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दिसम्बर

कहीं कम्बल को तरसता है कहीं रोटी के लिए लड़ता है, कभी उतर आता है सड़कों पर किसी निर्भया के इंसाफ़ के लिए, खंगाल लेता है सारे ही जोड़ 'गर झुलस जाता है कभी गैस से। टूट पड़ता है किसी नापा...

पता

मैं भविष्य को नकार दूँगा जब कोई लिखेगा मुझे ख़त, मेरा अतीत हर उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए आएगा; जहाँ मैनें कभी ठहरकर उसके वर्तमान के वर्तमान में, अपना पता छुपा दिया था।     ...

रिश्ता

किसी भी रिश्ते का अहम हिस्सा है कि आपने कितने ख़ुशी के पल एक दूजे के साथ बांटे हैं, वक़्त कितनी आसानी से हमें अजनबी से इतने गहन धागे में बांध देता है जिसका हमें पता भी नहीं लगत...

समय

कभी कभी मैं सोचता हूं कि ये दुनिया हमेशा से गोल नहीं थी, इंसान ने अपनी ज़रूरत से इसे गोल किया । वक़्त की जेल में बंद इंसान भविष्य की पूंछ पकड़े, अतीत की बेड़ियों में जकड़े, वर्...

समय छटपटा रहा है.....

तमाम गुनाहों के हिसाब जिस दिन को लिए जाएंगे कितने ही अछूते रह लें हम-तुम पर बच नहीं पाएंगे । सोचोगे तुम गर कि नहीं हैं खून में तुम्हारे ये हाथ तो, गुनाह तब हाथों के नहीं विचारो...