संदेश

वादा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रकृति का वादा - तुम

चित्र
प्रकृति के मूल सिद्धांतों में जुड़ाव निहित है, इसके वचनों से हर कोई भीगा हुआ है वह भी जिन्हें वादों से दूर रहना भाता है। ज़िन्दगी के लम्हों को गुज़ारते हुए एक दिन ऐसे ही प्रकृति का कोई नियम अपने चेहरे पर से पर्दा हटा सामने आ जाता है और फिर उसकी ख़ुमारी से निकलने का वक़्त ही नहीं रहता इंसान के पास। मैंने जब पहली बार तुम्हें देखा था तो मुझे महसूस हुआ कि कोई अनकहा वादा लौट आया है मुझ तक जिसे पूरा करना जीवन के निश्चित मकसदों में से एक है। तुम्हारे साथ ऐसा लगता है कि प्रकृति के साथ मेरा रिश्ता गूढ़ होता चला जा रहा है। प्रेम की परिभाषा के परे मैं महसूसना चाहता हूँ वे सारे क्षण जिनमें लिखी गईं हैं कुछ खामोशियाँ और अनगिनत एहसास। जीवन के जिस अंदाज़ से तुमने मेरा परिचय करवाया है उसे अकेले देख पाना संभव तो है किंतु सहज नहीं। वक़्त की डोर को थामे हुए अब लगने लगा है कि साधन नहीं साध्य महत्त्वपूर्ण है; मेरे जीवन के अघटित पहलुओं को तुम्हारे प्रेम से मायने मिलने की आस है और ख़ुशी भी। मुलाक़ातों के बोझ से दूर मैं चाहता हूँ कि हृदय के रास्ते हम एक-दूजे की खोज ख़बर रख पाएँ। तुमसे मिल जाना इस तरह जीवन के...

एक एहसास

बरसात के पहले और बाद धूप का होना एक सा नहीं होता, तेरा आना तेरी याद के बाद और फिर से लौट जाना, लेकिन एक सा ही लगता है । उड़ते रहना किसी पक्षी का खुले आसमान में बादलों के बीच, आज़ा...

-- नोट्स ::

- मैं उम्र भर तुम्हारा इंतज़ार कर सकता हूं । - उसकी कोई ज़रूरत नहीं है । - मैंने कोई वादा तो नहीं किया तुमसे । - मुझे कोई वादा चाहिए भी नहीं । वादा इंतज़ार से कोई सरोकार नहीं रखता, ...