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सुनो दोस्त!

मनु के लिए - (14-जुलाई-2019) कुछ रिश्ते नदी में बहते फूलों की तरहा होते हैं, मैं बहकर आ गया तुम तक ऐसी ही एक आनंदमयी लहर के साथ, तुम्हें देखकर लगा नहीं मुझे कि मिला हूँ तुमसे मैं सिर्फ क...

अनजानी सी तुम

यूँ ही घूमते हुए किसी पार्क में, जब देखता हूँ वहाँ खेल रहे बच्चों को, तो मेरा बचपन हिलोरें मारने लगता है मेरे भीतर। कुछ मुस्कुराहटें जो अनजान लोगों के चेहरे पर देखता हूँ, तो ...

ख़्वाहिश

कॉलेज के गेट से स्कार्फ बांधे निकली लड़की, और स्टेशन के ओवरब्रिज की सीढ़ियाँ अनमनेपन से चढ़ रहा लड़का, ज्यादा कुछ नहीं केवल किसी बिंदू पर पहुँचकर, फिर मिल जायेंगे ऐसा चाहते है...

एक बात

जब लगा डर मुझको कुछ रिश्तों के खो जाने का, तो मैंने उनको सिर की पोटली से उतारकर, अपनी कमर में खोंस लिया । कुछ मुलाकातें जो जा रही थी अपने पीछे एक ख़ाली जगह छोड़े, मैं आगे बढ़ा और...

कुछ बातें और

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बहुत मुश्किल होता है चंद घड़ियाँ साथ बिताकर सारी यादों को सुनहरा कर लेना, आधा वक़्त तेरी सूरत को निहारने, लटों को गालों से परे हटाने हाथों पर हाथों से कुछ भी लिखने, और पैरों के अंगूठों की झूठी लड़ाई में गुज़र जाता है हमारा । गरियाने के लिए बातों का गठ्ठर, एक दिन पहले वाली फ़ोन कॉल पर होता है बस, जो मिलने आते-आते कहीं खो जाता है, और बचती है केवल खामोशियाँ । सारी निजताओं को अचानक से परे फ़ेंक, जब लिपट जाया करते हैं एक-दूजे से हम, उन नज़दीकियों में जहां केवल हम होते हैं, तब ये महसूस होता है कि इनसे बढ़कर कुछ नहीं । Source - Flickr कुछ वायदे और आरज़ू कुछ आश्वासन और बेमतलब के झगड़े, जब बिखरने लगते हैं हमारे इर्द-गिर्द तो कोशिश यही होती है कि इन्हें जल्द समेट लिया जाए, ताकि हम लौट सकें अपनी पूरानी दुनिया में पहले की तरह, लेकिन इन यादों के साथ जीने के लिए अगली मुलाक़ात के इंतज़ार में ।                             ...

कुछ बातें

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कभी कभी डरा देता है मुझको खामोश बैठ जाना तेरा मेरे पहलु में, ख़ुमारी तेरी मौजूदगी की होती तो ख़ूब है लेकिन वो अचानक भाग खड़ी होती है, तेरे मुझको छू लेने पर और मैं, महसूस करने लगता हूँ फिजिक्स के सारे सिद्धांत तेरे हाथों की नरमाहट में । Source - Pinterest बातों को बगीचे के पार धकेलते वक्त पैर के अंगूठे से तेरी पगतलियों को, छूने की वो साज़िश जब तुम भांप लेती हो, तो लगता है चाणक्य को तुम्ही ने सिखाया है । मेरे लिए खरीदा गया वो तोहफ़ा जिसे तुम यह कहकर देने से मना कर देती हो कि 'जाओ मन नहीं है तुम्हें देने का' और फिर तुम चुप हो जाती हो । तुम्हारी नज़र को सूरज की किरणों की तरहा खुद पर बिखरते देखना और भी मुश्किल हो जाता है उस वक्त, जब तुम पूछती हो कि 'चुप्पी में ख्याल क्या आते हैं तुम्हें ?' 'जानां' मैं कहना भूल गया कि सारी बातें बताई नहीं जाती, "कुछ बातें चाँद सी भी होती हैं ।"                            .....कम...

प्रेम और बदलाव

आकर्षण के सिद्धांत के अनुसार कोई भी दो चीजें एक निश्चित दूरी तक ही एक दूजे के क़रीब रह सकती है, यह नियम सारे रिश्तों को बांधे हुए है और यह दुनिया अब तक इस डर में जी रही है कि अत्य...

