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तुम, मैं या वक़्त?

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Source - Pinterest.com मु झे नहीं पता कि मैं क्या दे सकता हूँ तुम्हें , लेकिन मैं इतना ज़रूर जानता हूँ कि अगर देखोगे मेरी आँखों में कभी जो उम्मीदों के साये के साथ तो वहाँ तुम्हें इतना तो हौसला मिल जायेगा कि मैं खड़ा हूँ वहीं जहाँ तुम मुझे अपने लिए देखना चाहते हो। ज़िन्दगी को इस तरह जीना की उसका ख़ुद का मन करे कि वह तुम्हारे इर्द गिर्द हमेशा ही घूमती रहे जिस तरह तुम अपने प्रेम और जीवन के आसपास घूमते हो। बहुत आसान होता है किसी की ज़िन्दगी में अपने लिए एक जगह बना लेना लेकिन उस जगह रहकर भी सामने वाले शख्स़ को उसकी जगह और उसका वक़्त नियत समय पर देते रहना बहुत कठिन है। मैं देखना चाहूँगा तुम्हें उसी तरह अपने मुक़ाम पर बैठे हुए जिस तरह मैंने देखा था पहली बार एक तितली को फूल पर बैठे हुए , मेरा प्रेम तुम्हारे रास्ते में उतना ही आड़े आएगा जितना कि बुद्ध का अपनों से किया प्रेम आया था उनके निर्वाण के रास्ते में। तुम देखना किसी रोज़ शांत नदी को , जब तुम्हें लगने लगे थकान इन सारे कामों और यात्राओं से जो तुम इतने वर्षों से करते जा रहे हो , तब मैं तुम्हें देखूँगा उस नज़र से जिसमें तुम ख़ुद को ढूंढने की छवि...

गुमनाम

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Source - wallhere.com तेरी जानिब जब भी कदम बढ़ते हैं कुछ दूर चलने पर अचानक राहें अजनबी हो जाती है ; फिर भी कभी, जो पहुंच जाऊं तुम तक इन गुमनाम राहों से, तो मुझे तुम अपने पास रख लेना, वैसे ही जैसे स्पंज सोख लेता है पानी, और सुनो तुम्हारी आंखों का इंतज़ार होना ख्वाहिश नहीं, चाहत है कि तेरे चेहरे की हंसी हो जाऊं । मुझे अपने नज़दीक वैसे ही संभाल कर रखना जैसे लॉकर रुम में रखा जाता है किसी का सामान, बिलकुल अजनबियों सा गुमनाम ही रखना मुझको तुम, नाम की भीड़ बहुत है इस दुनिया में । कोई पहचान नहीं चाहिए मुझे तुम्हारे करीब जब भी रहूं मैं, मैं नहीं चाहता हूं कि कोई देख ले मुझे तुमको जीते वक़्त, तुझमें से कोई ढूंढ ना पाए मुझको कभी भी, चाहे वो कितना भी अच्छा चोर क्यों ना हो । छुपाओ मुझको अगर तो ऐसे छुपाना, जैसे राम ने अपने वनवास में छुपाया था सीता को ।।                        - कमलेश

कुछ बातें और

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बहुत मुश्किल होता है चंद घड़ियाँ साथ बिताकर सारी यादों को सुनहरा कर लेना, आधा वक़्त तेरी सूरत को निहारने, लटों को गालों से परे हटाने हाथों पर हाथों से कुछ भी लिखने, और पैरों के अंगूठों की झूठी लड़ाई में गुज़र जाता है हमारा । गरियाने के लिए बातों का गठ्ठर, एक दिन पहले वाली फ़ोन कॉल पर होता है बस, जो मिलने आते-आते कहीं खो जाता है, और बचती है केवल खामोशियाँ । सारी निजताओं को अचानक से परे फ़ेंक, जब लिपट जाया करते हैं एक-दूजे से हम, उन नज़दीकियों में जहां केवल हम होते हैं, तब ये महसूस होता है कि इनसे बढ़कर कुछ नहीं । Source - Flickr कुछ वायदे और आरज़ू कुछ आश्वासन और बेमतलब के झगड़े, जब बिखरने लगते हैं हमारे इर्द-गिर्द तो कोशिश यही होती है कि इन्हें जल्द समेट लिया जाए, ताकि हम लौट सकें अपनी पूरानी दुनिया में पहले की तरह, लेकिन इन यादों के साथ जीने के लिए अगली मुलाक़ात के इंतज़ार में ।                             ...

