मैं वहीं हूँ
मैं वहीं हूँ, जहाँ लेते हो तुम साँस जहाँ उठकर देखी धूप तुमने, हूँ वहीं उस छुअन में मैं। जब जब चले तुम्हारे कदम धरा पर, तब तब पाया है मैंने अपने पैरों में धूल को चिपके हुए; हूँ वह...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।