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मैं और मेरा प्रेम

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 दुनिया में अनगिनत सवालों और परेशानियों के बीच मैं समझ पाया केवल दो बातों को. पहली कि ज़िन्दगी और विश्वास एक न दिखाई देने वाले अटूट धागे में जुड़े हुए हैं जो मेरे अंतस से पनप कर दुनिया में आता है; मैं चाहे कितना भी बाहरी जोर लगाऊं उसे महसूसा नहीं जा सकता बल्कि उसे मैं अपनी अंतस की खोज की यात्रा में सलीके से चख पाता हूँ. दूसरी यह कि प्रेम जीवन के तत्वों का सार है. मेरा पता लिए आस्था, भक्ति, जप, तप की अनगिनत कहानियाँ और प्रतिमाएँ आई किन्तु मैं सिर्फ प्रेम में ख़ुद से मिल पाया. यह कोई एहसास या रिश्ता नहीं है अपितु यह मेरे जीवन का वह हिस्सा है जो मैंने ख़ूबसूरती और ख़ुशी के क्षणों में सहेजकर बाकि जीवन में अनवरत जिया है. यह सर्वथा सरल, सहज और आंतरिक रहा मेरी राहों में; जीवन की राहों में अपना बाँकपन और आज़ादी समेटे प्रेम मुझे हर नए पल एक नए सूर्योदय का एहसास देता रहा. प्रेम सदैव सुलभता और स्वातंत्र्य का सम्मिश्रण रहा जो झोली में रिश्तों और समर्पण की सौगात भरे. विनोबा के सिद्धांतों में लिपटा "मैं" का विलय और केवल "होने" का एहसास जो प्रेम भलिभांति जीता है; जीवन के तमाम अहंकारों क...

केलि और कल

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Source - fr123rf.com ज़िन्दगी के पन्ने कितने ख़ाली हैं यह उनके भरते चले जाने के दौरान महसूस होता है. अपने अस्तित्व में से कुछ खो देने ग़म मुझे इस क्षण में महसूस होता है जब मैं कुछ भी नहीं दे पाने की स्थिति में होता हूँ. कल, यह एक सुरक्षित ख़्वाब है और एक याद भी जिसे अपनी सहजता के अनुसार जीवन में लाया जा सकता है. मेरा कल उन सारे ख़यालों का पुलिंदा है जिन्हें मैं ज़िन्दगी जीने के स्वांग में कहीं छोड़ बैठा हूँ; वे तमाम पल जिनको मैं अपने तईं नहीं जी सका. और इस विचार को देखकर यह लगता है जैसे मैं व्यर्थ ही जीए जा रहा हूँ. कल सजाने के फेर में जब हर दिन छोटी छोटी गलतियाँ करता जाता हूँ तो मुझे सपने में आने वाला कल एक बहुत बड़ी गलती के रूप में नज़र आता है. दुनिया ने इंसान का जीना आसान करने के लिए अनगिनत उपाय किये और किये जा रही है किन्तु मैं यह जानना चाहता हूँ कि ज़िन्दगी जीने की प्रक्रिया को आसान या मुश्किल करने का क्या अर्थ है!  कभी कभी मैं सोचता हूँ कि आदम और हव्वा ने अपने अप्रतिम और अतरंग क्षणों में कल का आविष्कार किया होगा और चाह रखी होगी कि कल भी उनकी केलि-क्रिया के समान सहज, सुन्दर और सजग बना र...

प्रेम की आवश्यकता

दो सितारों की गुफ्तुगू सा एक रिश्ता पल रहा है मेरी पलकों के नीचे, न कोई वादा, न कोई मंज़िल बस सफ़र में चल रहा है कब से; कभी कोई किताब पढ़ता हूँ तो उसमें भी इसी की कहानी होती है, सुनता हूँ गर’ किसी के किस्से उनमें भी यही झलकता है. खेतों में फसल को पानी देते हुए, जानवरों के लिए चारा लाते हुए, किसी के हक़ में आवाज़ उठाते हुए, किसी कविता को लिखते हुए, ज़िन्दगी के किस्सों को सुनाते हुए, बदलाव की प्रक्रिया को अंगीकार करते हुए, दुनिया की राहों में ख़ुद को ढूंढते हुए, मैं नहीं खोज पाया आज तक और कुछ हर दफ़ा एक जवाब क़दमों को आकर्षित करता है कि दुनिया, मुझे और इस रिश्ते को प्रेम के साथ रहकर जीने की आवश्यकता है.                                                   - कमलेश

