संदेश

दूरियाँ लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अतीत की खिड़की में - १

चित्र
Source - Shutterstock.com सि तंबर एक ऐसा महीना है जिसमें यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि अगले पल क्या हो सकता है या फिर यही उत्सुकता कोई चोट खाकर हमेशा के लिए कोने में दुबककर बैठ जाती है। हीर को अपना शहर छोड़े 20 दिन हो गए थे और वह अब तक अपनी नई जगह पर बहुत ही अच्छे से रच बस गई थी , लेकिन हीर ने एक काम को उतनी ही शिद्दत से करना जारी रखा और वह था अपने कामों से इश्क़ और सागर का ख़याल। सागर से पहली बार मिले तीन महीने बीत चुके थे लेकिन अब भी वह मुलाक़ात कल ही घटित हुई किसी ताज़ी घटना सी लगती थी। सितंबर सागर के लिए ढेर सारी सौगातें लेकर आया हुआ था और उसी की आवभगत के चलते सागर को बहुत ही कम समय मिल पा रहा था , अपने दिल की बातों को हीर से हर्फ़ दर हर्फ़ साझा कर देने के लिए। आधा बिता हुआ सितंबर जो ठंडक और उमस देता है उससे फरवरी और अप्रैल के मिले जुले मौसम का माहौल बन जाया करता है , ज़िन्दगी भी ऐसे ही किसी आधे सितंबर में हमें उठाकर कभी फरवरी तो कभी अप्रैल के अनुभव करवाती है।                     सा...

कविता २ (इंतज़ार)

छाई है ख़ामोशी इस कमरे में जहाँ तुम छोड़ गए अपनी अनुपस्थिति, मैं कर रहा हूँ अभी भी वो सारी बातें जो हो रही थी उपस्थितियों के क्षणों में; ढूँढ रहा है बिस्तर पर गिरा हुआ एक आँसू कि ...

तीन कविताएँ

1. पानी से भरी एक पतीली को मैं देखे जा रहा हूँ आँखें गढ़ाकर, तुम मेरी आँखों के प्रतिबिंब के भी तीन कदम पीछे आकर खड़ी हुई; तुम्हें देखते रहना पानी में थोड़ा-थोड़ा ज्यादा सुकूनदायक ल...

कुछ बातें और

चित्र
बहुत मुश्किल होता है चंद घड़ियाँ साथ बिताकर सारी यादों को सुनहरा कर लेना, आधा वक़्त तेरी सूरत को निहारने, लटों को गालों से परे हटाने हाथों पर हाथों से कुछ भी लिखने, और पैरों के अंगूठों की झूठी लड़ाई में गुज़र जाता है हमारा । गरियाने के लिए बातों का गठ्ठर, एक दिन पहले वाली फ़ोन कॉल पर होता है बस, जो मिलने आते-आते कहीं खो जाता है, और बचती है केवल खामोशियाँ । सारी निजताओं को अचानक से परे फ़ेंक, जब लिपट जाया करते हैं एक-दूजे से हम, उन नज़दीकियों में जहां केवल हम होते हैं, तब ये महसूस होता है कि इनसे बढ़कर कुछ नहीं । Source - Flickr कुछ वायदे और आरज़ू कुछ आश्वासन और बेमतलब के झगड़े, जब बिखरने लगते हैं हमारे इर्द-गिर्द तो कोशिश यही होती है कि इन्हें जल्द समेट लिया जाए, ताकि हम लौट सकें अपनी पूरानी दुनिया में पहले की तरह, लेकिन इन यादों के साथ जीने के लिए अगली मुलाक़ात के इंतज़ार में ।                             ...

प्रेम और बदलाव

आकर्षण के सिद्धांत के अनुसार कोई भी दो चीजें एक निश्चित दूरी तक ही एक दूजे के क़रीब रह सकती है, यह नियम सारे रिश्तों को बांधे हुए है और यह दुनिया अब तक इस डर में जी रही है कि अत्य...

इबादत

बेवक़्त की बारिश ने आज सारे ज़ख्मों को धोया, बदलियाँ स्वागत में जुटी है, हवाओं ने अभी अभी एक ख़त पहुँचाया, जिसे आसमान ने चीख-चीखकर पढ़ा, ख़बर है कि तुम आने वाले हो । इतनी जल्दी भी क्या है वैसे ? मुझे तसल्ली से नशा करने दो इस जवान होते इश्क़ का, देख लेने दो जी भरकर इंतज़ार में तड़पते रिश्ते को, जान लेने दो मुझको ख़्वाबों में छिपे सब राज़ । खोद लेने दो एक खूबसुरत कब्र प्रेम में मौत के बाद, सुकून से दफ़न होने के लिए । तुम्हें पसंद है हवाओं की सादगी, और मुझे मोहब्बत है बेगानेपन से; तुम्हारी हसरत है बाद बारिश के साथ मेरे शामें गुज़ारने की, मैं चाहता हूँ कि आसमां रोता रहे उम्रभर ज़मीन से अपने इश्क़ में । कितनी अजीब है हमारी इबादत की तरकीबें ? तुम सवेरे-सवेरे खोजती हो घर में पूजा का कोना, मैं सुबह इबादत की बजाय तुम्हारे साथ चाय पीना चाहता हूँ ।                                   -- कमलेश

आजकल में

शिकायतों के चेहरे पर एक नया नूर दिखने लगा है, पिछले कुछ दिनों में उन्होंने बगावत की सारी तैयारियां कर ली हैं । तुम चाहती हो कि शिकवे ना रहें और मुझे इनकी बगावत में दिलचस्पी ...

कुछ तुमने कुछ मैंने ...

दर्द के किस्से सुनाए कुछ तुमने कुछ मैंने, फिर सिसकियाँ सुनी कुछ तुमने कुछ मैंने । सारी तकलीफों की नुमाइशें करते करते, कई आँसू भी गिराए कुछ तुमने कुछ मैंने । देखा जब ज़ख्मों ...