केलि और कल

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ज़िन्दगी के पन्ने कितने ख़ाली हैं यह उनके भरते चले जाने के दौरान महसूस होता है. अपने अस्तित्व में से कुछ खो देने ग़म मुझे इस क्षण में महसूस होता है जब मैं कुछ भी नहीं दे पाने की स्थिति में होता हूँ. कल, यह एक सुरक्षित ख़्वाब है और एक याद भी जिसे अपनी सहजता के अनुसार जीवन में लाया जा सकता है. मेरा कल उन सारे ख़यालों का पुलिंदा है जिन्हें मैं ज़िन्दगी जीने के स्वांग में कहीं छोड़ बैठा हूँ; वे तमाम पल जिनको मैं अपने तईं नहीं जी सका. और इस विचार को देखकर यह लगता है जैसे मैं व्यर्थ ही जीए जा रहा हूँ. कल सजाने के फेर में जब हर दिन छोटी छोटी गलतियाँ करता जाता हूँ तो मुझे सपने में आने वाला कल एक बहुत बड़ी गलती के रूप में नज़र आता है. दुनिया ने इंसान का जीना आसान करने के लिए अनगिनत उपाय किये और किये जा रही है किन्तु मैं यह जानना चाहता हूँ कि ज़िन्दगी जीने की प्रक्रिया को आसान या मुश्किल करने का क्या अर्थ है! 

कभी कभी मैं सोचता हूँ कि आदम और हव्वा ने अपने अप्रतिम और अतरंग क्षणों में कल का आविष्कार किया होगा और चाह रखी होगी कि कल भी उनकी केलि-क्रिया के समान सहज, सुन्दर और सजग बना रहे लेकिन अफ़सोस हम मानव ऐसा नहीं कर पाए. कितना सुन्दर होता ‘गर कल को, ऐसे देखा जाता मानो वह एक प्रेम-जनित तत्व है जो अतरंगता के क्षणों की उपज और गूढ़-सौन्दर्य का पर्याय है; जो हर घटित हो रही चीज़ को ख़ुद में समाने का आमन्त्रण देता है.

दुनिया को ज़रूरत है कि वह प्रेम समझने की बजाय कल को समझने का यत्न करे. इस दुनिया का हर प्रेमी अपनी प्रेमिका के संग में महसूसता है सृजन के बीज. उनके चुम्बनों में सारे समुद्रों, नदियों और झीलों का जल समाया होता है. प्रेम की अभिव्यक्ति अनंत है और केलि उसका एक अंश मात्र; तब भी इस अंश में इतनी जीवन्तता है कि इसके अनुभव मात्र से अंतस में प्रबल जिजीविषा उत्पन्न हो उठती है और उन क्षणों में हर प्रेमी-युगल एक ख़ूबसूरत कल का ख़्वाब बुनता है.

ज़िन्दगी का वह हिस्सा जिसमें मुझे कल के चिंतन का बंधन न हो वह मेरे लिए केलि का अभिन्न-रूप है. केलि वर्तमान को शत-प्रतिशत जीने और पूर्णता में विलीन होने का दूसरा नाम है जिसके परे कुछ देख पाना असंभव है. कुछ ख़्वाब तब ही देखे जा सकते हैं जब उनके बीजों ने पूर्णता का एहसास किया हो. वर्तमान शायद इसलिए उपजा है कि इसमें केलि-सी अतरंगता और जीवन्तता महसूसने की क्षमता और अवसर है अन्यथा निर्जीव तत्वों के अवशेषों से कल बनाने का विकल्प तो हमेशा से खुला ही है.     

- कमलेश

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