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दीवाली, धोखा और खुशख़बरी

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Source - Homeenergymd.com क र्ण अपनी बर्थ पर लेटा हुआ था और किसी किताब के पन्नों पर लिखे शब्दों को बिना रुके पढ़ता चला जा रहा था , वह किताब उसने स्टेशन से चलते वक़्त शुरु की थी कुछ 6 घंटे पहले। रात के आठ बज रहे थे और ट्रेन किसी स्टेशन के आउटर पर खड़ी अपने सिग्नल की बारी का इंतज़ार कर रही थी , तभी कर्ण का फोन घनघनाया और उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट फैल गई , उसके फोन की स्क्रीन पर एक संदेश आया था। मैत्री , उसकी बहुत ही क़रीबी और अज़ीज़ दोस्त , उसने संदेश भेजा था यह याद दिलाने के लिए कि जब वह उससे मिले तो अपने हाथ से बना खाना लेकर आये मैत्री के लिए। कर्ण मैत्री के संदेश के जवाब के बारे में बिना सोचे अपने रात के खाने के इंतजाम में लग गया , और फिर सुबह के लिए कोई बहाना खोजकर सो गया। कर्ण ने इस साल की दीवाली अपने घर , गाँव और बाकी लोगों के साथ बिल्कुल उसी तरह मनाई जिस तरह वह पिछले 7 सालों से मनाना चाह रहा था। मैत्री भी दीवाली तक अपने घर आ गई थी और ख़ुशी , प्रेम और दुलार का रंग ही रंग हर तरफ बिखरा हुआ दिखाई पड़ रहा था। दोनों ही लोग अलग अलग जगह , अलग अलग लोगों के साथ दीवाली मना रहे थे लेकिन उनक...

योजनाएं, हकीक़त और सरकार

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पेट्रोल और डीजल के दामों का घोर विरोध कर जनता का मन 2014 में पूरी तरह मोह लेने वाली सरकार के राज में दोनों की कीमतें पिछले 7 सालों में अपने उच्चतम स्तर पर हैं। कर वसूलने के नाम पर अंधाधुंध वसूली और लूट मचाने का सरकारी तरीका ईजाद किया है सरकार ने, केंद्रीय कर असल कीमत का 24-26% और राज्य कर 20-25%, लेकिन इन करों की उपयोगिता का कोई प्रमाण सरकार अब तक नहीं दे पाई है। न ही इनको जीएसटी से बाहर रखने का उचित कारण अभी तक जनता के सामने आया है। हाल ही में एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दाम फिर से इन्हीं सवालों को उठाते हैं कि क्या देश की इकोनॉमी का बढ़ता फिगर ही सब कुछ है, उसके आगे आम आदमी की जेब, मजदूरों की रोटी और किसानों की ज़िन्दगी कोई मायने नहीं रखती?                साल के पहले क्वार्टर में जीडीपी अपने ऊंचे स्तर पर पहुंची है जिसे सब के द्वारा देश का विकास सूचक करार दिया जा रहा है, तो फिर रुपए के गिरते दाम किस की तरफ इशारा कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब शायद सबके पास है लेकिन कोई भी उसे स्वीकारने को तैयार नहीं, रुपए और डॉलर के युद...