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वक़्त की कारस्तानियाँ और प्रेम का दीया

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Source - eeweb.com         ज नवरी का पहला दिन वसुंधरा के लिए कई अनमोल तोहफे और अनगिनत यादें सहेजने का अवसर लेकर आया था , जितनी ख़ुश और खुली हुई वह आज दिख रही थी उतनी बहुत ही कम मौकों पर दिखाई पड़ती थी। वसुंधरा अपने काम से फुरसत पाकर इस समय कच्छ में अपने कुछ साथियों के साथ उसको जानने की प्रक्रिया में लगी हुई थी , वसुंधरा ने साल 2019 के पहले दिन में कुछ लोगों से इस तरह मुलाक़ात और बातें की जैसे गए साल में उसने कभी उन लोगों को देखा ही नहीं। अपनी खुशियों और आज़ादी को जीते हुए उसे एक पल को हिम का ख़याल आया और उसने आज उसे कॉल करने की बजाय संदेश भेजने के लिए अपना फोन देखा और तब वह अपने फोन में प्राप्त संदेश को पढ़कर कुछ पल के लिए उस लम्हें में ही ठहर गई शायद उसे पूर्ण रुप से आत्मसात करने के लिए। हिम ने उसके लिए एक छोटा सा संदेश छोड़ा था नए साल की शुभकामनाओं के साथ जिसमें उसकी भावनाएं पढ़ना उतना ही आसान था जितना कि पहली के बच्चे का हिंदी वर्णमाला के अक्षरों को पहचानना। वसुंधरा ने बिना कोई भाव ज़ाहिर किये उस लेख को जाने कितने दिनों तक अपने भीतर ज़िंदा रखा ताकि ...

फिर...बारिशें थम गईं

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Source - Pexels.com ए क रोज़ सूरज वैसे ही उगा जैसे हर रोज़ उगता है लेकिन आज सूरज यह नहीं जानता था कि आज कोई उसकी किरणों की गर्मी को ठंडा कर देगा , कोई है दुनिया में जो उसकी तरफ उतनी शांत नज़र से देखेगा कि उसकी ऊष्मा ख़तरे में भी आ सकती है। प्रेम ने आज सुबह उठकर अपने व्हाट्सअप से पिछले महीने शुरु हुई एक कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी नई दोस्त को अपना पिछले दिनों लिखा एक छोटा सा लेख पढ़ने के लिए भेज दिया और सूरज की तरफ अपनी नज़रें उठाई। ख़ुशी ने दूसरे दिन शाम को लेख पढ़कर अपनी प्रेम और खुशियों से सरोबार प्रतिक्रिया व्यक्त की , जिससे दोनों ही भावविभोर हो गए। ख़ुशी की प्रतिक्रिया के पीछे छुपे कारणों और उम्मीदों को प्रेम ने ख़ुशी की न बोली गई बातों से सुना और हर रोज़ उसे एक कविता सुबह की शुभकामनाओं के साथ भेजने का निर्णय ले लिया। ख़ुशी को यह पहल शायद उतनी ही ज़रूरी लगी जितना कि साँस लेना , वह प्रेम से उसके लेखन के बारे में बातें करने को हमेशा उत्सुक दिखी और दोनों आये दिन अपने अनुभवों को एक दुसरे के साथ साझा करते रहे। इसी सिलसिले में एक दिन प्रेम ने अपनी एक कहानी उसे भेजी जिसकी उसे उस वक़्त भेजने क...

खुशियों का रास्ता

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खुशियों का रास्ता दिल की राहों से होकर जब घर की दहलीज़ पर पहुँच जाए तो लगता है कि ज़िन्दगी में ठहराव और प्रेम एक साथ जिया जा सकता है. वक़्त से कोई कितना कुछ माँगेगा जब वह अपने मूल्यों पर जीते हुए वे सारे सवाल और रिश्ते सुलझा ले जिनसे जीवन के रास्ते छाँव और सुकून से भर जाया करते हैं. मैं पिछले महीने दीवाली के लिए घर पर था और यह मेरी दिल्ली आने के बाद की सबसे लम्बी घर पर बिताई हुई छुट्टियाँ थीं। इस बार जब मैं घर पहुँचा , तो कुछ ऐसा था जो मुझे हर क्षण कहता रहा कि यह समय ख़ास है और मैं इसे और अधिक सुंदर बना सकता हूँ वह भी मेरे प्रेम और समर्पण के तरीकों से. इस दफ़ा यह पहली बार हुआ कि मैंने अपने परिवार के लगभग सभी सदस्यों के साथ यादगार बातचीत की , चाहे फिर वह मेरी पापा के साथ हुई बातचीत हो या मम्मी या भईया-भाभी के साथ जीवन यात्रा के किस्से सुनना और सुनाने वाला समय. सब कुछ इतना सहज और सुन्दर था कि सिर्फ वक़्त के बहाव में पूर्णता के साथ संतुष्ट कर देने वाले स्तर तक स्थापित हो गया. एक बात मैं जीवन के इस पड़ाव पर अपने प्रेम की ताकत के साथ स्वीकारना सीख गया हूँ कि एक समय ऐसा भी रहा है जीवन में जब...

तुम्हारा अस्तित्व

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यह दुनिया छोटी लगने लगी है मुझको, एक  शख्स पर इतना ठहर गया हूँ  मैं!                                               - नागेश इंतज़ार की परिभाषा को मैं, उसकी आँखों को देखने के बाद हाशिये पर रख देता हूँ। इतना बड़ा आसमान लेकिन फिर भी अपने आप तक पहुँचने के लिए उसके पास कोई तरीका नहीं है, मैं रख देता हूँ अपना सर उसके हाथों में और मिल जाता हूँ ख़ुद से उसके ज़रिये। वह ठहरती है दो पल के भ्रम में दो पहर तक तो ऐसा लगता है दिन को थोड़ा और बड़ा होना चाहिए। मैं जब भी उसके क़रीब होता हूँ मुझे यह दुनिया ऊन का गोला लगती है जिससे मेरी चाह है कि इसका स्वेटर बुनकर चाँद को ओढ़ाया जाए। एक ख़याल को जीते हुए इतना अरसा हो गया मुझे, आज जब उसे पीछे छोड़ा तो वह उसके बालों में लिपटे क्लिप तरह इतराता हुआ दौड़ पड़ा मेरी ओर। इतना दूर आ चूका हूँ चलते चलते कि अब लौटने के लिए मुझे पते की नहीं किसी के...

तुम ख़ुद एक भाषा हो

    कुछ बातों को मुझे लिखने की ज़रूरत नहीं क्योंकि मुझे उनका साथ होना ज्यादा अच्छा लगता है ऐसी बातें लिख देने से मर जाया करती हैं। मैं तेरे किस्से कभी कभार लिखता हूँ इस आस में ...

आंखें

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Source-GetDrawings.com आंखें इस कुदरत का सबसे करिश्माई तोहफ़ा है, जिसने हमें दिमाग से आगे और पेट से बड़ी चीजें दिखाई है । आंखें विद्यमान है सर्वस्व हमें ख़ूबसूरत बनाए रखने के लिए, श्रृंगार का एक भी रस नहीं चूका अब तक, चाहे आंखें पलकों के सख़्त पेहरे में क्यूं ना हो । भावनाओं के दोमुखी व्यवहार को आंखों ने कभी नहीं स्वीकारा, आंखें निश्चल दर्पण है हमारी असीम भावनाओं का । तुमने कभी अपनी आंखें नहीं देखी, मैंने सिवाय आंखों के कुछ नहीं देखा ।                                           -- कमलेश