संदेश

संघर्ष लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ग़ुलामियत का कक्ष

हम सब जड़ हो चुके हैं और देख रहे हैं अपलक उस श्वेतपत की ओर, जंहा आजाद है कुछ काले वर्ण, जो हमें अपना ग़ुलाम बनाए हुए हैं हमारी सोच भी सिमट चुकी है अब उन्हीं के इर्द-गिर्द ही |   कमरे में खिड़की तो है लेकिन दृश्य के लिए ना कि दर्शन को, विचारों को तो बंदी बना चूका है वो उपाधिधारक, जिसके समक्ष हमारी सोच कठपुतली बनी हुई है | और हम सब झुझ रहें हैं, एक अदृश्य युद्ध से जो छिड़ा है हमारी आवाज़ और सोच के बीच | मजबूर हैं वे लोग जिन्हें किताबों ने कैद कर लिया है, कुछ नज़र नहीं आ रहा है उन्हें ऐसे ही वे अंधे ठोकर खाकर मार दिए जायेंगे |   सहसा मुझे दिखाई पड़ता है वह मजबूर वृक्ष, जो हाथ जोड़े खड़ा था मानव के समक्ष, फिर भी उसकी सांसें थामकर इस कक्ष को आकार दिया गया है |   मैं अब चाहता हूँ कि किताब के पीछे की मासूमियत को पहचाना जाये, ढूंढ लिया जाये वो दर्द जो अब तक अनदेखा किया गया विचारों की पराधीनता के चलते, उतार दिया जाये वो असहनीय बोझ, जिसको हम सब   ...

ख़ामोश

जुबान तुम्हारी काटना किसी के बस का नहीं, मगर फिर भी तुम चुपचाप तमाशा देखते हो । यह जो आजकल बहुत बोलता है ना, एक रात यही कतर जाएगा तुम्हारे कान; और फिर तुम सब ख़ामोश हो जाओगे ।  ...

फिर मैं कविता लिखता हूँ ।

इन अंधियारों के बाहर जाकर मैं अंधियारों में झांकता हूँ, उन दरवाजों के भीतर जाकर मैं दरवाजों में देखता हूँ, तुम जो चाह रहे हो सुनना कभी ना तुमसे कहता हूँ, निकलकर खुद से बाहर फिर मैं कविता लिखता हूँ | टूटे हुए को जोड़कर फिर नए सिरे से चुनता हूँ, समेटकर बिखरे हुए इंसान   नित नए खिलोनें बुनता हूँ, जिनको कर दिया है विलुप्त तुमने बच्चों के बचपन से, छीन लिया जिनको तुमने अपने वजूद के सपनों से, मत ग्रास करों यूँ इनको एक बच्चा बन यह कहता हूँ, पाकर सब कुछ खो देता जब फिर मैं कविता लिखता हूँ | तुमको वाजिब लगता है यूँ उठाना सवाल मेरे शब्दों पर, पूछता हूँ मैंने कब कहे हैं कोई शब्द ही अपने कथनों में, बन चूके ग़ुलाम तुम औरों के इस क़दर के खुद को भूल गए, ना देख पाए आईना भी तुम फिर मुरझाये से फूल हुए, अब भी नहीं कहता हूँ तुमसे बस खुद को यह समझाता हूँ, जुड़ जाता हूँ बिखरकर जब फिर मैं कविता लिखता हूँ |                                 .....कमलेश.....    

