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मैं और तुम

वक़्त चल दिया है भागीरथी सा मेरे दिल की गंगोत्री से, नासमझ देखता नहीं पलटकर नहीं तो जान जाता, कैसे बिखरा था हिमालय हजारों साल पहले गंगा उद्गम के समय । कोशिशें कई हुई है तेरे ...

भगवान् होने के लिए. . .

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  Source - How.fn कोई हलचल तो होगी इस विरान बियाबान में, कोई कोयल तो कूकेगी जीवन के इस उपवन में, उल्लास निरंतर आएगा मायूसी समेटे आँगन में, रोशनी का उत्सव होगा अंधेरे पर श्री के बाद, खुशी जन्म लेगी फिर दुख के निर्वाण के लिए, घर को त्याग कोई जाएगा पिता की प्रतिष्ठा के लिए, हलाहल का पान करेगा वो समूचे जग के हित को, राधा भी विरह में तड़पेगी प्रेम की अमरता के लिए, कोई अवतरित होगा यँहा खुद भगवान् होने के लिए ।                            .....कमलेश.....

ईश्वर - एक परम सत्य

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एक रचना इस सृष्टि के निर्माता को लेकर, जिससे आज की दुनिया मे हर शख्स बहुत दुर जा चुका है । इस कविता से आपको हकीकत से अवगत कराने का प्रयास किया गया है ।