तेरी तारीफ़
हजारों साल पहले किसी ने लिखी थी चाँद पर कविता, अब वह बूढ़ा हो चला है । जब भी कभी निकलता है तारों की गठरी कांधे पर लिए उससे छुट जाती है आजकल, आसमान में किसी पत्थर की ठोकर से, और बिख...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।