कोटा वृतांत

चित्र
४ मई २०१५, वो अपने पापा के साथ डकनिया तलाव रेलवे स्टेशन पर खड़ा था, ये भी नहीं जानता था की जाना कहा है । एक ऑटो वाले से पूछा “यंहा IIT की कोचिंग कहा है ?” ऑटो वाले ने जवाब दिया “कौन सी बिल्डिंग जाना है भैया ?” खैर उसने अपना बैग निकाला और देखा एक पुराने लैटर को जिसमे सबसे उपर CP लिखा हुआ था, लड़के ने कहा “जी CP ले चलो ।” ५मिनट के बाद वो अपने पापा के साथ CP TOWER में था । एडमिशन सेक्शन में जाकर उसने पूछा “ IIT JEE के लिए कहा एडमिशन होंगे ?’’ कुछ वक़्त बाद वंहा के हेल्पर ने उसे पूरी जानकारी दी और कुछ २ घंटे बाद वह भी कोटा का छात्र बन चूका था, उन १ लाख स्टूडेंट की लिस्ट में उसका भी नाम लिख चूका था जो यंहा हर साल सिर्फ कोचिंग करने आते थे । १० मई २०१५ ,          इंदिरा कॉलोनी का C -५१ मकान, फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरे में बैठा ये लड़का एक साल बाद खुद को IITIAN बनते देख रहा था । शाम को ५ बजे ओरिएंटेशन सेशन में जाकर डॉ. प्रमोद माहेश्वरी का आत्मविश्वास से ओतप्रोत भाषण सुनकर रात के ९ बजे अपने हाथ मेें 4 किताबे और होठ पर हलकी मुस्कराहट लेकर अपने कमरे पर पहुंचा,...

पथिक

राह चलते उस पथिक को आँखे मेरी जब देखती है, अमीट आस मेरे नयन से उसकी आँखे जब देखती है । नही होती जिसके स्वप्न में कोई विराट अट्टालिका,  है दृश्य उसके स्वप्न का सुख की छोटी चादर ...

व्यथा

हर बीती बात अब पराई लगती है, ऐ जिंदगी अब मुझे धूप लगती है । उड़कर आते थे कभी खुशी से घर, अपने घर में तो अब घुटन लगती है । चाहा के ना लिखूं किसी के दर्द को पर, हर तकलीफ अब मुझे अपनी लगत...

घर लौटकर आना नही चाहता ।

चित्र
Source - Bindaas Attitude  सोच रहा हूँ इस दफा कुछ कपड़े और खरीद लूँ, गाँव की हर एक गली घूमकर आँखो में समेट लूँ, जानने वाले हर शख्स से एक बार फिर मुलाकात करूँ, घर की दीवार में लगी तस्वीर को अपने साथ ले चलूँ, दिल आज के बाद घर लौटकर आना नही चाहता । कुछ लतीफे जो अधूरे है बच्चों को सुनाकर पूरे कर दूँ, कुछ रिश्ते जो रुठे है मनाकर प्यार से गले लगा लूँ, रोज़ की राहों को छोड़कर नयी मंजिलें तलाश करूँ, ख्वाहिशों को अधूरा रख के घर लौटकर आना नही चाहता । अपने सपनो में प्राण फूंक नये रास्तों को अपना लूँ, मेरी तकदीर मेरे साथ रहे ऐसा कोई अफ़साना बना लूँ, इस घर, परिवार, और गली से आज से अजनबी हो जाऊं, जिंदगी का सूकून गंवाकर घर लौटकर आना नही चाहता ।                             .....कमलेश.....

वक्त का पहिया

चित्र
Source - TreeHugger किसी का इंतज़ार नहीं किसी पर ऐतबार नहीं, वक़्त का पहिया बस चलता है चलता रहता है |   किसी की मेहनत पर रोक लगाता है कभी , तो अनजाने में किसी की तकदीर महका देता है, सपने अतरंगी देखते हैं लोग बस चलते रहते है, बदल जाता है कभी किसी की जिंदगानियां भी, समझाने हर किसी को सबक भीं दे जाता है | वक़्त का पहिया .........   मेहरबान हो जाता है यह बरसों में कभी किसी पर , बना जाता है फिर शक्स को वो मुकद्दर का सिकंद्दर, रंगीन हो जाती है ज़िन्दगी जो वक़्त से जुडा होता है, बंज़र हो जाते हैं बगीचे गर वक़्त जो खफा होता है, मुझ पर भी है मेहर शायद खुदा के साये सा चलता है | वक़्त का पहिया ........                                                   .....कमलेश ..... ...

