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क्यूं नहीं.........अगर मैं

क्यूं प्यास ना बुझाई जाए अगर मैं समन्दर को पी सकता हूं, क्यूं सोया जाए जबरन गर मेरी आंखे तारों को देखना चाहती है, क्यूं बिखेर कर समेटा जाए किसी को अगर मैं कुछ संवारने की ताकत ...