तुम और वेदांत दर्शन .....
तुम मेरे वेदांत दर्शन का, वह मूल प्रश्न हो जिसका उत्तर जानने पर, मैं समूचे ब्रम्हांड को जान सकूंगा । तुम सच्चिदानंद की वह अवस्था हो, जिसमें खुद को खोकर मैं सब कुछ पा सकता हूँ ...
जिंदगी की राहों से गुज़रते हुए अपने कुछ अनुभव साथ लिए चल रहा हूँ, यहाँ मेरे अन्तर्मन से उपजे प्रेम, समाज, जिंदगी, देश आदि के बारे में विचारों को आप पाएंगे ।