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आईना देखो – ख़ुद से एक मुलाक़ात

इन्कलाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो, बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं..                                         -अली सरदार जाफ़री  

कितनी खूबसूरती से जाफ़री साहब ने बदलाव की गति को भी परिभाषित कर दिया अपने इस शेर में, जब सफर शुरु होता है किसी बदलाव का तो आरम्भ बड़ा ही पेचीदा और अनसुलझा हुआ दिखाई पड़ता है लेकिन जरुरत होती है उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त गुजारने की. यह वक़्त मेरी ज़िन्दगी में आया आईना देखो के रूप में, मेरा गाँव मेरी दुनिया के साथ जब इस यात्रा का हिस्सा बना था तब केवल यही मन में था कि सीखने की यह यात्रा ऐसे ही अनवरत चलती रहे और बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनकर में कितना कुछ दोहरा सकता हूँ उन सारे कर्मों को जिन्होंने मेरी ज़िन्दगी को सँवारा है. बहुत कठिन होता है कि अनिश्चितताओं से भरे माहौल में आप काम कर पाओ लेकिन मैंने आईना देखो के माध्यम से सीखा कि अनिश्चितताएं हमारी कितनी अच्छी दोस्त हो सकती हैं! जब हम अपनी ख्वाहिशों को दरकिनार करना शुरु करते हैं वे सारी ख्वाहिशें जो केवल साधन हैं, तब हमें वह प्राप्त होना प्रारम्भ होता है जिसकी हम अपने संकुचित दायरे में सिमट कर कभी भी कल्प…

वाकये, चुनाव और हम

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1. यह यमुना है, हाँ जी इस देश के 100 करोड़ से ज्यादा लोगों की यमुना मईया, जिसका पानी अभी ऐसी हालत में है जिसको पीना तो दूर छू लेने भर से आपको चर्म रोग और स्किन कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। एक तरफ हम इसकी माँ मानकर पूजा करते हैं और उसी पूजा के अंत में इसमें बेतहाशा कूड़ा करकट डाल देते हैं, तो जी यही है क्या शास्त्रों में पूजा का विधान?  भारतीयों के कर्मों और प्रकाण्डों ने जितना नुकसान प्राकृतिक संसाधनों को पहुँचाया है उतना बाकी चीजों ने नहीं। 2. हाल ही में दिल्ली में SEE के 3 दिवसीय लोकार्पण समारोह में पिछले 5 सालों से उसके लिए अथक प्रयास कर रहे दलाई लामा और उनकी टीम दिल्ली में थी, जिन्हें समारोह की समाप्ति के बाद प्रदूषण से उपजे संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
3. दिसम्बर में एक टीबी के मरीज़ को दिल्ली के एक नामी अस्पताल से डॉक्टरों ने 1 महीने तक जानबूझकर छुट्टी नहीं दी, क्योंकि डॉक्टरों का कहना था कि वह मरीज़ अगर अस्पताल से बाहर गया तो उसकी जान जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा, वजह दिल्ली का प्रदूषण। ऐसे अनगिनत वाकये हैं जिन्हें अगर हम देखें तो रूह काँप जाएगी। प्रदूषण दिल्ली मे…

अभिव्यक्ति व्यर्थ है और व्यर्थ हैं परिभाषाएं सारी

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कुछ रातें ज़िन्दगी का आईना सामने रखती हैं। जब मैंने तुम्हें देखा अपने क़रीब बैठे हुए तो मैंने जाना कि प्रेम सबसे ताकतवर और असरदार हथियार है किसी भी लम्हें में ख़ुद को जी लेने के लिए। तुम प्रेम हो यह बात मैंने तब जानी, जिस दिन तुमने मुझसे कहा था कि हमारा रिश्ता प्रेम की बुनियाद पर खड़ा है। तुम्हें रखना किसी दिन के आठों पहर अपने सामने और खो देना तुमको ठीक अगले ही दिन ख़ुद में से, यह और कुछ नहीं मेरे प्रेम में डूबने के मार्ग को आसान बनाता है। मैंने यही चाहा है हमेशा कि प्रेम में खोकर, सब कुछ ही खो दिया जाये, प्रेम को भी! लेकिन मैं नहीं जानता यह कथन कितना सत्य है!
जब तुम बातें करती हो, कई नदियों, जंगलों, शहरों और पर्वतों के पार से, तो मुझे कालिदास की याद आ जाती है। तुम कालिदास के लिए सदैव अकल्पनीय ही रही, केवल मुझे ही अब तक तुम्हें प्रकति के प्रेम के ज़रिए ख़त लिख सकने का सुख प्राप्त है। तुम्हें ढूँढना उगते हुए सूरज में, मुझे पंछियों की चहचहाहट से दूर नहीं करता। किसी रेगिस्तान में मैं तुम्हारी ख़ुशबू के क़रीब चला आता हूँ उसकी रेत को अपने हाथों में थाम लेने भर से। कोई भी किस्सा जो बयां कर सके हमें…

मैं वहीं हूँ

मैं वहीं हूँ,
जहाँ लेते हो तुम साँस
जहाँ उठकर देखी धूप तुमने,
हूँ वहीं उस छुअन में मैं।
जब जब चले तुम्हारे कदम धरा पर,
तब तब पाया है मैंने अपने पैरों में धूल को चिपके हुए;
हूँ वहीं उस जल मैं,
जिसे पिया है तुमने हर प्यास में;
मैं नहीं कहीं भी इस धरा पर,
वहीं हूँ जहाँ रखे हैं ख़्वाब तुम्हारे।मैं हूँ हर उस पल और शख़्स में,
जहाँ तुम हँसे और
किया है प्रेम तुमने बंदिशों से परे;
मैं वहीं हूँ,
जहाँ लेते हो तुम साँस
जहाँ उठकर देखी धूप तुमने,
हूँ वहीं उस छुअन में मैं।
                              - कमलेश