ज़िन्दगी और प्रेम की जोड़ी

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जब ज़िन्दगी की शुरुआत होती है, तब हमारे पास अपने रिश्ते चुनने का कोई विकल्प नहीं होता, लेकिन ज़िन्दगी के रफ़्तार पकड़ने के बाद भी शायद हमारे पास वह विकल्प नहीं होता. अटपटा लग सकता है सुनने में लेकिन हकीक़त यही है कि हम कोई भी रिश्ता नहीं चुनते अपनी ज़िन्दगी में, रिश्ते हमको चुनते हैं उनको जीने के लिए.                                                   भावनाओं का समंदर कितना गहरा है कोई नहीं जानता फिर भी सब डुबकियाँ लगाते हैं, हम नहीं जानते कि हमारी एक मुस्कान या एक शब्द किसी के जीवन में क्या बदलाव ला सकता है. ज़िन्दगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है यह तो मैं नहीं कह सकता लेकिन जितना कुछ इसके साथ रहकर सीखा है वह बहुत कमाल का है. रास्ते अपनी पहचान हमसे तब तक छुपाते हैं जब तक हम समर्पण न कर दें और समर्पण का पौधा विश्वास के बीज के बिना कभी भी नहीं उग सकता. विश्वास और समर्पण जब एक-दूजे में समाते हैं तब प्रेम पैदा होता है और प्रेम अपने कई स...

कुछ बातें और

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बहुत मुश्किल होता है चंद घड़ियाँ साथ बिताकर सारी यादों को सुनहरा कर लेना, आधा वक़्त तेरी सूरत को निहारने, लटों को गालों से परे हटाने हाथों पर हाथों से कुछ भी लिखने, और पैरों के अंगूठों की झूठी लड़ाई में गुज़र जाता है हमारा । गरियाने के लिए बातों का गठ्ठर, एक दिन पहले वाली फ़ोन कॉल पर होता है बस, जो मिलने आते-आते कहीं खो जाता है, और बचती है केवल खामोशियाँ । सारी निजताओं को अचानक से परे फ़ेंक, जब लिपट जाया करते हैं एक-दूजे से हम, उन नज़दीकियों में जहां केवल हम होते हैं, तब ये महसूस होता है कि इनसे बढ़कर कुछ नहीं । Source - Flickr कुछ वायदे और आरज़ू कुछ आश्वासन और बेमतलब के झगड़े, जब बिखरने लगते हैं हमारे इर्द-गिर्द तो कोशिश यही होती है कि इन्हें जल्द समेट लिया जाए, ताकि हम लौट सकें अपनी पूरानी दुनिया में पहले की तरह, लेकिन इन यादों के साथ जीने के लिए अगली मुलाक़ात के इंतज़ार में ।                             ...

कुछ बातें

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कभी कभी डरा देता है मुझको खामोश बैठ जाना तेरा मेरे पहलु में, ख़ुमारी तेरी मौजूदगी की होती तो ख़ूब है लेकिन वो अचानक भाग खड़ी होती है, तेरे मुझको छू लेने पर और मैं, महसूस करने लगता हूँ फिजिक्स के सारे सिद्धांत तेरे हाथों की नरमाहट में । Source - Pinterest बातों को बगीचे के पार धकेलते वक्त पैर के अंगूठे से तेरी पगतलियों को, छूने की वो साज़िश जब तुम भांप लेती हो, तो लगता है चाणक्य को तुम्ही ने सिखाया है । मेरे लिए खरीदा गया वो तोहफ़ा जिसे तुम यह कहकर देने से मना कर देती हो कि 'जाओ मन नहीं है तुम्हें देने का' और फिर तुम चुप हो जाती हो । तुम्हारी नज़र को सूरज की किरणों की तरहा खुद पर बिखरते देखना और भी मुश्किल हो जाता है उस वक्त, जब तुम पूछती हो कि 'चुप्पी में ख्याल क्या आते हैं तुम्हें ?' 'जानां' मैं कहना भूल गया कि सारी बातें बताई नहीं जाती, "कुछ बातें चाँद सी भी होती हैं ।"                            .....कम...

