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देश और मौतें

कोई सत्तर बरस पहले गोडसे ने खुद को मार लिया था, तब लोग मिठाइयां बांट रहे थे और कर रहे थे जान बूझकर अनजान होने की कोशिश । फिर शुरु हुआ मौतों का दौर साल दर साल लोग मरते रहे, कभी धर...

एहसास

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Source - Google मैं जमाने की भीड़ से बेखबर तेरे इंतजार में खड़ा हूँ, सोते जागते हर पल को बेकरार होकर खड़ा हूँ, नही चाहता कि मुझे तेरे सिवा कोई और चाहे, नही पसंद है कि मेरे सिवा तुझे देखे किसी की निगाहे, इक बारिश मुकम्मल हो तेरी मेरी मोहब्बत के लिए, कुछ हसरत अधूरी रहे इक दूजे की तड़प के लिए, मददगार लगता है मुझको यूँ अकेले बारिश में भीगना, बूंदो के छूने मे है वो आनंद जैसे तुम्हारे लबों को चूमना ।                                                     .....कमलेश.....

तुझे याद करना भूल गया था ।

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 Source - Pinterest.co.kr आज मेरे कमरे ने मुझसे हंसकर बात नही की आज बिस्तर ने उठकर मुझे गले भी नहीं लगाया आज कम्बल ने बेशर्मी से मुझको ओढा नही आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरे शीशे ने मेरी सूरत को नही देखा  आज मेरी कलम ने मुझसे कुछ लिखा नही आज मेरे लिबास ने मुझको पहना ही नही आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरी ग़ज़ल ने मुझे पढने से इनकार किया आज मेरे चश्मे ने मेरी आँखों को धुंधला किया आज मेरे हाथ खुदा की इबादत से मुकर गए आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था | आज मेरी चाय आप ही बेस्वाद हो गयी आज मेरी खाने से ज़रा अनबन हो गयी आज घडी ने मेरा वक़्त मुझे नही लौटाया आज मैं शायद तुझे याद करना भूल गया था |                                          .....कमलेश.....