२१ साल और बातें

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कई दफ़ा हम नहीं जान पाते कि हम कैसे जी रहे हैं लेकिन जब हमें बिन ढूँढे इस सवाल का जवाब मिल जाता है तो ऐसा लगता है कि हमसे ख़ुशकिस्मत इंसान इस दुनिया में नहीं है. आप कहीं भी रहो, आप कभी भी अकेले नहीं रहते आपके साथ आपका अनुभव, आपकी रिवायतें, आपके रिश्ते, आपका परिवार और आपका प्रेम जैसी कई चीजें आपके साथ रहती हैं. मैं पिछले कुछ दिनों में इन बातों को और बेहतर तरीके से जानकर आत्मसात कर पाया हूँ क्योंकि मैं एक ऐसे वातावरण का हिस्सा रहा हूँ जिसने मुझे ख़ुद के प्रति थोड़ा और दयावान होने की प्रेरणा दी है. मेरे जीवन के २१ सालों में मैंने अपने वातावरण और इस जीवन से कितना प्रेम किया है यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मैं क्या सीख सकता हूँ इस प्रेम, विश्वास और समर्पण से उपजे मेरे जीवन से, यह ज्यादा स्पष्ट दीखता है मुझे. जब मैं अपने प्रियजनों से कई मील दूर अपने आपको टटोलने में वयस्त था तब यही प्रियजन मुझे मेरे जीवन के अनमोल क्षण का अनुभव देने की कोशिश में लगे हुए थे, जब आप ख़ुद को भूलकर कुछ करने की कोशिश करते हो तो आपके कई सारे काम या ज़रूरतें आपकी मोहताज नहीं रह जाती, उन्ह…

तुम्हारी आँखें

तेरे दीदार से उपजी बेफ़िक्री के बाद,
हम नहीं देखते कि लोग क्या देखते हैं।
                                                 - नागेश
ये पंक्तियाँ उतनी ही सार्थक होती हैं जब तुम्हें अपने नज़दीक पाता हूँ मैं, जितनी कि इस दुनिया में जीवन की हकीक़त। मुसलसल चल रहे कितने ही ख़यालों और चिंताओं का सफ़र एक पल में ख़त्म हो जाता है, जब तुम्हें अपनी ओर आते हुए देखता हूँ मैं। जितना कुछ भी लिखा या पढ़ा गया है इश्क़ की इबादत में, या तुम्हारी तारीफ़ों में उसे एक दिन उन्हीं कागज़ों में चूर होकर मिट जाना है। जो कसीदे पढ़े या गढ़े गए दिलों की ख़्वाहिशों पर वे भी एक दिन बूढ़ाकर शमशान का रूख़ करना चाहेंगे। जब तुम पास होती हो तो मेरी बातें तुमसे नहीं होती, तुम्हारे जिस्म का हर क़तरा बतियाने पर उतारू हो जाता है। इश्क़ एक किताब है जिसे मैं अपने सवालों के जवाब न मिलने की चाहत लिए पढ़ता हूँ। तुम्हारे काँपते हाथों से तुम्हारे लिखे को पढ़ना तुमने मुझे छू कर उतना ही सरल और सहज कर दिया जितना कि एक दो साल के बच्चे के लिए 'माँ' शब्द को कहना हो जाता है।
         ख़ामोशी की उम्र कितनी है यह आज तक कोई जान नहीं पाया, शायद ये ब्रम्हां…

खोज

कोई नहीं देख पाता सालों तक कि वह क्या ढूंढ रहा है, मैंने पाया तुम्हें तो जान पाया कि मैं तुम्हारी हकीक़त का पीछा कर रहा था। तुम दिखती हो बोधिवृक्ष सी जिसके तले पहुँचकर मैं बुद्घ सा वैराग नहीं, कृष्ण सी मुहब्बत चाहता हूँ। दुनिया ढूँढ रही है समस्याओं का हल क्रांतियों और आंदोलनों में, मुझे लेकिन तुम्हारे बगल में बैठकर सोचना कि प्रेम ही सारी बातों का समाधान है, अत्यधिक सुकूनदायक लगता है। मैं नहीं कहूँगा कि तुम प्रतीत होती हो किसी रिश्ते सी जो ज़िन्दगी को ख़ुशियों से भर दे, मैं नहीं बताउंगा किसी को भी तुम्हारा पता, क्योंकि मैंने उसे जानने की कोशिश नहीं की अब तक। मैं केवल तुम्हें पूरे रास्ते मेरे दाईं ओर चलते देखना चाहता हूँ, ताकि बिस्तर के कोने से खींचकर तुम्हें वर्तमान की क्रिया बनाकर रख सकूँ।
                      तुमने मुझे दिया अपना वक़्त तो मैं जान सका कि मैं कई बार कितने ही रिश्तों को वक़्त नहीं दे पाया। मैंने रखा अपना सिर तुम्हारी गोद में तो मुझे पता चला कि क्यूँ एक प्रेमी अपनी प्रेमिका में माँ तलाशने की गलती करता है। तुमने मेरे माथे को अपने हाथों में लेकर मुझसे जताया कि मैं पिछले 11 साल…