो शायद एक सूखे पत्ते की तरह बहकर इसे जिया जा सकता था; लेकिन ऐसा नहीं है. एक तरफ ज़िन्दगी के हर बीतते पल में अनगिनत ख़्वाब अपना आशियाँ ढूंढते हुए आँखों में अपना सिर छुपा लेते हैं वहीं दूसरी ओर हर वक़्त सुलझते-सँवरते रिश्ते हाथों की अँगुलियों में अपनी पकड़ मजबूत करते रहते हैं. ख़्वाबों के पीछे भागना सबको होता है लेकिन उतना जज़्बा इकठ्ठा करके चलने की ताकत खोजते खोजते उम्रें बीत जाती है. न जाने किस घड़ी पैदा हुए लोग ही सोचते हैं कि उनके रिश्ते सँवरने सुलझने से परे उनकी पहचान को समझ कर उन्हें अपनी आज़ादी और प्रेम को महसूसने न दें तो एक कदम आगे बढ़ जाने में कोई बुराई नहीं है. रिश्ते जन्मजात तो केवल गिनती के होते हैं बाकि का जोड़-घटाव तो इंसान ख़्वाबों के पीछे भागते हुए (ऐसा हर किसी को लगता है लेकिन लगने और होने में फ़र्क है) करता है अपने रिश्तों में. ज़िन्दगी अगर आज़ादी और अपनापन न परोसे तो उसे खोजकर चखने को जीने का फ़र्ज़ कहने में कुछ ग़लत नहीं है. रिश्तों की दिखती न दिखती दीवारें, अक्सर अपनेपन और आज़ादी को जी...

किस्सा - ४ -- सच की खोज

चित्र
नदी का पानी कभी भी लौट कर नहीं आता , ऐसा किसी दार्शनिक ने सालों पहले कहा था . मैं जब कभी किसी नदी के किनारे होता हूँ मेरी आँखें कुछ न कुछ खोजना शुरु कर देती हैं . क्या खोज रही होती है यह आज तक जानना मुश्किल रहा है . मुश्किलें हवाओं सी होती हैं ज़रा अड़ियल और बेबाक ; किसी की सुनने के लिए उनके पास वक़्त नहीं होता . ज़िन्दगी की राहों में पेड़ से ज्यादा मुश्किलों का पहरा है क्योंकि हर कदम इंसान के ज्ञान का दायरा बढ़ जाता है . जितना ज्यादा ज्ञान होगा , अंतस की वेदना उतनी ही अधिक होगी यह प्रमाणित किया जा रहा है सदियों से , इन सदियों के बीतते लम्हों में . वेदना का कवच भेदने बुद्ध भी चले थे , सालों खोजते रहे और अंत में क्या पाया ; यही कि ‘ अपना सच आप ही खोजें तो बेहतर है मेरा सच आपके किसी काम का नहीं ’. दुनिया की तमाम किताबें हर नये गढ़ते शब्द में खोजती है अस्तित्व के कारणों को , लेखक हर दिन पन्नों की शहादत पर नाज़ चाहकर भी नहीं कर पाता ....

किस्सा -३ -- "तीसरा"

चित्र
Source - Pexels.com ‘ वक़्त के गुज़रने की आवाज़ सुनी है ?’, क्या कुछ भी पूछते हो तुम . यह बातें एक प्रेमी जोड़ा करेगा ऐसी उम्मीद दार्शनिकों के सिवा कोई और क्या ही रखेगा ! हाँ , लेकिन निर्मल वर्मा से प्रभावित कवि या लेखक भी अकेले बैठकर ऐसा   सोच सकता है . प्रेम ने दर्शन को बहुत हद तक अपनी गिरफ़्त में रखा हुआ है लेकिन दर्शन आज तक प्रेम के इर्द - गिर्द भी नहीं जा सका . दुनिया के तमाम सिद्धांतों के सिमटने पर प्रेम का ‘ प् ’ शुरु होता है . किस्सों की ज़िंदगियाँ बस उतनी ही होती है जितनी देर में पढ़ने वाला उसे पढ़ जाए ; बाकि तो पन्ने भरने की प्रक्रिया का नाम कहा जाता है . मैंने उसे कहते सुना था एक दफ़ा कि जब मेरे क़रीब रहो तो दर्शन और साहित्य दोनों को दहलीज के उस पार ही छोड़ आना अन्यथा मुझमें तुम्हें तीनों में से कुछ भी हाथ नहीं लगेगा . तीसरे की खोज में मैंने दुनिया की अच्छी किताबों को ढूँढकर पढ़ना चालू कर दिया है , हालाँकि खोज अभी जारी है . आप...

