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भगवान् होने के लिए. . .

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  Source - How.fn कोई हलचल तो होगी इस विरान बियाबान में, कोई कोयल तो कूकेगी जीवन के इस उपवन में, उल्लास निरंतर आएगा मायूसी समेटे आँगन में, रोशनी का उत्सव होगा अंधेरे पर श्री के बाद, खुशी जन्म लेगी फिर दुख के निर्वाण के लिए, घर को त्याग कोई जाएगा पिता की प्रतिष्ठा के लिए, हलाहल का पान करेगा वो समूचे जग के हित को, राधा भी विरह में तड़पेगी प्रेम की अमरता के लिए, कोई अवतरित होगा यँहा खुद भगवान् होने के लिए ।                            .....कमलेश.....

पथिक

राह चलते उस पथिक को आँखे मेरी जब देखती है, अमीट आस मेरे नयन से उसकी आँखे जब देखती है । नही होती जिसके स्वप्न में कोई विराट अट्टालिका,  है दृश्य उसके स्वप्न का सुख की छोटी चादर ...