क्यूं नहीं.........अगर मैं
क्यूं प्यास ना बुझाई जाए अगर मैं समन्दर को पी सकता हूं, क्यूं सोया जाए जबरन गर मेरी आंखे तारों को देखना चाहती है, क्यूं बिखेर कर समेटा जाए किसी को अगर मैं कुछ संवारने की ताकत ...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।