कल

चित्र
Source - Youngisthan.In बीते लम्हो का गट्ठर है ये आने वाले समय की उम्मीद भी इक अल्फाज ही नही है केवल अपनी ही बनाई पहेली है 'कल'।   समेटे होता है कभी बुरी यादें सहेजता है खुबसूरत बात भी एहसास हमेशा ही दिलाता है कौन किस राह से गुजरा है गलतियो का सबक है शायद आपका एक अनुभव भी है 'कल'। उम्मीदों का सागर सजाता है कभी तो कभी ना टूटने वाली आस भी कुछ करने की उम्मीद जुटाते है लोग इसके लिए सपने सजाते है इक हसीन सा लम्हा है शायद आने वाला हमसफर भी है 'कल'। ना जानता है कोई सुरत इसकी फिर भी इसे जीना चाहता है जिसका मनचाहा हो ना पाया था वो शख्स इसे भुलाना चाहता है सब कुछ होकर भी कुछ नही है आज के गुजरने पर ही आता है 'कल'।                                                                ...

गोली

मुझ पर गोली चलाकर सोचता है कि सारा देश खामोश हो जाएगा ना भूल मेरा लहू मिट्टी मे गर मिला तो सारा धरातल डोल जाएगा दाने दाने को मोहताज कर दूंगा तब तुझे सारा सबक मिल जाएगा क्या ह...

इंतजार .... मेरा

चित्र
   ये कहानी अपने ही देश के एक आम इंसान की है | एक गरीब परिवार में पैदा हुआ लड़का अपने  घर की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ अपने लिए भी पैसे कमाता हुआ बड़ा होता है | उसकी ज़िन्दगी के दस साल यूँही गुजरते हैं,अपने पैसों से किताबें खरीदकर वो कुछ न कुछ पढता रहता था | सौभाग्यवश उसकी मेहनत रंग लाती है और घर के उस बड़े बेटे का चयन भारतीय सेना में हो जाता है |                    सेना में भर्ती के कुछ दिन बाद ही सीमा पर फायरिंग होती है और कुछ आतंकियों को मौत के घाट उतार वो बेटा देश के लिए शहीद हो जाता है |तब उसकी अंतरात्मा क्या कहती है कुछ पंक्तियों से वो बात आप तक पहुँचाने की कोशिश की है |   Source- Alamy वो गाँव का बड़ा चबूतरा, वो गेहूं के लहलहाते खेत, वो पुराना सरकारी स्कूल, अब भी मेरा इंतज़ार कर रहा है | वो संकरी सी तंग गलियां, वो कोने वाला हैंडपंप, वो चौपाल पर बैठी मंडली, सभी मेरा इंतज़ार कर रहे हैं | वो बुढा पीपल का पेड़, वो बाड़े में बंधे जानवर, वो सूखे भूसे का ढ...

धरा की आवाज

चित्र
    आज इस 4G के युग में हम लोगो ने इस धरती को इतनी बुरी तरीके से तबाह कर दिया है की आने वाले कुछ दशकों में इस धरती से इंसान का वजूद ही ख़त्म हो जायेगा | इस असहनीय पीड़ा को सहते हुए जब इस धरती माँ का दिल दर्द से तड़प उठता है तब वो हम सब से क्या कहती है पढ़िए निचे की कुछ पंक्तियों में ....   Source - Veterans Today  मेरा सीना चीर कर प्यास बुझाते हो, मेरी बांहे काट कर घरोंदे बनाते हो, क्या होता है वो दर्द काश तुम कुछ समझ पाते | खोखला बना दिया है मेरी रूह को, दिनोंदिन तुम्हारी इन लालसाओं ने, क्या होता है वो खालीपन काश तुम कुछ समझ पाते | मेरे चेहरे को धुंए से ढक दिया, जिस्म को रसायनों से जला दिया, क्या होती है वो पीड़ा काश तुम कुछ समझ पाते | रंग ही फैला था मुझ पर प्रेम का, नफरत से तुमने उसे लहू किया है, क्या होती है ये मोहब्बत काश तुम कुछ समझ पाते |  मेरा आसमां भी काला पड़ गया है, जो कभी मेरा आईना हुआ करता था, क्या होता है वो अपनापन काश तुम कुछ ...