अन्तिम इच्छाएं

ख्वाहिशों का जेहन में होना शाश्वत क्रिया होती है, और सांसें इच्छाओं पर होने वाली महज़ एक प्रतिक्रिया का रूप, कोई सांस लेना छोड़ भी दे तो वह मर नहीं जाएगा, पर जब इच्छाओं का अं...

ग़ज़ल

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Source - Pinterest.pt ये आँखें तुम्हारी शराब है क्या, नाज़ुक होंठ कोई गुलाब है क्या । महकती है खुश्बू हर-तरफ तेरी, जिस्म ये तुम्हारा गुलशन है क्या । रातों से तकरार-चांद से मौसिक़ी, तुझसे इश्क़ कोई मज़ाक है क्या । छू लें तुम्हें जो कभी बेशर्मी से हम, तो बतलाओ कोई ऐतराज़ है क्या । ऐसे वक़्त ज़ाया नहीं किया करते, हसीन शामें हर रोज़ आती है क्या । मेरे सवालों पर ऐसे ख़ामोश बैठ गए, किसी बात की तुम्हें नाराज़गी है क्या । ये ज़माना सताता ही है चाहने वालों को, पर खुद सोचो इसकी औकात ही है क्या । माना कि एक दिन सबको मरना है, तो बतलाओ हम जीना छोड़ दें क्या । कुछ दिनों से ख़फा हैं चंद मिलने वाले, सोचता हूँ ये लोग कहीं के नवाब है क्या । मौत आए तो उसे कहना इंतज़ार करे, तेरे दीदार के बगैर ही मर जाएंगे क्या ।                                           ...

भूत, ज़िन्दगी और प्रेम

               सारी कहानियां अधूरी होती है, जो कहानी पूरी हो जाए वो कहानी कहानी नहीं । अंत जैसी कोई भी चीज इस दुनिया में नहीं है, जिसका इंतजार किया जाए । यह कहानी भी अपना अंत नह...

मेरे गुलशन का नायाब गुलाब तुम हो

मेरे गुलशन का इक नायाब गुलाब तुम हो, देखता ही रहूँ जिसको वो ख्वाब तुम हो । गुज़रता है वक़्त तो इसे गुज़रने दिया जाए, जहाँ मैं ठहर जाऊं इसमें वो मुकाम तुम हो । अंधेरे से भरी उन त...

अंतर और रिश्ते

रिश्तों का कोई नाम नहीं होता ना ही कोई नागरिकता भी ये वैसे ही काम करते हैं, जैसे कि साइबेरिया के पंछी चले आते हैं हिंदुस्तान बिना कोई वीज़ा लिए । कुछ कमजोरियों औ' ताकत के दरम...

अच्छा लगता है मुझे

तेरा मुस्कुराना मेरी बातों पे, नज़रें फेर लेना मेरे इशारों पे, झुका लेना गर्दन मेरे सवालों पे, अच्छा लगता है मुझे । तेरा खामोश हो जाना फ़ोन पर, मायूस हो जाना बिछड़ने पर, शरमा जान...

ख़त

अपनी प्रेयसी के लिए ना जाने किस तरह खुद का कलेजा निकालकर रखता है, एक प्रेमी खुद के टुकड़ों को समेटकर, उसे ख़त लिखता है । एहसासों की फेहरिस्त बनाए नहीं बन पाती, कुछ बंदिशें अल्फ...

जागना

कल रात वो जागा था, पसीने से लथपथ आँखो में लाली और कंपकंपाते होंठ, मैंने पूछा कारण तो कहने लगा वही बहाने जो हमेशा से सुने हैं मैंने । ये दुनिया अभी सो रही है, सब को एक साज़िश के त...

