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दुनिया की जरूरतें

आया तो उड़कर एक ही पत्थर था, लेकिन उसने दो आंखों में अँधेरा और साथ की दस नज़रों में खून भर दिया। रास्ते तो लगे ही थे दस साल की पीठ पर टंगे बैग की हिफाज़त में, लेकिन अभी अभी इंसान से ...

हमारा जीवन

वक़्त और मौत मेरे विश्वास, और तुम्हारे प्रेम को इतना कमज़ोर कभी भी नहीं बना सकते कि हम उठ न सकें, मुक्त न कर सकें किसी को उसके जीवन से, जीवन की मुक्ति केवल देह से रूठकर चले जाने म...

अन्तिम इच्छाएं

ख्वाहिशों का जेहन में होना शाश्वत क्रिया होती है, और सांसें इच्छाओं पर होने वाली महज़ एक प्रतिक्रिया का रूप, कोई सांस लेना छोड़ भी दे तो वह मर नहीं जाएगा, पर जब इच्छाओं का अं...

देश और मौतें

कोई सत्तर बरस पहले गोडसे ने खुद को मार लिया था, तब लोग मिठाइयां बांट रहे थे और कर रहे थे जान बूझकर अनजान होने की कोशिश । फिर शुरु हुआ मौतों का दौर साल दर साल लोग मरते रहे, कभी धर...