किस्सा -१ -- अंतहीन यात्रा

चित्र
ट्रेन के ब्रेक अचानक लगने से उसकी नींद खुली, शायद कहीं बियाबान में रुकी थी कोई जानवर रहा होगा. हो भी क्यूँ न! आजकल हर कोई बस जानवरों सा ही दीखता है और व्यवहार करता है. उसने उठकर अपनी घड़ी देखी, स्टेशन आने में अभी २० मिनट बचे थे. थोड़ी देर बगल में झाँकने के बाद उसे लगा कि उसका सिर दर्द से फटा जा रहा है, लेकिन उसे कोई उपाय नहीं सुझा; सूझता भी क्या उसे बस यात्रा के ख़त्म होने का इंतज़ार था, लेकिन यात्रा तो बस बगैर उसके एहसासों की परवाह किये चली जा रही है. कौन जाने, यह कब और कहाँ ख़त्म होगी! - कमलेश 

मैं और स्त्री

चित्र
दुनिया ने जब सुनाया अपना संगीत, तो सबसे पहले उसे सुना एक खेत में काम करती स्त्री ने। संगीत का सफ़र अनवरत रहा अनगिनत राहों और मोड़ से होते हुए, मैंने कानों में सुनी उस स्त्री की गूँज। जब से साबका हुआ है हक़ीक़त से मैं ठहरकर देखता हूँ हर उस स्त्री को जो लगती है मुझे बुद्ध के मौन और कृष्ण की अनुगूँज सी। हज़ार राहें गुज़र गईं इन 22 बरस के क़दमों तले होकर, मुझे मिली हर स्त्री ने मुझको दिया ज़िन्दगी के अनमोल पाठों का सार; मैंने ज़िद, समझ, विश्वास, समर्पण, प्रेम करुणा, ममता, आदर सी लगती हर बात को सीखा है स्त्री के वजूद से टपकते सच में। मेरा जीवन अधूरा है उस कली के खिलने तक जिसे किसी दिन खेत में काम करने आयीं, और अपने पसीने से लथपथ तन से समूचे विश्व के अस्तित्व का भार उठाती: एक निश्चल सी स्त्री ने पानी पीने के बाद लौठे में बचे पानी को गिराया होगा पौधे पर। मेरी आंखों के आगे फैले संसार में जितना कुछ मैं देख पाता हूँ मुझे यकीन है कि स्त्री के होने से ही मिल जाया करती हैं मेरे अस्तित्व को अनगिनत परिभाषाएं, दुनिया ढूंढ़ रही है सारे समाधान किताबों, विज्ञान और अ...

ज़िन्दगी और रास्तों का चुनाव

चित्र
लगभग सारे ही किनारों पर पसरी हुई हैं ख़ामोशियाँ पिछले कुछ दिनों से, जहाँ खनकती थी कभी ख़ुशियाँ। फैलती जा रही है यह दुनिया वैश्वीकरण के सिद्धांतों तले, सिमटता जा रहा है पर इंसान अकेलेपन से उपजे अवसादों में। सामने आए हुए दो रास्तों में, मैंने हर दफ़ा वही चुना जिस पर चलकर मुझे हमेशा लगता रहा कि मैं ख़ुद की परतें उतारने में लगा हूँ। आज खेत की मेड़ पर बैठे बैठे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे, खोज रहा था उम्र भर से जिसको छुपा हुआ था वह मेरे प्रेम के तरीकों में। कल फ़ोन पर बतियाते हुए मित्र ने कहा कि 'should' और 'can' में से जिसे चुनोगे, वही तुम्हें परिभाषित करेगा! मैं चुन चूका हूँ वह राह जो आज़ाद है  मेरी परिभाषाओं और वक़्त से, लेकिन धँसा हुआ है गहरे तक ज़िन्दगी को देखने के मेरे तरीकों में। - कमलेश शुक्रिया वसुधा जी इस तस्वीर के लिए...

