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शहर

कोई भूलता नहीं अब रास्ते यहाँ सो भटकने की गुंजाइशें कम हो रही हैं, रास्ते नहीं आते लौटकर वापस अब शायद पीठ की आँखों पर पट्टी चढ़ गई है, दिन भर दौड़ता है सड़कों पर ये शहर, इसकी साँसे ...

आम

चित्र
Source - Exotic Flora खेत की मेड़ पर लगा है बूढ़े आम का एक पेड़, डाली पे मोड़¹ आने पर जिसकी मैं इंतज़ार करना शुरु करता था कच्ची केरियों के आ जाने का । जेठ में दादाजी सुनाते थे बड़े चाव से हाग² पाड़ने के किस्से, मैं तोड़ लाता था केवल दो हाग मेरे और दादाजी के लिए, जिसका स्वाद अब नहीं आता कार्बन से पके आम में । जब से दादाजी गए हैं मैंने नहीं सुना कोई भी किस्सा हाग का, शहर की सड़कें इतनी तंग हैं कि आम ढूंढने पर भी नहीं मिलता, मिल भी जाए अगर कहीं तो उस पर मोड़ नहीं दिखता होली पे । परसों देखा था बगीचे में एक पेड़ बाहर लेकिन एक तख्ती टंगी थी, "यहां से फल तोड़ना मना है" ।                                     - कमलेश नोट -- मोड़ - होली के आसपास आम पे आने वाले फूल ।। हाग - पेड़ पर ही पका हुआ आम ।।