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दुनिया की जरूरतें

आया तो उड़कर एक ही पत्थर था, लेकिन उसने दो आंखों में अँधेरा और साथ की दस नज़रों में खून भर दिया। रास्ते तो लगे ही थे दस साल की पीठ पर टंगे बैग की हिफाज़त में, लेकिन अभी अभी इंसान से ...

मेरे तीसरे से पहले

आंखों की थकी पलकों पर सपनों की चिता सुलगने से पहले, उन्हें अपने बच्चों के रंगीन कपड़ों पर टांक देना पूरी नज़ाकत से, जिससे उसकी ख़ुशी वे ढूंढ सकें। होंठो पर आई प्यास के कारण ...