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दीवाली, धोखा और खुशख़बरी

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Source - Homeenergymd.com क र्ण अपनी बर्थ पर लेटा हुआ था और किसी किताब के पन्नों पर लिखे शब्दों को बिना रुके पढ़ता चला जा रहा था , वह किताब उसने स्टेशन से चलते वक़्त शुरु की थी कुछ 6 घंटे पहले। रात के आठ बज रहे थे और ट्रेन किसी स्टेशन के आउटर पर खड़ी अपने सिग्नल की बारी का इंतज़ार कर रही थी , तभी कर्ण का फोन घनघनाया और उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट फैल गई , उसके फोन की स्क्रीन पर एक संदेश आया था। मैत्री , उसकी बहुत ही क़रीबी और अज़ीज़ दोस्त , उसने संदेश भेजा था यह याद दिलाने के लिए कि जब वह उससे मिले तो अपने हाथ से बना खाना लेकर आये मैत्री के लिए। कर्ण मैत्री के संदेश के जवाब के बारे में बिना सोचे अपने रात के खाने के इंतजाम में लग गया , और फिर सुबह के लिए कोई बहाना खोजकर सो गया। कर्ण ने इस साल की दीवाली अपने घर , गाँव और बाकी लोगों के साथ बिल्कुल उसी तरह मनाई जिस तरह वह पिछले 7 सालों से मनाना चाह रहा था। मैत्री भी दीवाली तक अपने घर आ गई थी और ख़ुशी , प्रेम और दुलार का रंग ही रंग हर तरफ बिखरा हुआ दिखाई पड़ रहा था। दोनों ही लोग अलग अलग जगह , अलग अलग लोगों के साथ दीवाली मना रहे थे लेकिन उनक...

प्रेम और ख्वाहिशें

कौन चाहता है कि चाँद किसी रात आसमान छोड़ कर छुप जाए; किसी गहरी पहाड़ी के पीछे, मैं उसके बालों को देखता हूँ तो चाहता हूँ कि ये ख़्वाब सच हो. दुनिया में पल रहे सारे सवाल इकठ्ठा करके मैं, उनको उसकी हँसी सुनाना चाहता हूँ: उसके मुस्कुराने भर से दिक्कतें हल हो जाया करती हैं. प्रेम में घूम रहे ब्रम्हांड के सारे ग्रह एक दिन आकाशगंगा में विलीन हो जाने का ख़्वाब देखते हैं, और मैं चाहता हूँ कि निहारता रहूँ उसके चेहरे को अपने विघटन के आख़िरी क्षण तक, लिख दूँ उसके लबों पर एक कविता प्रेम की बूँद के खप जाने से पहले, वक़्त को उसके लौटने तक रखूँ बगीचे के नए उगते गुलाब के नीचे, सुना है वक़्त में अधूरी छुट गई ख्वाहिशें नई ज़िन्दगी की शुरुआत बनकर लौटती हैं. -        कमलेश

तुम

तुम, इसके सिवा कोई शब्द क्यों नहीं है दुनिया में कि जिसके उपयोग से तुम्हारे संबोधन को चरितार्थ करूँ मैं! तुम्हारा अस्तित्व उस नीम के पेड़ सा है जिसे मैं अपनी सेहत, सीरत और आरा...

ख़्वाहिश

कॉलेज के गेट से स्कार्फ बांधे निकली लड़की, और स्टेशन के ओवरब्रिज की सीढ़ियाँ अनमनेपन से चढ़ रहा लड़का, ज्यादा कुछ नहीं केवल किसी बिंदू पर पहुँचकर, फिर मिल जायेंगे ऐसा चाहते है...