मुलाकातें, यात्रा और प्रेम
मुलाकातें हमेशा ही खूबसूरती की नींव रखती है. तकरीबन ३ सालों के बाद राहों ने मुझे इंदौर की गलियों से रूबरू करवाया और दिल की तमाम ख्वाहिशों का ज़खीरा अपने पूरेपन के एहसास में खोकर लौटा. पिछले ३ साल मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से काफी अहम और प्रेरणादायी रहे हैं, जितना कुछ इन वर्षों ने दिया है वह अमूल्य है. इन राहों के सफ़र में कुछ दोस्त अपनी राह पर चलकर इस खूबसुरत शहर आ चुके थे, जिनसे मिलने की फिराक़ में मैं यहाँ पहुँच गया. दोस्तों के साथ बैठकर अपने और उनके जीवन की यात्रा के बारे में जानना और उनके अंतर्मन को सुनना मेरे लिए एक नए आसमान के द्वार खोलने जैसा अनुभव रहा है. चाहे फिर रिंग रोड पर विवेक और गजेन्द्र के साथ काम और व्यक्तिगत जीवन की बाते हों या फिर उनके जीवन के ३ वर्षों में बीते हुए वसंत का किस्सा: गजेन्द्र और विवेक को ३ सालों के बाद मिलना और उनमें आये हुए बदलाव का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य से कम नहीं है. ऐसी मुलाक़ातें वक़्त को कीमती बनाती हैं. नवोदय के साथी रहे शिवपाल, जितेन्द्र और ईश्वर के साथ का वक़्त अपनी अलग छाप रखता है और यह एहसास एक सुकून देता है कि साथी अपने दिल की...