कुछ बातें

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कभी कभी डरा देता है मुझको खामोश बैठ जाना तेरा मेरे पहलु में, ख़ुमारी तेरी मौजूदगी की होती तो ख़ूब है लेकिन वो अचानक भाग खड़ी होती है, तेरे मुझको छू लेने पर और मैं, महसूस करने लगता हूँ फिजिक्स के सारे सिद्धांत तेरे हाथों की नरमाहट में । Source - Pinterest बातों को बगीचे के पार धकेलते वक्त पैर के अंगूठे से तेरी पगतलियों को, छूने की वो साज़िश जब तुम भांप लेती हो, तो लगता है चाणक्य को तुम्ही ने सिखाया है । मेरे लिए खरीदा गया वो तोहफ़ा जिसे तुम यह कहकर देने से मना कर देती हो कि 'जाओ मन नहीं है तुम्हें देने का' और फिर तुम चुप हो जाती हो । तुम्हारी नज़र को सूरज की किरणों की तरहा खुद पर बिखरते देखना और भी मुश्किल हो जाता है उस वक्त, जब तुम पूछती हो कि 'चुप्पी में ख्याल क्या आते हैं तुम्हें ?' 'जानां' मैं कहना भूल गया कि सारी बातें बताई नहीं जाती, "कुछ बातें चाँद सी भी होती हैं ।"                            .....कम...

ग़ज़ल

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Source - Pinterest.pt ये आँखें तुम्हारी शराब है क्या, नाज़ुक होंठ कोई गुलाब है क्या । महकती है खुश्बू हर-तरफ तेरी, जिस्म ये तुम्हारा गुलशन है क्या । रातों से तकरार-चांद से मौसिक़ी, तुझसे इश्क़ कोई मज़ाक है क्या । छू लें तुम्हें जो कभी बेशर्मी से हम, तो बतलाओ कोई ऐतराज़ है क्या । ऐसे वक़्त ज़ाया नहीं किया करते, हसीन शामें हर रोज़ आती है क्या । मेरे सवालों पर ऐसे ख़ामोश बैठ गए, किसी बात की तुम्हें नाराज़गी है क्या । ये ज़माना सताता ही है चाहने वालों को, पर खुद सोचो इसकी औकात ही है क्या । माना कि एक दिन सबको मरना है, तो बतलाओ हम जीना छोड़ दें क्या । कुछ दिनों से ख़फा हैं चंद मिलने वाले, सोचता हूँ ये लोग कहीं के नवाब है क्या । मौत आए तो उसे कहना इंतज़ार करे, तेरे दीदार के बगैर ही मर जाएंगे क्या ।                                           ...

तेरी तारीफ़

हजारों साल पहले किसी ने लिखी थी चाँद पर कविता, अब वह बूढ़ा हो चला है । जब भी कभी निकलता है तारों की गठरी कांधे पर लिए उससे छुट जाती है आजकल, आसमान में किसी पत्थर की ठोकर से, और बिख...

दिल के खालीपन का इश्तेहार

दिल के खालीपन का इश्तेहार यूं लगा रखा है, सारे शहर को उसकी अगुवानी में लगा रखा है । मुश्किलों से मुलाक़ात भी होती रहती है लेकिन, अभी मैंने ध्यान अपना बस उनपे लगा रखा है । वो है...

मेरी कविताएं

कोई भी पंक्ति या ग़ज़ल अब नहीं उतरती मेरे जेहन से पन्नों पर, कोने में कमरे के बिखरे पड़े हैं अब तक कई कहानियों के टुकड़े । दीदार के बगैर ही गला घोंटा है मैंने जाने कितने अल्फ...

पसंद और इश्क़

पसंद होना ना होना दोनों जायज़ है, जैन-दर्शन के स्यादवाद की तरहा ही पसंद भी कुछ पूरी कुछ आधी सब की ज़िन्दगी में ज़रूर होती है । पसंद में एक-ही वक़्त पर अपनी ख्वाहिश को बताया और छुपा...

सृजन

मत पूछो मुझसे कि जो हुआ वो सही था या ग़लत, मेरे बस में कुछ था ही नहीं पता नहीं सब कैसे हुआ और फिर होता चला गया । तेरे होठों की शबनम सा कोई जाम नहीं जहान में, मेरे लबों और तेरी गर्द...

ज़रूरत नहीं

खुशियों के बहानों को तुम्हारे तुम्हें भुलाने की ज़रुरत नहीं, हंसी के अंदाज़ को अपने छुपाने की ज़रुरत नहीं । जैसी ज़िन्दगी तुमने गुज़ारी है अब तक, वैसे ही आगे जियोगी तो बेहतर होग...

मेरे गुलशन का नायाब गुलाब तुम हो

मेरे गुलशन का इक नायाब गुलाब तुम हो, देखता ही रहूँ जिसको वो ख्वाब तुम हो । गुज़रता है वक़्त तो इसे गुज़रने दिया जाए, जहाँ मैं ठहर जाऊं इसमें वो मुकाम तुम हो । अंधेरे से भरी उन त...

अच्छा लगता है मुझे

तेरा मुस्कुराना मेरी बातों पे, नज़रें फेर लेना मेरे इशारों पे, झुका लेना गर्दन मेरे सवालों पे, अच्छा लगता है मुझे । तेरा खामोश हो जाना फ़ोन पर, मायूस हो जाना बिछड़ने पर, शरमा जान...

