समय छटपटा रहा है.....
तमाम गुनाहों के हिसाब जिस दिन को लिए जाएंगे कितने ही अछूते रह लें हम-तुम पर बच नहीं पाएंगे । सोचोगे तुम गर कि नहीं हैं खून में तुम्हारे ये हाथ तो, गुनाह तब हाथों के नहीं विचारो...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।