जीवन यात्रा के २२ वर्ष और रोज़ पलटते पन्ने

चित्र
  ख़तों में उपजी अभिव्यक्ति और भावों का सम्मिश्रण जीवन के पड़ावों में ख़ूबसूरती बिखेरता है! हम कितनी समस्याओं या चुनौतियों से जूझ रहे हैं यह हमारे प्रेम करने और जीने के तरीकों से इतर हमें कदम-कदम पर एहसासों की डोर थामे रहने की ताक़त देता है. लेखन से मुझे ख़ुद को व्यक्त करने में सक्षम होने की खुशी और संतुष्टि मिलती है। वह वक़्त सबसे ख़ूबसूरत होता है जब मैं अपने रिश्तों में उनके लिए नियत प्रेम और पलों को बाँट पाता हूँ और जो रिश्ते हवाओं के साथ धुँधला रहे हैं उनकी खुशबुओं को फिर महसूसने के अनुभव को आत्मसात कर पाता हूँ. दुनिया में प्रेम और करुणा के साथ जी सकने वाले अनगिनत कारण हैं जिनके ज़रिये आसपास पनपते दूषित माहौल का सामना करना ज़रा सहज और साहस भरा हो जाया करता है. मैं नहीं जानता कि कोई किस तरह मेरे किसी काम को देखता है लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि मैं ख़ुद के द्वारा किये गये काम, लिए गये फैसलों और जिए गये पलों को कैसे देखता हूँ! समय ने मुझे विभिन्न रिश्तों और घटनाओं के माध्यम से प्यार और सहयोग को भारी मात्रा में मुझ तक पहुँचाया है। इस साल की शुरुआत में ख़ुद के लिए वक़्त नि...

प्रेम और करुणा... काफी है!

चित्र
घुप्प अँधेरे से भरी दुनिया में, हर कोई तलाश रहा है एक टुकड़ा रोशनी; जिसके सहारे उसे मिल सके अपने खोए हुए जीवन का पता. राहें खूँखार होती जा रही है, पानी में ज़हर घोलने वालों की संख्या बढ़ गई है चंद गुज़रे दिनों से: और भी न जाने कितनी तरह से मुश्किलों ने पाँव पसारे हैं यहाँ! मैं इतना तो जानता हूँ लेकिन कि मुझे कितने लम्हों में समेटना है अपनी आँखों के आगे फैले हुए संसार को, मुझे पता है यह भी कि कितना भाव दूँ किसी की नफ़रत को ताकि वह धरी की धरी रह जाए! और ख़ास बात तो यह है कि मुझसे कहा है किसी ने कि ख़ुद से किया गया प्रेम और सबके लिए उपजाई हुई करुणा इस दुनिया की तमाम मुश्किलों और हथियारों का सामना करने के लिए ज़रूरत से बहुत ज्यादा काफी हैं. -        कमलेश  तस्वीर के लिए शुक्रिया विजय भईया

अतीत की खिड़की में - १

चित्र
Source - Shutterstock.com सि तंबर एक ऐसा महीना है जिसमें यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि अगले पल क्या हो सकता है या फिर यही उत्सुकता कोई चोट खाकर हमेशा के लिए कोने में दुबककर बैठ जाती है। हीर को अपना शहर छोड़े 20 दिन हो गए थे और वह अब तक अपनी नई जगह पर बहुत ही अच्छे से रच बस गई थी , लेकिन हीर ने एक काम को उतनी ही शिद्दत से करना जारी रखा और वह था अपने कामों से इश्क़ और सागर का ख़याल। सागर से पहली बार मिले तीन महीने बीत चुके थे लेकिन अब भी वह मुलाक़ात कल ही घटित हुई किसी ताज़ी घटना सी लगती थी। सितंबर सागर के लिए ढेर सारी सौगातें लेकर आया हुआ था और उसी की आवभगत के चलते सागर को बहुत ही कम समय मिल पा रहा था , अपने दिल की बातों को हीर से हर्फ़ दर हर्फ़ साझा कर देने के लिए। आधा बिता हुआ सितंबर जो ठंडक और उमस देता है उससे फरवरी और अप्रैल के मिले जुले मौसम का माहौल बन जाया करता है , ज़िन्दगी भी ऐसे ही किसी आधे सितंबर में हमें उठाकर कभी फरवरी तो कभी अप्रैल के अनुभव करवाती है।                     सा...

फिर...बारिशें थम गईं

चित्र
Source - Pexels.com ए क रोज़ सूरज वैसे ही उगा जैसे हर रोज़ उगता है लेकिन आज सूरज यह नहीं जानता था कि आज कोई उसकी किरणों की गर्मी को ठंडा कर देगा , कोई है दुनिया में जो उसकी तरफ उतनी शांत नज़र से देखेगा कि उसकी ऊष्मा ख़तरे में भी आ सकती है। प्रेम ने आज सुबह उठकर अपने व्हाट्सअप से पिछले महीने शुरु हुई एक कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी नई दोस्त को अपना पिछले दिनों लिखा एक छोटा सा लेख पढ़ने के लिए भेज दिया और सूरज की तरफ अपनी नज़रें उठाई। ख़ुशी ने दूसरे दिन शाम को लेख पढ़कर अपनी प्रेम और खुशियों से सरोबार प्रतिक्रिया व्यक्त की , जिससे दोनों ही भावविभोर हो गए। ख़ुशी की प्रतिक्रिया के पीछे छुपे कारणों और उम्मीदों को प्रेम ने ख़ुशी की न बोली गई बातों से सुना और हर रोज़ उसे एक कविता सुबह की शुभकामनाओं के साथ भेजने का निर्णय ले लिया। ख़ुशी को यह पहल शायद उतनी ही ज़रूरी लगी जितना कि साँस लेना , वह प्रेम से उसके लेखन के बारे में बातें करने को हमेशा उत्सुक दिखी और दोनों आये दिन अपने अनुभवों को एक दुसरे के साथ साझा करते रहे। इसी सिलसिले में एक दिन प्रेम ने अपनी एक कहानी उसे भेजी जिसकी उसे उस वक़्त भेजने क...