पहला चुम्बन

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        Source - shutterstock.com  कुछ बातें वैसे ही याद रह जाती है जैसे किसी अच्छी होटल का खाना । बात अगर कही जाए तो दो लफ्ज़ में कही जा सकती है लेकिन बिना बेक ग्राउंड के उसे समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है । आयुष बिना कुछ सोचे समझे अपने कंधे पर एक बैग लादे, सितारा बस में चढ़ा । सारे रास्ते पूराने ख्यालों के पुलिंदे पलटता रहा जो उसे हर लाइन पर मुस्कुराने के लिए बाध्य कर रहे थे । पांच बजकर बीस मिनट पर आयुष नाका नम्बर पांच पर अपने सामान को थामे उतरा । निकट ही के एक रिश्तेदार के घर जाकर जो कि नाके की बगल वाली गली में था वहाँ अपना सामान रख दिया और मोबाइल में अपनी बर्थ की करेंट स्टेटस चेक करने के बाद फिर बाहर सड़क पर घुमने के लिए निकल गया ।                     घूमते हुए जब वह चौराहे पर पहुंचा तो उसे याद आया कि शिवानी की कोचिंग क्लासेस इसी एरिया में पड़ती है । करीब पौने छः बजे तक वह ऐसे ही टहलता रहा मानो उसे किसी का इंतज़ार हो । उस चौराहे पर गुजरने व...

गुज़रना

मेट्रो स्टेशन पर बस का इंतज़ार करते हुए, मेट्रो के गुज़र जाने का गुमान नहीं होता । गुज़रना इंतज़ार का और तुम्हारा बिलकुल ही अलग-अलग होगा मेरे लिए, लेकिन सपनों के गुज़रने और जिंदगी के गुज़र जाने में अनगिनत समानताएं होंगी । तुम चाहो कभी मुझसे कुछ भी तो मैं केवल इतना ही चाहूँगा कि गुज़रो कभी तो ऐसे गुज़रना जैसे चुनावी वादा गुज़रता है ।                           .....कमलेश.....

ग़ुलामियत का कक्ष

हम सब जड़ हो चुके हैं और देख रहे हैं अपलक उस श्वेतपत की ओर, जंहा आजाद है कुछ काले वर्ण, जो हमें अपना ग़ुलाम बनाए हुए हैं हमारी सोच भी सिमट चुकी है अब उन्हीं के इर्द-गिर्द ही |   कमरे में खिड़की तो है लेकिन दृश्य के लिए ना कि दर्शन को, विचारों को तो बंदी बना चूका है वो उपाधिधारक, जिसके समक्ष हमारी सोच कठपुतली बनी हुई है | और हम सब झुझ रहें हैं, एक अदृश्य युद्ध से जो छिड़ा है हमारी आवाज़ और सोच के बीच | मजबूर हैं वे लोग जिन्हें किताबों ने कैद कर लिया है, कुछ नज़र नहीं आ रहा है उन्हें ऐसे ही वे अंधे ठोकर खाकर मार दिए जायेंगे |   सहसा मुझे दिखाई पड़ता है वह मजबूर वृक्ष, जो हाथ जोड़े खड़ा था मानव के समक्ष, फिर भी उसकी सांसें थामकर इस कक्ष को आकार दिया गया है |   मैं अब चाहता हूँ कि किताब के पीछे की मासूमियत को पहचाना जाये, ढूंढ लिया जाये वो दर्द जो अब तक अनदेखा किया गया विचारों की पराधीनता के चलते, उतार दिया जाये वो असहनीय बोझ, जिसको हम सब   ...

मैं

मैं वह नहीं, जिसके साथ तुम बाँट सको अपने ग़म, जिसको दिखा दो तुम गुज़रे हुए पल । मैं वह भी नहीं, जिससे तुम : उम्मीद रखो कि मैं तुम्हारी उम्मीदें पूरी करुंगा, जिस पर तुम्हें गर्व ह...

सच्चाई

मैंने देखी ग्यारह साल की ढोलक, और छः साल की बेक फ्लीप । ऐसा लगा कि जाकिर साहब और टाइगर श्राॅफ ने, व्यर्थ ही कर दिया जिंदगी को क्योंकि यह दोनों पूरी दुनिया को प्रशिक्षण दे सकत...

पूछना

तुम्हारा यह सवाल करना कि तुम कवितायेँ कैसे लिखते हो ? उतना ही स्वाभाविक है जितना कि तुम्हारा, एक गोलगप्पे वाले से पूछ लेना कि कैसे वो इतने अच्छे गोलगप्पे बनाता है ? इस सवाल क...