-- नोट्स ::


मुझे छुट्टियां कभी भी अच्छी नहीं लगी, छुट्टियों का मतलब आमतौर पर बच्चों या किसी भी वयस्क के लिए आराम करना या मौज करना होता है । मैं हमेशा से छुट्टियों का मतलब यह समझता आया हूं कि एक एक्स्ट्रा मेंबर जो आपके सारे कामों में हाथ बंटा सके, भले उसे वह करना आता हो या नहीं इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता । घर में सबसे छोटे वाले बच्चे की हालत और दिल के जज्बातों को मैंने बहुत क़रीब से देखा और महसूस किया है, छोटा होना अपने आप में कई बार एक गुनाह कर देने जैसा है । जब तक आप को पैरेंट्स सपोर्ट करने के लिए खड़े होते हैं कि भाई ये छोटे का खयाल रखा जाना चाहिए या इस पर वार नहीं किया जा सकता या इससे मस्ती करते वक़्त सावधानी बरतने की बहुत ज्यादा ज़रूरत है और वगैरह वगैरह..। लेकिन इसके उलट जब वही छोटा अपने ही घर में बड़ों के बीच अकेला छूट जाए तो फ़िर उसकी हालत पहाड़ के नीचे आए हुए ऊंट सी हो जाती है जो बिना अपना कुबड़ तुड़वाए बाहर नहीं निकल सकता । तो इन छुट्टियों में उस पर रहम किया जाना चाहिए ऐसा मेरा मत है ।
                       ख़ैर बचपन और जवानी की छुट्टियों में मुझे कभी कोई अंतर नहीं मिला यह अलग बात है कि मैं अभी भी बचपन में ही हूं । बड़े हो जाने पर आप छुट्टियों को बोनस की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश में लगे रहते हैं कि किस तरह बस किसी तरह कुछ न कुछ एक्स्ट्रा जुटा लिया जाए और बग़ैर सांस के काम में लगे रहते हैं। मेरे विचार में छुट्टियों को गुज़रे वक़्त की धमकियों और भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर बिताया जाना चाहिए, जो संभवतः सबसे अच्छा तरीका है । छुट्टियां अपनी ख्वाहिशों को जी भर कर जी लेने का मौका हुआ करती है, जिसे हम व्यर्थ की प्लानिंग में नष्ट कर देते हैं । बच्चें हो या बड़े वे यह बात ज़रूर ध्यान में रखें कि ज़िन्दगी का मज़ा गुज़रे हुए दिनों से बंधे रहने में नहीं है और न ही भविष्य की चिंताओं का आलिंगन करने में, ज़िन्दगी का मज़ा तो केवल वर्तमान के साथ जीते रहने उसके साथ मस्ती करने और रोज़ रात बिस्तर पर उसके साथ लिपटकर सोने में है ।                  
                                                         -- कमलेश

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