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कविता २ (इंतज़ार)

छाई है ख़ामोशी इस कमरे में जहाँ तुम छोड़ गए अपनी अनुपस्थिति, मैं कर रहा हूँ अभी भी वो सारी बातें जो हो रही थी उपस्थितियों के क्षणों में; ढूँढ रहा है बिस्तर पर गिरा हुआ एक आँसू कि ...