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मैं और मेरा प्रेम

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 दुनिया में अनगिनत सवालों और परेशानियों के बीच मैं समझ पाया केवल दो बातों को. पहली कि ज़िन्दगी और विश्वास एक न दिखाई देने वाले अटूट धागे में जुड़े हुए हैं जो मेरे अंतस से पनप कर दुनिया में आता है; मैं चाहे कितना भी बाहरी जोर लगाऊं उसे महसूसा नहीं जा सकता बल्कि उसे मैं अपनी अंतस की खोज की यात्रा में सलीके से चख पाता हूँ. दूसरी यह कि प्रेम जीवन के तत्वों का सार है. मेरा पता लिए आस्था, भक्ति, जप, तप की अनगिनत कहानियाँ और प्रतिमाएँ आई किन्तु मैं सिर्फ प्रेम में ख़ुद से मिल पाया. यह कोई एहसास या रिश्ता नहीं है अपितु यह मेरे जीवन का वह हिस्सा है जो मैंने ख़ूबसूरती और ख़ुशी के क्षणों में सहेजकर बाकि जीवन में अनवरत जिया है. यह सर्वथा सरल, सहज और आंतरिक रहा मेरी राहों में; जीवन की राहों में अपना बाँकपन और आज़ादी समेटे प्रेम मुझे हर नए पल एक नए सूर्योदय का एहसास देता रहा. प्रेम सदैव सुलभता और स्वातंत्र्य का सम्मिश्रण रहा जो झोली में रिश्तों और समर्पण की सौगात भरे. विनोबा के सिद्धांतों में लिपटा "मैं" का विलय और केवल "होने" का एहसास जो प्रेम भलिभांति जीता है; जीवन के तमाम अहंकारों क...

विश्वास – जीवन जीने के लिए एक अपरिहार्य गुण

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जब भी आप पीछे मुड़कर देखते हैं और अपनी जीवन यात्रा के बारे में सोचते हैं, तो एक ऐसी चीज है जिसके बारे में आप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बेहद आभारी होंगे, वह है आपकी विश्वास करने की क्षमता। अविश्वास कारक के बारे में बहुत कुछ पढ़ने और चर्चा करते रहने के लिए उपलब्ध है कि हम जिस समाज में रहते हैं, वहाँ यह कैसे बढ़ रहा है, या जिस समाज में हम साथ रहने की योजना बना रहे हैं वहाँ कैसे उभर रहा है! लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि विश्वास कैसे अपनी भूमिका हमारे अस्तित्व में निभाता है। एक इंसान होने के नाते हम सभी "अजनबियों" पर भरोसा करने में पैदाईशी तौर पर सक्षम होते हैं; उस महिला से जो बच्चे को जन्म देती है, लेकिन बच्चे को उसके बारे में कुछ भी पता नहीं होता है, से लेकर अपनी उचित अंत्येष्टि की ख्वाहिश लिए किसी के हाथों में मरना। आप जानते हैं कि इस दुनिया में, जीवन के किसी एक या अन्य बिंदु पर, हम वैसे व्यक्ति की तरह कार्य करते हैं, जो हमारी जीवन यात्रा का हिस्सा होते हैं और दूसरों के साथ भी उसी तरह का व्यवहार करते हैं। एक ही व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि दूसरों के साथ भी। ब्रह्म...