ग़ज़ल

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Source - Pinterest.pt ये आँखें तुम्हारी शराब है क्या, नाज़ुक होंठ कोई गुलाब है क्या । महकती है खुश्बू हर-तरफ तेरी, जिस्म ये तुम्हारा गुलशन है क्या । रातों से तकरार-चांद से मौसिक़ी, तुझसे इश्क़ कोई मज़ाक है क्या । छू लें तुम्हें जो कभी बेशर्मी से हम, तो बतलाओ कोई ऐतराज़ है क्या । ऐसे वक़्त ज़ाया नहीं किया करते, हसीन शामें हर रोज़ आती है क्या । मेरे सवालों पर ऐसे ख़ामोश बैठ गए, किसी बात की तुम्हें नाराज़गी है क्या । ये ज़माना सताता ही है चाहने वालों को, पर खुद सोचो इसकी औकात ही है क्या । माना कि एक दिन सबको मरना है, तो बतलाओ हम जीना छोड़ दें क्या । कुछ दिनों से ख़फा हैं चंद मिलने वाले, सोचता हूँ ये लोग कहीं के नवाब है क्या । मौत आए तो उसे कहना इंतज़ार करे, तेरे दीदार के बगैर ही मर जाएंगे क्या ।                                           ...

याद

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हर रोज़ रात को सोने जाते वक़्त जब बिस्तर का रुख करता हूँ, तब मेरी नज़र खिड़की की जाली के पार होती हुई आसमान में टिमटिमाते एक पीले तारे पर जाकर ठहर जाती है, शायद तुम भी उस वक़्त उस तारे को देख रही होती हो ! और इस तरह हमारी नज़रें मिल जाती है । रात,  Source - Hamipara.com नज़रों की इस बातचीत और उस पीले तारे को निहारते हुए गुज़र जाती है; भोर के वक़्त उस विलुप्त होते तारे को देख, ठिठक जाता हूँ मैं, तब तुम भी तो उगता हुआ सूरज देख रही होती हो । रात भर की खलिश मिटाने अलसुबह जब तुम बना लेती हो एक चाय, ठीक उसी वक़्त मैं भी पी रहा होता हूँ वो ही चाय ! दिन को, तुम्हारी यादों की बारिश में, एक एक कर भिगो देता हूँ मैं ख्यालों के सारे पुलिंदे, तब शायद तुम भी इसी तरह भीगकर, मयस्सर कर लेती हो मेरे एहसास । किसी आलस भरी दोपहर जब काम की उहापोह के बीच, तुम खीझ उठती हो किसी पर, झल्ला उठता हूँ मैं भी, उसी वक़्त पास खड़े किसी शख्स पर लेकिन बेवजह ! थकान से लबरेज़ जब मैं, जा बैठता हूँ खुली छत पर शाम के साए में, तब गुजिस्ता लम्हों की फेहरिस्त पढ़कर एक आंसू छलक जाता ...

पहला चुम्बन

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        Source - shutterstock.com  कुछ बातें वैसे ही याद रह जाती है जैसे किसी अच्छी होटल का खाना । बात अगर कही जाए तो दो लफ्ज़ में कही जा सकती है लेकिन बिना बेक ग्राउंड के उसे समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है । आयुष बिना कुछ सोचे समझे अपने कंधे पर एक बैग लादे, सितारा बस में चढ़ा । सारे रास्ते पूराने ख्यालों के पुलिंदे पलटता रहा जो उसे हर लाइन पर मुस्कुराने के लिए बाध्य कर रहे थे । पांच बजकर बीस मिनट पर आयुष नाका नम्बर पांच पर अपने सामान को थामे उतरा । निकट ही के एक रिश्तेदार के घर जाकर जो कि नाके की बगल वाली गली में था वहाँ अपना सामान रख दिया और मोबाइल में अपनी बर्थ की करेंट स्टेटस चेक करने के बाद फिर बाहर सड़क पर घुमने के लिए निकल गया ।                     घूमते हुए जब वह चौराहे पर पहुंचा तो उसे याद आया कि शिवानी की कोचिंग क्लासेस इसी एरिया में पड़ती है । करीब पौने छः बजे तक वह ऐसे ही टहलता रहा मानो उसे किसी का इंतज़ार हो । उस चौराहे पर गुजरने व...

कुछ तुमने कुछ मैंने ...

