प्रेम और प्रेम

Source - psychologicallyastrology.com


तुमने मुस्कुराते हुए मेरे जीवन के बगीचे में कदम रखा और उस क्षण से आज तक हर लम्हें में ख़ूबसूरती भरते रहने में मगन रही तुम। मेरे द्वारा लिए गए श्वास में तुम्हारे होने का पुख़्ता सबूत है या यूँ कहूँ कि ज़िन्दगी के कर्ज़ को उतारने में तुम्हारी उधारी बहुत है। इतने वर्षों के इस रिश्ते ने अनगिनत मोड़ और पड़ाव देखे किन्तु अपनी नियति से यह अनभिज्ञ ही रहा। आज जब अपने प्रेम के ज्वार के क्षणों में तुम्हें खोजता हूँ तो हर सुधि पर तुम्हारी छवि दिखाई पड़ती है। कुछ रिश्ते आज़ाद करते हैं ज़िन्दगी के बेगानेपन को, यह सच है लेकिन कैसे! यह अब तक अनुत्तरित है।

तुम्हारे द्वारा सुनाई गई एक ख़बर मुझे प्रेम और प्रेम में फ़र्क समझाएगी यह नहीं सोचा था। चेहरे पर मुस्कान, आँखों मे अविरल नीर और हृदय में अपार उन्माद लिए निहारता रहा तुम्हारी तस्वीर, किन्तु समझ नहीं पाया अब तक कि ऐसा क्या है जो मेरे अन्तस से उमड़ पड़ा है तुम्हारी ज़िन्दगी की नई राहों की आहट पाकर! मैं तमाम असमंजस से परे यह समझने में क़ामयाब रहा हूँ कि प्रेम की उम्र और सीमा तय नहीं किये जा सकते; यह तब भी वही था और आज भी वही और वहीं है। बदला नहीं कुछ एक पल में हमारे बीच। मैं अब भी तुम्हें वैसे ही आलिंगनबद्ध कर लूँगा जैसे पहली बार मेरी आँखों में प्रेम पढ़कर तुमने मुझे कर लिया था। मैं और तुम 'हम' न होकर भी हैं और उतने ही आज़ाद भी। अब बस एक ही ख़्वाहिश है कि तुम्हें तुम्हारी नई ज़िन्दगी की दहलीज़ तक, तुम्हारा हाथ थामकर छोड़ दूँ और सदैव तुम्हारे अधरों की मुस्कान बनकर तुम्हारे होने में खो जाऊँ! तो कहो, क्या ख़याल है?

- कमलेश 

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