तीन कविताएँ
1. पानी से भरी एक पतीली को मैं देखे जा रहा हूँ आँखें गढ़ाकर, तुम मेरी आँखों के प्रतिबिंब के भी तीन कदम पीछे आकर खड़ी हुई; तुम्हें देखते रहना पानी में थोड़ा-थोड़ा ज्यादा सुकूनदायक ल...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।