रंगीन परिंदा

लम्हों को लेकर आगोश में इन सर्द हवाओं से टकराया एक बैरंग परिंदा स्याह रात में मंडराता हुआ उस पेड़ के पास |   आँखे थी उसकी चमकती हुयी शायद ख्वाब बिछे थे वहाँ काले विशाल से उसके पर होसले सिमटे थे उसके जहां देखा था शायद उसने मंजिल का कोई निशान साँसे थी उसकी थमी हुयी नजरें भी थी गड़ी हुयी एक अचूक निशाना उसका यूँ जाकर के लगा शिकार पर ताक़त उसकी लगी थी पूरी अपनी मंजिल की राह पर फिर किया उसने अंतिम प्रहार चित करके सारी अड़चन को कस कर जब वापस वो उडा अपने शिकार को पंजों में ख़ुशी थी उस आवाज़ में बैरंग से रंगीन हो गया उस काली स्याह रात में अपना उजाला भर गया ।                           .....कमलेश.....

चाहत

ठोकरों से बिखरा हुआ मैं तुझसे जुड़ कर अवतार होना चाहता हूँ |   डूबकर के तेरे इश्क़ में इस समंदर से पार होना चाहता हूँ |   खुद को खो चूका मैं तुझको जीतकर हार होना चाहता हूँ |   बनाकर साँसों को कलम तुम्हारे लिए गीतकार होना चाहता हूँ |   सुन ले खुदा तू अरज मेरी अस्तित्व खोकर निराकार होना चाहता हूँ |                                         .....कमलेश . ....

कुछ वक़्त के बाद

चित्र
 Source-Google कुछ वक्त के बाद आज फिर ये ख्याल आया है, पथरीली राहों के इस सफर में क्या मैंने पाया है; आज ख्वाहिश हो गई एक तस्वीर बनाने की, चाहत हो गई उसे अपने रंगो में डुबाने की ।                       सफर की राहों में जिदंगी को देखा है मैंने, ठोकर खाकर यहाँ संभलना सीखा है मैंने; एक अजनबी मुस्कान को अधरों पर रखता हूँ, क्या रह गया है बाकि यही बात सोचता हूँ; उन बिखरे ख्वाबों से पुराने मंजर याद आते है, जाने क्यूँ वो बीते लम्हों को साथ ले आते है; कुछ वक्त के बाद फिर हौसला आया है, इस अँधेरी कोठरी में वापस उजाला आया है; हसरत हो गई नये ख्वाबों को सजाने की, चाहत हो गई उन्हें अपने रंगो में डुबाने की।                      बातों का वो बवंडर डरता रहा मैं जिस से, उसे आज खुलकर कहने की ख्वाहिश हुई है; दम घोटती इस छोटी सी दुनिया से, आज दुर चले जाने की चाहत हुई है; दा...

कोरा कागज़

देखा करता है ख्वाब हर कोई मुकम्मल मुश्किल से कर पाता है अपनी तकदीर लिखने के जुनून में कोरा कागज फिर कोरा रह जाता है ।   हौसलो में ताकत हर किसी के नही है खुद पर यकीन हर किसी को नही है ठहर जाता है मुसाफ़िर राह में अपनी मंजिल से भटक जाता है अपने सपनो को पूराकरने चला वो कोरा कागज फिर कोरा रह जाता है । चाहते है सब अपनी मर्जी का जहान् वक्त को बदलने की लेकिन चाहत कहाँ पलट देता है बाजी राह में वो वक्त फिर हावी हो जाता है अपने सपनो को पूरा करने चला वो कोरा कागज फिर कोरा रह जाता है ।                                    ..... कमलेश.....

तुझे अपना वजूद बचाना है

चित्र
ये पथरीली राहें है जिंदगी की                       हर कोई चल ना पाता है यहाँ                      संभलकर लड़ना मुश्किलो से                      तुझे अपना वजूद बचाना है । Storymantra.com       धोखे भी दिए जाएंगे तुझे       सामने मीठा बोल कर तेरे       छुरी को पीठ मे उतारेंगे       सुनना आवाज बस दिल की       हर जवाब जहाँ कैद रहता है       दुनिया से लड़ते रहकर भी       तुझे अपना वजूद बचाना है । Swatisani.net   हर कदम पर दर्द भी होगा   जो अपनो की ही देन होगा   ना छोड़ देना उम्मीद को तू   कितना ही अँधेरा क्यूँ ना होगा   करना ऐतबार अपने रब पर   जो मदद को तैयार रहता है   जीतकर अपनी ही बुराइयों से   तुझे अपना वजूद बचाना है ।        ...