संदेश

वर्तमान लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वर्तमान का ख़्वाब -

चित्र
हम सारी ज़िन्दगी उस ख़्वाब के लिए अपनी नींदे ख़राब कर देते हैं जो हमने अब तक की सबसे गहरी और ख़ूबसूरत नींद में देखा था। नींद जागने से उतनी भी अलग नहीं होती जितना इसे बना दिया गया है: बल्कि नींद में आप अपने जीवन के उस हिस्से को नए सिरे से जीने लगते हो जिसको आप जागते हुए जीने की हिम्मत करने से बहुत डरते हो। इन सारी चीजों से जुड़े रास्ते बहुत बिखरे हुए से लगते हैं मुझको। एक दिन ऐसा आएगा जब यह बिखरते बिखरते उलझने लगेंगे और फिर हममें से किसी को भी अपनी मंज़िल कभी भी नहीं मिल पाएगी; और तब मैं किसी पेड़ के नीचे एक किताब हाथ में लिए मुस्कुरा रहा होऊँगा। उस दिन मैं अपने द्वारा जिये गए तमाम लम्हों को समेटकर उनकी गठरी को उस नदी में जाकर फेंक आऊँगा जिस नदी में पैर डुबोना मुझे सबसे ज्यादा सुकून देता है। इस उम्मीद को अपने होने के किसी कोने में छुपाये कि शायद ऐसा करने से मैं अपना अतीत मिटा सकता हूँ जिसमें वे बिखरे-उलझे रास्ते भी मिट सकें। और तब मेरे पास शेष रह जायेगा निरा वर्तमान; जो मेरा अपना है। इस वर्तमान को मैं उस लड़की के हाथों में हाथ रखकर जीना चाहता हूँ जिसे पिछले कुछ दिनों से मेरे फ़ोन कॉल का इंतज़ार र...

और दिसम्बर वसंत हो गया…

चित्र
Source - Bbc.com    गु लज़ार अपनी परीक्षाओं से समय निकाल कर हाल ही में एक संस्था से जुड़ा था जहाँ वह अपनी ट्रेनिंग की प्रक्रिया से गुज़र रहा था। गुलज़ार को अपने प्रशिक्षण के अंतिम दिन अपने मोबाइल फोन पर एक अपठित संदेश दिखाई पड़ा जो उसे तक़रीबन ४ घंटे पहले भेजा गया था। ख़ुशबू ने उसे यह कहने के लिए संदेश भेजा था कि वह कल 2 बजे के बाद अपने कामों से फ़ुरसत पा लेगी , जिसका सीधा सा मतलब यह था कि कल गुलज़ार और ख़ुशबू चार महीनों के इंतज़ार के बाद आख़िरकार मिल जायेंगे। गुलज़ार अपने आने वाले पर्चे की बची कुची तैयारियों को निपटाने में जुट गया ताकि इम्तिहान से जुड़े ख़याल उसकी और ख़ुशबू की मुलाक़ात में दखल - अंदाज़ी न करने पाए। अगले दिन सारे इंतज़ार और बेचैनियों के साथ गुलज़ार ख़ुशबू से मिला और दिल में दबे सारे अरमानों और किस्सों को उससे साझा किया , ख़ुशबू भी शायद इसी पल के लिए ख़ुद को थामे हुए थी एक बार जो उसने बोलना शुरु किया तो फिर सारी बातें करके ही दम लिया। चार महीने बाद की इस मुलाक़ात को यादगार और हसीं बनाने का कोई भी मौका न तो ख़ुशबू छोड़ने वाली थी और न ही गुलज़ार का ऐसा कोई इरादा था। वे दोनों उन सार...

हमारी जीवनशैली और दुनिया

चित्र
Source- Khabarindia.com यह ख़बर लगभग हर उस व्यक्ति को पता होगी जो खबरें पढ़ता है कि दिल्ली में १ से १० नवम्बर तक आपातकाल (प्रदुषण का आपातकाल) घोषित किया गया है क्योंकि वहाँ की हवा दुनिया की सबसे ख़राब हवा है जोकि न तो सुबह की सैर के लायक है और न ही एक गहरी साँस लेने के | इसका मुख्य कारण है आसपास के राज्यों में जलाये गए फसलों के अवशेष और वहाँ के वाहनों का धुआँ, फिर भी लोग केवल एक दूसरे पर आरोप लगाते दिखाई पड़ते हैं | जानकारी के लिए यह बता दूँ कि २ करोड़ की दिल्ली की आबादी के लिए १ करोड़ वाहन हैं, एकमात्र शहर जहाँ लोग स्टेटस के लिए निकल पड़ते हैं सड़कों पर बगैर यह सोचे कि कल क्या होगा!  हवा की खराब हालत को देखते हुए ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में केवल २ घंटे पटाखे जलाने का  आदेश दिया है और बाकि राज्यों से यह अपील की है कि वह कम से कम प्रदुषण की ओर कुछ कदम जरूर बढ़ाएं | Source-Bharatkhabar.com                          हर वह शख़्स जो इस अपील या आदेश जिस तरह भी इसे देखते हैं, यह जान लें कि केवल...

पता

मैं भविष्य को नकार दूँगा जब कोई लिखेगा मुझे ख़त, मेरा अतीत हर उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए आएगा; जहाँ मैनें कभी ठहरकर उसके वर्तमान के वर्तमान में, अपना पता छुपा दिया था।     ...

-- नोट्स ::

मुझे छुट्टियां कभी भी अच्छी नहीं लगी, छुट्टियों का मतलब आमतौर पर बच्चों या किसी भी वयस्क के लिए आराम करना या मौज करना होता है । मैं हमेशा से छुट्टियों का मतलब यह समझता आया हू...

ज़िन्दगी

वक़्त एक साधारण रेलगाड़ी है जिसमें यात्रा का एक ही विकल्प होता है, लेकिन आदमी बहुत डरा हुआ है उसे यहां भी ज्यादा विकल्प चाहिए, कम से कम तीन तो चाहता ही है । जिसे जीना है गुज़र...