ज़िन्दगी का केंद्र

चित्र
ज़िन्दगी के अच्छे खासे दौड़ते-भागते दिन जब बिस्तर पर बीतने लगे तो लगता है बहती नदी पर पलक झपकते बाँध बना दिया हो. काम करने का सलीका अचानक से ऑफिस बैग से निकलकर पूरे कमरे में पसर जाता है. अंगुलियाँ अनगिनत चहलकदमी करती हुई अपने होने के वजूद को किसी मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के की-बोर्ड पर खपा देती हैं. ऐसे वक़्त में मौसम के बदलते मिजाज़ का अंतर्मन से कोई भी नाता नहीं पनपता और न ही किसी ख़ूबसूरत कली को देखकर दिल में कोई हूक उठती है. उठता है तो बस एक निरा खालीपन जो एक लम्बे वक़्त से बाहर से बोलते लेकिन अन्दर से ख़ामोश शरीर में घर कर चुका होता है. इस दुनिया में हर रोज़ धुलते हैं अनगिनत चेहरे और सजते हैं उतने ही अधर किसी प्रिय के चुम्बन की आस में, लेकिन कितने चेहरों का दीदार किया जाता है और कितने ही होंठ चुम्बन के बाद मुतमइन हो पाते हैं! यह सवाल कोई नहीं करना चाहता कि उसके जीवन में प्रेम है या नहीं लेकिन कामों की फ़ेहरिस्त कितनी घटा दी है एक ही कुर्सी पर कमर की सारी भावनाओं को क़त्ल करते हुए यह सब को ज्ञात है.             ...

खुशियों का रास्ता

चित्र
खुशियों का रास्ता दिल की राहों से होकर जब घर की दहलीज़ पर पहुँच जाए तो लगता है कि ज़िन्दगी में ठहराव और प्रेम एक साथ जिया जा सकता है. वक़्त से कोई कितना कुछ माँगेगा जब वह अपने मूल्यों पर जीते हुए वे सारे सवाल और रिश्ते सुलझा ले जिनसे जीवन के रास्ते छाँव और सुकून से भर जाया करते हैं. मैं पिछले महीने दीवाली के लिए घर पर था और यह मेरी दिल्ली आने के बाद की सबसे लम्बी घर पर बिताई हुई छुट्टियाँ थीं। इस बार जब मैं घर पहुँचा , तो कुछ ऐसा था जो मुझे हर क्षण कहता रहा कि यह समय ख़ास है और मैं इसे और अधिक सुंदर बना सकता हूँ वह भी मेरे प्रेम और समर्पण के तरीकों से. इस दफ़ा यह पहली बार हुआ कि मैंने अपने परिवार के लगभग सभी सदस्यों के साथ यादगार बातचीत की , चाहे फिर वह मेरी पापा के साथ हुई बातचीत हो या मम्मी या भईया-भाभी के साथ जीवन यात्रा के किस्से सुनना और सुनाने वाला समय. सब कुछ इतना सहज और सुन्दर था कि सिर्फ वक़्त के बहाव में पूर्णता के साथ संतुष्ट कर देने वाले स्तर तक स्थापित हो गया. एक बात मैं जीवन के इस पड़ाव पर अपने प्रेम की ताकत के साथ स्वीकारना सीख गया हूँ कि एक समय ऐसा भी रहा है जीवन में जब...