पहला चुम्बन

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        Source - shutterstock.com  कुछ बातें वैसे ही याद रह जाती है जैसे किसी अच्छी होटल का खाना । बात अगर कही जाए तो दो लफ्ज़ में कही जा सकती है लेकिन बिना बेक ग्राउंड के उसे समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है । आयुष बिना कुछ सोचे समझे अपने कंधे पर एक बैग लादे, सितारा बस में चढ़ा । सारे रास्ते पूराने ख्यालों के पुलिंदे पलटता रहा जो उसे हर लाइन पर मुस्कुराने के लिए बाध्य कर रहे थे । पांच बजकर बीस मिनट पर आयुष नाका नम्बर पांच पर अपने सामान को थामे उतरा । निकट ही के एक रिश्तेदार के घर जाकर जो कि नाके की बगल वाली गली में था वहाँ अपना सामान रख दिया और मोबाइल में अपनी बर्थ की करेंट स्टेटस चेक करने के बाद फिर बाहर सड़क पर घुमने के लिए निकल गया ।                     घूमते हुए जब वह चौराहे पर पहुंचा तो उसे याद आया कि शिवानी की कोचिंग क्लासेस इसी एरिया में पड़ती है । करीब पौने छः बजे तक वह ऐसे ही टहलता रहा मानो उसे किसी का इंतज़ार हो । उस चौराहे पर गुजरने व...

कुछ तुमने कुछ मैंने ...

दर्द के किस्से सुनाए कुछ तुमने कुछ मैंने, फिर सिसकियाँ सुनी कुछ तुमने कुछ मैंने । सारी तकलीफों की नुमाइशें करते करते, कई आँसू भी गिराए कुछ तुमने कुछ मैंने । देखा जब ज़ख्मों ...

मुझे पसंद नहीं

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  मैं तुझे चाँद नही कहना चाहता ना ही तेरी सूरत को चांदनी क्यूँ की चाँद को दुनिया देखती है, लेकिन तुझे मेरी निगाहों के सिवा कोई और इस तरहा देखे मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता की हम दोनों खुली वादियों की सैर करें, हवाएं किसी को नही बख्शती वो किसी को भी कभी भी छू लेती है, लेकिन तुझे मेरे सिवा कोई छुए मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता की तू कभी सोलह श्रंगार करके सामने आये, क्यूँकी तुझ पर फ़िदा होकर हर कोई तुझे चाहने लगेगा, लेकिन मेरे सिवा कोई तुझे चाहे मुझे पसंद नही । मैं नहीं चाहता के हम भीगें सावन की पहली बारिश में, भीग जाने से पानी तेरी जुल्फों में अपना अक्स खोकर उतर जायेगा, लेकिन मेरे सिवा तुझमें कोई खो जाये मुझे पसंद नही ।                           .....कमलेश..... 

कुछ मेरा भी वक्त ज़ाया किया करो ।

कुछ मेरा भी वक्त ज़ाया किया करो, कभी हमे भी फोन लगा लिया करो । रोज़ इसी राह से  काॅलेज जाते हो, कभी तो देखकर मुस्कुरा दिया करो । दर्द होने लगेगा   तुम्हारे  पैरों में, इतना भी ब...

ग़ज़ल

अपनी ख्वाहिशों का सूरज उगते देखा है, मैंने तुझको मेरा नसीब लिखते देखा है । झिलमिलाती है चाँदनी जैसे आसमान् पर, तुझको खिलखिलाकर वैसे हँसते देखा है । सिकुड़ जाती है जो छुईमुई जब छुने पर, मेरी पनाहों में तुझको यूँ शरमाते देखा है । बिखर जाता है जैसे कोई फूल हवाओं में, मेरी बाँहो में तुमको वैसे ही टूटते देखा है । घुलती है जैसे शराब पानी में रुह बनकर, खुद में तुझको उस तरह मिलते देखा है ।                                      .....कमलेश.....

हक़ है मुझे ।

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 Source-7wallpapersstyle  तेरे अधरों से मुस्कुराने का तेरी आँखो में बसने का तेरी रातों को जागने का, हक़ है मुझे । तेरे कदमों से चलने का तेरी राहों पर ठहरने का तेरी मंजिल पर मिलने का, हक़ है मुझे । तेरी आवाज से बोलने का तेरे हाथों से लिखने का तेरे दिल में धड़कने का, हक़ है मुझे । तेरे गमों में डूब जाने का तेरे आँसूओ से रोने का तेरी तन्हाई में सुलगने का, हक़ है मुझे । तेरी बातों मेें छुपे होने का तेरी जुल्फों से खेलने का तेरी साँसो से जीने का, हक़ है मुझे । तेरी यादों में तड़पने का तुझसे मिलने को तरसने का तेरे ख्वाबों में सोने का, हक़ है मुझे ।                   ..... कमलेश.....