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समय छटपटा रहा है.....

तमाम गुनाहों के हिसाब जिस दिन को लिए जाएंगे कितने ही अछूते रह लें हम-तुम पर बच नहीं पाएंगे । सोचोगे तुम गर कि नहीं हैं खून में तुम्हारे ये हाथ तो, गुनाह तब हाथों के नहीं विचारो...

पाँच कवितायें

1. हिंदी - वर्तमान समय में मातृभाषा हिंदी के हालात को देखते हुए, ऐसा लगता है कि हमारी भाषा को अब एक अदरक वाली, कड़क चाय की ज़रूरत है ।                           2. तीन, दो, पाँच - पिछले ...