दर्द के किस्से सुनाए कुछ तुमने कुछ मैंने, फिर सिसकियाँ सुनी कुछ तुमने कुछ मैंने । सारी तकलीफों की नुमाइशें करते करते, कई आँसू भी गिराए कुछ तुमने कुछ मैंने । देखा जब ज़ख्मों ...

बचकानी हरकतें ..........

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Source- We Heart It जब आमजन काम पर निकल चूके होते, सड़कों पर शोरगुल मच रहा होता और सूरज चाचा गुस्सा होने लगते तब कहीं माँ की डाँट और भाईयों के उलाहने सुनकर आशु उठता । बारह बजे अपने घर की बालकनी पर बैठकर नाश्ता करते वक्त उसकी अँगुलियाँ वाटस्एप और फेसबुक पर मार्निंग वाॅक कर रही होती । लेकिन आज मार्निंग वाॅक में खलल पड़ा गली से आती एक प्यारी लेकिन गुस्से भरी आवाज से, एक लड़की जो पास खड़े आॅटो वाले को डाँट रही थी कारण पता नहीं । आशु की निगाह गली में गई तो थी किंतु लौटी नहीं, नज़र चुपचाप उस पीले सूट वाली लड़की के पीछे हो ली जो अब अपनी लटों को चेहरे से हटाकर कानों के पीछे धकेल कर अपने रास्ते पर चल पड़ी थी । अगले दिन आशु थोड़ा वक़्त पर उठकर नाश्ता कर रहा था, लेकिन आज उस बैचेनी में इंतज़ार छुपा हुआ था । कुछ देर बाद वह दिखी एक सात साल के बच्चे के साथ, उसका बस्ता हाथ में लिए और नीले सूट में, अपने होठों पर मुस्कराहट बिखेरती हुई वो उस बच्चे को स्कूल से लेकर घर वापस लौट गई । आशु ने पड़ताल की तो पता चला कि स्कूल ७ से १२ तक चलता है, दो दफ़ा अनजानी सुरत देखने के बाद मचला हुआ दिल प्रत्यक्ष रुप से मिलना चाह...

सवाल

मेरे साथ राहों पर घूमते हुए, मेरी साँसों के चलने की वजह बनते हुए, एक सवाल तुमने जो पूछ लिया था मुझसे कि कहाँ तक जाना चाहता हूँ तुम्हारे साथ  ? मैं वहाँ जाना चाहता हूँ, जहाँ तुम ...

तुम्हें याद है ना ?

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Source - Daily Mail                            उस दिन मैं अपने घर वापस आया था कुछ दिन की छुट्टियाँ लेकर , सबसे मिलना जुलना हो चूकने के बाद जब खाना खाने बैठा तब तुम्हारा फोन आया । तुम बहुत नाराज थी क्योंकि मैं इस बार भी तुमसे मिलने नही आ पाया था तुम्हें बहुत देर समझाने के बाद कहीं जाकर तुम सामान्य हुए वह भी इस वादे के साथ कि वापसी के वक्त तुमसे मिलकर जाऊं । उस बातचीत के बाद मेरे दिन तुम्हारे साथ मुलाकात के सपने देखते हुए कब गुजर गए पता ही नहीं चला ।                             उस रोज शनिवार था मैंने उठकर सबसे पहले तुम्हे फोन किया था ताकि तुमको बता सकूँ के मैं आ रहा हूँ ,तुम कह रही थी के दोपहर तक आ जाना मैं इंतजार करूँगी । मैं उस फोन के बाद काम में इतना उलझ गया था कि तुम्हारे पास आते आते बहुत लेट हो गया था,फिर बस से उतरकर पागलों की तरह भागते हुए तुम तक पहुँचा तो बस स्टॉप की उस बेतरतीब भीड़ में तुम्हें व्यवस्थित और खामोश प...

ग़ज़ल

अपनी ख्वाहिशों का सूरज उगते देखा है, मैंने तुझको मेरा नसीब लिखते देखा है । झिलमिलाती है चाँदनी जैसे आसमान् पर, तुझको खिलखिलाकर वैसे हँसते देखा है । सिकुड़ जाती है जो छुईमुई जब छुने पर, मेरी पनाहों में तुझको यूँ शरमाते देखा है । बिखर जाता है जैसे कोई फूल हवाओं में, मेरी बाँहो में तुमको वैसे ही टूटते देखा है । घुलती है जैसे शराब पानी में रुह बनकर, खुद में तुझको उस तरह मिलते देखा है ।                                      .....कमलेश.....