मुलाकातें, यात्रा और प्रेम

चित्र
मुलाकातें हमेशा ही खूबसूरती की नींव रखती है. तकरीबन ३ सालों के बाद राहों ने मुझे इंदौर की गलियों से रूबरू करवाया और दिल की तमाम ख्वाहिशों का ज़खीरा अपने पूरेपन के एहसास में खोकर लौटा. पिछले ३ साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से काफी अहम और प्रेरणादायी रहे हैं, जितना कुछ इन वर्षों ने दिया है वह अमूल्य है. इन राहों के सफ़र में कुछ दोस्त अपनी राह पर चलकर इस खूबसुरत शहर आ चुके थे, जिनसे मिलने की फिराक़ में मैं यहाँ पहुँच गया. दोस्तों के साथ बैठकर अपने और उनके जीवन की यात्रा के बारे में जानना और उनके अंतर्मन को सुनना मेरे लिए एक नए आसमान के द्वार खोलने जैसा अनुभव रहा है. चाहे फिर रिंग रोड पर विवेक और गजेन्द्र के साथ काम और व्यक्तिगत जीवन की बाते हों या फिर उनके जीवन के ३ वर्षों में बीते हुए वसंत का किस्सा: गजेन्द्र और विवेक को ३ सालों के बाद मिलना और उनमें आये हुए बदलाव का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं है. ऐसी मुलाक़ातें वक़्त को कीमती बनाती हैं.   नवोदय के साथी रहे शिवपाल, जितेन्द्र और ईश्वर के साथ का वक़्त अपनी अलग छाप रखता है और यह एहसास एक सुकून देता है कि साथी अपने दिल की...

हमारा प्रेम में होना

चित्र
रास्तों के पड़ाव ज़िन्दगी के मायने समझाते हैं और मैं हमेशा से ऐसे पड़ावों की तलाश में रहा। तुम आयी मेरी राहों के लिए एक ऐसा ही पड़ाव बनकर जिसने मुझे थाम लिया अपने सारे रंगों और खुशबुओं के साथ। तुम्हारा साथ रहना मुझे एक नएपन के एहसास से भर देता है। जब तुम थामती हो मेरा हाथ तो मैं अपने आप को गंगा में खड़ा हुआ महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता कि हम कब तक इस तरह शहर के कोनों में मिलते रहेंगे लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है कि हमारे मिलने में प्रेम और विश्वास की खुशबू हर वक़्त आती रहेगी। तुम्हारा सवाल करना मुझे तुरंत सारे आसमानों से ज़मीन पर ले आता है, जब तुम खिलकर अपना ख़्वाब पूरा कर लेती हो तो लगता है कि मोक्ष का मज़ा फीका पड़ जाएगा।        तुम्हारे दाहिने चलते रहने पर हवाओं ने मुझे महसूस करवाया कि हम कितने कीमती हैं एक दूसरे के लिए! ज़िन्दगी की उम्र तो नहीं पता लेकिन इसके रहने न रहने पर हम एक दूसरे को जीते रहेंगे इतना ज़रूर जानते हैं। जब तुम हँसती हो तो दिल करता है कि पहाड़ों में बर्फ़ गिरने लगे और मैं तुम्हारे साथ उसको निहारता रहूँ। जब जब तुम अपने गले से मुझको लगा लेती हो मेरे जवाबों...

अभिव्यक्ति व्यर्थ है और व्यर्थ हैं परिभाषाएं सारी

चित्र
Source - Time.com कुछ रातें ज़िन्दगी का आईना सामने रखती हैं। जब मैंने तुम्हें देखा अपने क़रीब बैठे हुए तो मैंने जाना कि प्रेम सबसे ताकतवर और असरदार हथियार है किसी भी लम्हें में ख़ुद को जी लेने के लिए। तुम प्रेम हो यह बात मैंने तब जानी, जिस दिन तुमने मुझसे कहा था कि हमारा रिश्ता प्रेम की बुनियाद पर खड़ा है। तुम्हें रखना किसी दिन के आठों पहर अपने सामने और खो देना तुमको ठीक अगले ही दिन ख़ुद में से, यह और कुछ नहीं मेरे प्रेम में डूबने के मार्ग को आसान बनाता है। मैंने यही चाहा है हमेशा कि प्रेम में खोकर, सब कुछ ही खो दिया जाये, प्रेम को भी! लेकिन मैं नहीं जानता यह कथन कितना सत्य है! जब तुम बातें करती हो, कई नदियों, जंगलों, शहरों और पर्वतों के पार से, तो मुझे कालिदास की याद आ जाती है। तुम कालिदास के लिए सदैव अकल्पनीय ही रही, केवल मुझे ही अब तक तुम्हें प्रकति के प्रेम के ज़रिए ख़त लिख सकने का सुख प्राप्त है। तुम्हें ढूँढना उगते हुए सूरज में, मुझे पंछियों की चहचहाहट से दूर नहीं करता। किसी रेगिस्तान में मैं तुम्हारी ख़ुशबू के क़रीब चला आता हूँ उसकी रेत को अपने हाथों में थाम लेने भर से। कोई भ...