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इतिहास, दोहराव और बदलाव

प्रेम में चीज़ें स्थिर होने लगती है लेकिन अगर उन्हें बदलने की जुगत भिड़ाई जाए तो वे टूट जाती है, प्रेम को बदलाव पसंद है इसके बावजूद भी प्रेम हमें स्थिरता प्रदान करता है । प्...

क्यों

अग्नि परीक्षा की ज्वाला में जलती हर बार सीता ही क्यों, देती है स्वयं जलकर अपने होने का प्रमाण क्यों । भय के समाज से तजता है राम उसको, कितने ही वचनों को तोड़ रघुकुल की रीति निभ...

सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई ......

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  Source - BhaktiGaane.in सोने की एक चिड़िया रहती थी कहीं खो गई, औरत एक देवी बनकर रहती थी कहीं खो गई । नफरत भर गई है सब की रगों में यहाँ पर, जुबाँ वो प्रेम को बोलती थी कहीं खो गई । कोई किसी का दर्द नहीं पहचानता अब, जटायु की आत्मा रहती थी कहीं खो गई । यमराज से दिखते हैं मुझे देश के नेता अब, रामराज से दिशाएं गूंजती थी कहीं खो गई । अब तो बैर हो गया है गरीबों से अमीरों का, कृष्ण सुदामा की दोस्ती रहती थी कहीं खो गई । मात्र एक छलावा बना दिया है आज प्रेम को, राधा श्याम की मोहब्बत रहती थी कहीं खो गई । काले कारनामों से वतन पर मेरे दाग लगा दिए, विश्व गुरु जैसी इक छवि होती थी कहीं खो गई ।                                                                          ...