जीवन यात्रा के २२ वर्ष और रोज़ पलटते पन्ने

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  ख़तों में उपजी अभिव्यक्ति और भावों का सम्मिश्रण जीवन के पड़ावों में ख़ूबसूरती बिखेरता है! हम कितनी समस्याओं या चुनौतियों से जूझ रहे हैं यह हमारे प्रेम करने और जीने के तरीकों से इतर हमें कदम-कदम पर एहसासों की डोर थामे रहने की ताक़त देता है. लेखन से मुझे ख़ुद को व्यक्त करने में सक्षम होने की खुशी और संतुष्टि मिलती है। वह वक़्त सबसे ख़ूबसूरत होता है जब मैं अपने रिश्तों में उनके लिए नियत प्रेम और पलों को बाँट पाता हूँ और जो रिश्ते हवाओं के साथ धुँधला रहे हैं उनकी खुशबुओं को फिर महसूसने के अनुभव को आत्मसात कर पाता हूँ. दुनिया में प्रेम और करुणा के साथ जी सकने वाले अनगिनत कारण हैं जिनके ज़रिये आसपास पनपते दूषित माहौल का सामना करना ज़रा सहज और साहस भरा हो जाया करता है. मैं नहीं जानता कि कोई किस तरह मेरे किसी काम को देखता है लेकिन मेरे लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि मैं ख़ुद के द्वारा किये गये काम, लिए गये फैसलों और जिए गये पलों को कैसे देखता हूँ! समय ने मुझे विभिन्न रिश्तों और घटनाओं के माध्यम से प्यार और सहयोग को भारी मात्रा में मुझ तक पहुँचाया है। इस साल की शुरुआत में ख़ुद के लिए वक़्त नि...

आभार, ज़िन्दगी और मैं -

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हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां हर कोई अपने जीवन में किसी न किसी चीज का पीछा कर रहा है। एक स्थान से दुसरे की ओर बढ़ने की इस यात्रा में हम अपनी भावनाओं , जरूरतों , लालच , आकांक्षाओं और अन्य कई चीजों के साथ काम करते हैं , जिसके परिणाम में हम आनंद , खुशी , तनाव , दुःख , दबाव , क्रोध , शांति , दोष , कृतज्ञता जैसी कई सारी भावनाओं को महसूस करते हैं। मैं कुछ साल पहले स्वामी विवेकानंद को पढ़ रहा था , उन्होंने अपने एक भाषण में कहीं उल्लेख किया था कि दोषारोपण का खेल खेलने के बजाय हम एक बार ठहर कर यह देख सकते हैं कि हमारे भीतर से निकलने वाली हर चीज का स्रोत क्या है! यह विचार मुझे बहुत ताकत देता रहा जब मैं अपनी सीमाओं को पार कर रहा था और लोगों की कहानियों के साथ अपने व्यक्तिगत विकास के लिए एक रास्ता खोज रहा था। दो साल पहले एक आवासीय कार्यक्रम के दौरान , मुझे आभार व्यक्त करने की ताकत का एहसास हुआ कि यह उस दुनिया में जादू कैसे पैदा कर सकता है जिससे हम जीना चाह रहे हैं!                    ...

कवितायें (दक्षिण यात्रा)

कविता - १ एक पगडंडी भाग रही है अपनी जान बचाने दौड़ती हुई रेल की पटरियों के साथ; शायद कोई पक्की सड़क, उसका पीछा कर रही है। ________________________________________ कविता - २ एक नज़र ने देखा मुझको दूरी के दूसरे छोर से, क...

कार्य

   "वह नास्तिक है जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता |”                                                                 -- स्वामी विवेकानंद विचारों की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनकर, आसपास के वातावरण को सुनकर और उसका  अवलोकन  करने के बाद हम अच्छी तरह चीजों के  दोहराव  तथा उनका  आकलन करके उनसे ज्यादा प्रभावी तरीके से सीख सकते हैं | किसी विचार के तथ्यों को सुनकर, उसके महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर हमें अपने काम करने की प्रणाली को बहुत ही सुदृढ़ रखना होता है अगर हम सही मायनों में काम से लगाव रखते हैं | काम की शुरुआत से पहले हमारा उससे जुड़े सारे पहलुओं से अवगत होना अत्यंत आवश्यक है कि किस तरह वो हमारे काम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं और किस प्रकार उनसे निपटा जाना चाहिए, जोकि बाद में हमें बाकि हिस्सों के निर्धारण में सहायता प्रदान करता है; इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में  डिज़ाइन...