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प्रकृति का वादा - तुम

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प्रकृति के मूल सिद्धांतों में जुड़ाव निहित है, इसके वचनों से हर कोई भीगा हुआ है वह भी जिन्हें वादों से दूर रहना भाता है। ज़िन्दगी के लम्हों को गुज़ारते हुए एक दिन ऐसे ही प्रकृति का कोई नियम अपने चेहरे पर से पर्दा हटा सामने आ जाता है और फिर उसकी ख़ुमारी से निकलने का वक़्त ही नहीं रहता इंसान के पास। मैंने जब पहली बार तुम्हें देखा था तो मुझे महसूस हुआ कि कोई अनकहा वादा लौट आया है मुझ तक जिसे पूरा करना जीवन के निश्चित मकसदों में से एक है। तुम्हारे साथ ऐसा लगता है कि प्रकृति के साथ मेरा रिश्ता गूढ़ होता चला जा रहा है। प्रेम की परिभाषा के परे मैं महसूसना चाहता हूँ वे सारे क्षण जिनमें लिखी गईं हैं कुछ खामोशियाँ और अनगिनत एहसास। जीवन के जिस अंदाज़ से तुमने मेरा परिचय करवाया है उसे अकेले देख पाना संभव तो है किंतु सहज नहीं। वक़्त की डोर को थामे हुए अब लगने लगा है कि साधन नहीं साध्य महत्त्वपूर्ण है; मेरे जीवन के अघटित पहलुओं को तुम्हारे प्रेम से मायने मिलने की आस है और ख़ुशी भी। मुलाक़ातों के बोझ से दूर मैं चाहता हूँ कि हृदय के रास्ते हम एक-दूजे की खोज ख़बर रख पाएँ। तुमसे मिल जाना इस तरह जीवन के...

किस्सा -१ -- अंतहीन यात्रा

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ट्रेन के ब्रेक अचानक लगने से उसकी नींद खुली, शायद कहीं बियाबान में रुकी थी कोई जानवर रहा होगा. हो भी क्यूँ न! आजकल हर कोई बस जानवरों सा ही दीखता है और व्यवहार करता है. उसने उठकर अपनी घड़ी देखी, स्टेशन आने में अभी २० मिनट बचे थे. थोड़ी देर बगल में झाँकने के बाद उसे लगा कि उसका सिर दर्द से फटा जा रहा है, लेकिन उसे कोई उपाय नहीं सुझा; सूझता भी क्या उसे बस यात्रा के ख़त्म होने का इंतज़ार था, लेकिन यात्रा तो बस बगैर उसके एहसासों की परवाह किये चली जा रही है. कौन जाने, यह कब और कहाँ ख़त्म होगी! - कमलेश 

सुनो दोस्त!

मनु के लिए - (14-जुलाई-2019) कुछ रिश्ते नदी में बहते फूलों की तरहा होते हैं, मैं बहकर आ गया तुम तक ऐसी ही एक आनंदमयी लहर के साथ, तुम्हें देखकर लगा नहीं मुझे कि मिला हूँ तुमसे मैं सिर्फ क...

संवाद – बात से साथ का सफ़र

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       इस दुनिया को कान की ज़रूरत है          लेकिन हर कोई बस बोलना चाहता है... यह कथन दो तरीकों से किस तरह देखा जा सकता है, बस उस देखने के तरीके की प्रक्रिया का नाम संवाद है. हर किसी के पास इतनी कहानियाँ है कि लिखते लिखते सारे पन्ने भरे जा सकते हैं और हर कोई उतना ही उत्सुक और आतुर है कि किसी और की कहानी सुनने के लिए उसके पास धैर्य नहीं है. ज़िन्दगी की राहों से पनपती कहानियाँ और उनसे जन्म लेते हुए हर पल के किस्से और किस्सों से उपजा खालीपन, मानसिक असंतुलन इतना बढ़ जाता है कि इंसान भूल जाता है उसे जीना किस तरह है!       संवाद की प्रक्रिया में ठहराव और स्थिरता है ज़िन्दगी की रफ़्तार को समझने के लिए वक़्त प्रदान करती हुई. कानों और दिमाग को कितने आराम की ज़रूरत है इस बात का ख़याल शायद उम्र भर किसी को नहीं आता क्योंकि हर कोई, बस रोज़ भागने वाले हाथ और पैर को आराम देना चाहता है. संवाद की शुरुआत जिस मौन के साथ हुई उसने मुझे इस बात का सन्देश दिया कि अभी मेरे पास काफी वक़्त है जो मैं अपने सवालों के साथ बिता ...

आईना देखो – ख़ुद से एक मुलाक़ात

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इन्कलाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो, बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं..                                         -अली सरदार जाफ़री                                    कितनी खूबसूरती से जाफ़री साहब ने बदलाव की गति को भी परिभाषित कर दिया अपने इस शेर में, जब सफर शुरु होता है किसी बदलाव का तो आरम्भ बड़ा ही पेचीदा और अनसुलझा हुआ दिखाई पड़ता है लेकिन जरुरत होती है उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त गुजारने की. यह वक़्त मेरी ज़िन्दगी में आया आईना देखो के रूप में, मेरा गाँव मेरी दुनिया के साथ जब इस यात्रा का हिस्सा बना था तब केवल यही मन में था कि सीखने की यह यात्रा ऐसे ही अनवरत चलती रहे और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनकर में कितन...

कार और चार सवारी

धान से घिरी हुई एक संकरी सी सड़क पर एक कार धीमे धीमे रेंग रही थी, शायद चालक रेंगना चाहता था या फिर उसके साथी इसलिए सब कार में बैठकर रेंग रहे थे, रेंगना धीमे चलने का पर्याय नहीं ह...

कहानी ( सामान्य से शून्य )

सुबह के चार बजे शशांक बिस्तर से निकलकर छत पर जाकर टहलने लगा, वह शायद किसी सपने से जाग गया था ऐसा उसकी आँखों को देखने पर अनुमान लगाया जा सकता था | पूरी रात बिस्तर पर माहौल से अनभि...