मैं और तुम
वक़्त चल दिया है भागीरथी सा मेरे दिल की गंगोत्री से, नासमझ देखता नहीं पलटकर नहीं तो जान जाता, कैसे बिखरा था हिमालय हजारों साल पहले गंगा उद्गम के समय । कोशिशें कई हुई है तेरे ...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।